दिल्ली को कल 976 मिट्रिक टन के मुकाबले 433 मिट्रिक टन ऑक्सीजन मिली, जो कुल मांग का मात्र 44 फीसद ही है- राघव चड्ढा

नई दिल्ली, 04 मई
आम आदमी पार्टी ने केजरीवाल सरकार को कुल मांग के मुकाबले रोजाना मिल रही ऑक्सीजन और उसके प्रबंधन की जानकारी दिल्ली वालों से साझा की। ‘आप’ के वरिष्ठ नेता एवं विधायक राघव चड्ढा ने कहा कि दिल्ली को कल 976 मिट्रिक टन के मुकाबले 433 मिट्रिक टन ऑक्सीजन मिली, जो कुल मांग का मात्र 44 फीसद है। इसी तरह, बीते एक सप्ताह में दिल्ली को कुल मांग के मुकाबले औसतन 40 फीसद ही ऑक्सीजन मिली है और अभी भी मांग और आपूर्ति में 56 फीसद का अंतर है। उन्होंने कहा कि कल दिल्ली के 41 अस्पतालों से एसओएस काॅल आए और हमने इन अस्पतालों में 21.3 मिट्रिक टन ऑक्सीजन पहुंचा कर 7142 मरीजों की जान बचाई। टीम केजरीवाल ने ऑक्सीजन के बेहतर प्रबंधन के लिए कुछ एसओएस रिजर्व बनाए हैं, जहां से जिन अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी होती है, वहां पहुंचाई जाती है। टीम केजरीवाल 24 घंटे फैक्ट्री से लेकर अस्पताल पहुंचने तक एक-एक ट्रक पर नजर रख रही है। मुझे विश्वास है कि बहुत जल्द मांग और आपूर्ति में अंतर कम होगा और एसओएस काॅल व ऑक्सीजन की कमी भी कम होगी।

दिल्ली को मांग के मुकाबले ऑक्सीजन की आपूर्ति, एसओएस काल पर ऑक्सीजन मुहैया कराने समेत सभी चीजें पारदर्शी रखने का हमारा प्रयास है- राघव चड्ढा

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आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं विधायक राघव चड्ढा ने दिल्ली को मांग के मुकाबले मिल रही ऑक्सीजन के प्रबंधन के संबंध में आज डिजिटल प्रेस काॅन्फ्रेंस कर विस्तार से जानकारी दी। राघव चड्ढा ने कहा कि जैसा कि आप जानते हैं कि सभी दिल्ली वाले दिल्ली सरकार के साथ मिल कर दिल्ली में ऑक्सीजन कमी की एक लड़ाई लड़ रहे हैं और हर संभव प्रयास कर रहे हैं कि पर्याप्त मात्रा में दिल्ली में ऑक्सीजन हर अस्पताल को मिले और सारे मरीज बहुत जल्द ठीक होकर अपने घर पहुंचे। हमारा मानना है कि ऑक्सीजन आपूर्ति का सही आंकड़ा पूरी पारदर्शिता के साथ दिल्ली के निवासियों के समक्ष रखना अति आवश्यक है। इसीलिए दिल्ली में कितनी ऑक्सीजन की मांग है, कितनी ऑक्सीजन हमें बीते दिन और बीते हफ्ते मिली, हमारे पास कितने एसओएस कॉल रोजाना आ रही हैं, उनसे हम कैसे बात करके वहां तक ऑक्सीजन मुहैया कराते हैं, यह केजरीवाल सरकार की ऑक्सीजन बुलेटिन के जरिए सारी चीजें पारदर्शी तरीके से आंकड़ों की मदद से आप सबके सामने रखने की हमारी एक कोशिश है।

दिल्ली को कल 976 मिट्रिक टन के मुकाबले 433 मिट्रिक टन ऑक्सीजन मिली, जो कुल मांग का मात्र 44 फीसद है- राघव चड्ढा

राघव चड्ढा ने कहा कि कल यानी 3 मई 2021 को दिल्ली में ऑक्सीजन की कुल मांग 976 मिट्रिक टन थी। इस मांग के मुकाबले हमें दिल्ली की दहलीज पर जो ऑक्सीजन लाकर दी गई, वह मात्र 433 मिट्रिक टन थी। यानि कि 3 मई को हमारी जो 976 मिट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत थी, उसके मुकाबले 433 मिट्रिक टन ही ऑक्सीजन मिली। यह ऑक्सीजन की कुल मांग की 44 फीसद ही है। इस तरह दिल्ली को कुल मांग के मुकाबले 44 फीसदी ऑक्सीजन कल नसीब हुई। इसी तरह, 7 दिनों का साप्ताहिक औसत निकाल कर देखें तो हमें 976 मिट्रिक टन ऑक्सीजन की प्रतिदिन जरूरत है, लेकिन बीते 7 दिनों में उसके मुकाबले में हमें रोजाना ऑक्सीजन जो मिली, अगर उसका औसत करें, तो हमें 393 मिट्रिक टन प्रतिदिन मिली है और एक सप्ताह में कुल मांग का औसतन 40 फीसद ऑक्सीजन ही मिली।

टीम केजरीवाल अस्पतालों पर 24 घंटे नजर बनाए हुए है कि कितने घंटे की ऑक्सीजन बची है, अस्पताल रेड जोन में आ गया है या अभी सेफ जोन में है- राघव चड्ढा

श्री चड्ढा ने कहा कि जब ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाती है, तो अस्पतालों में ऑक्सीजन खत्म होने की कगार पर आ जाती है। उस स्थिति में हम लोग एक अच्छा प्रबंधन करके ऑक्सीजन की जो कमी है, उसको पूरा करने की कोशिश करते हैं। टीम केजरीवाल दिन-रात मेहनत करती है। हमारे सारे ऑफिसर, सारे लोग 24 घंटे हॉस्पिटल्स को ट्रैक करते हैं कि किस हॉस्पिटल में कितनी ऑक्सीजन बची है? क्या वह रेड जोन में आ गया या अभी सेफ जोन में है? कितने घंटे की ऑक्सीजन बची है? जैसे ही ऑक्सीजन कम होने की कगार पर होती है और जिस कंपनी को उन्हें ऑक्सीजन पहुंचानी थी, वह किसी समस्या के चलते नहीं पहुंचा पा रहा है, तो फिर टीम केजरीवाल वहां पर ऑक्सीजन मुहैया कराती है। ऑक्सीजन मुहैया कराने के लिए हमने कुछ अपने एसओएस रिजर्व बनाए हैं। जहां से हम इन अस्पतालों में जब ऑक्सीजन खत्म होने की कगार पर होती है, वहां ऑक्सीजन पहुंचाते हैं। लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन यानी कि टैंकर के जरिए भी ऑक्सीजन पहुंचाई जाती है। छोटे अस्पताल, जो 20, 30, 40 या 50 बेड के अस्पताल हैं और जो सिलेंडर पर चलते हैं। उनको हम बड़ा वाला सिलेंडर पहुंचाते हैं, ताकि अस्पताल में जो यह आपातकाल स्थिति बनी हुई है, वह आराम से उस आपात परिस्थिति का मुकाबला कर सकें और फिर उनकी आपूर्ति नियमित हो जाए, यह हमारी कोशिश रहती है।

कल दिल्ली के 41 अस्पतालों से एसओएस काॅल आए और हमने इनमें 21.3 मिट्रिक टन ऑक्सीजन पहुंचा कर 7142 मरीजों की जान बचाई- राघव चड्ढा

राघव चड्ढा ने कहा कि कल हमें कुल मिलाकर 41 एसओएस काॅल आईं। यह एसओएस काॅल हमें सोशल मीडिया, फोन काॅल्स और हेल्पलाइन आदि माध्यम से 41 हॉस्पिटल से आए। हमने सभी एसओएस काॅल को लिया और वहां पर हम लोगों ने कुछ न कुछ कर ऑक्सीजन पहुंचाई। चाहे क्रायोजनिक टैंकर के जरिए लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन भेजा, चाहे सिलेंडर पहुंचाया या स्थानीय प्रशासन ने ऑक्सीजन का प्रबंध करके पहुंचाया। इन 41 अस्पतालों में कुल मिलाकर कुल ऑक्सीजन के बेड यानि कि कितने मरीज वहां पर थे, जहां पर ऑक्सीजन खत्म हो जाती, तो उनकी जान पर खतरा बन जाता। इन 41 अस्पतालों में कुल ऑक्सीजन युक्त 7142 बेड थे। हमने कुल एसओएस आपूर्ति के जरिए 21.3 मिट्रिक टन ऑक्सीजन इन 41 अस्पतालों में पहुंचाया।

टीम केजरीवाल फैक्ट्री से लेकर अस्पताल पहुंचने तक एक-एक ट्रक पर नजर रख रही है, यह हमारे लिए एक बड़ी भावनात्मक चुनौती भी है- राघव चड्ढा

उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि हम अच्छे प्रबंधन से जो यह एसओएस की परिस्थिति है, इससे निपटें, इस किल्लत को दूर करें और जो जरूरत से कम ऑक्सीजन दिल्ली को मिल रहा है, उस परिस्थिति में भी हर अस्पताल अपने मरीज का ठीक से इलाज कर सकें। कहीं पर भी कमी न हो। ऐसा न हो कि ऐसी परिस्थिति न आए कि कहीं ऑक्सीजन समाप्त हो गई, हम इस जद्दोजहद में लगे हैं। मैं दिल्ली निवासियों को विश्वास दिलाना चाहूंगा कि हमारी पूरी सरकार, पूरी टीम केजरीवाल सुबह से लेकर रात तक ऑक्सीजन प्रबंधन में लगी है। हमारे मंत्री या हमारे आला अधिकारी हों, हम सब दिन जागते हैं। एक-एक ट्रक की मूवमेंट पर नजर रखते हैं कि ट्रक फैक्ट्री से निकला या नहीं निकला। फैक्ट्री से कहां तक पहुंचा, कितनी देर में अस्पताल पहुंच रहा है, क्यों नहीं पहुंचा, सिलेंडर कितने हैं, रिजर्व में कितने हैं, रिवर्ज सिलेंडर को उन तक पहुंचाना आदि कई प्रकार की गतिविधियों पर 24 घंटे नजर बनाए हुए हैं, ताकि इस परिस्थिति में हमारे एक भी दिल्ली वाले की जान न जाए और हम सब के लिए यह एक बड़ी भावनात्मक चुनौती भी है।

मुझे विश्वास है कि बहुत जल्द यह अंतर कम होगा और हमारी एसओएस काॅल और ऑक्सीजन की किल्लत भी कम होगी-राघव चड्ढा

श्री चड्ढा ने कहा कि बहुत ही चुनौतीपूर्ण समय से हम सब गुजर रहे हैं और ईश्वर करे कि आप और हम सुरक्षित रहें, दिल्ली पूरी सुरक्षित रहे और ईश्वर करें कि बहुत जल्द दिल्ली को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिले। जहां पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिलनी जरूरी है, वही आप तक ऑक्सीजन की हर जानकारी पूरी पारदर्शी तरीके से पहुंचने भी जरूरी है। इसलिए इस ऑक्सीजन बुलेटिन के जरिए हमने कोशिश की कि आपको आंकड़े बताए जाएं कि कितनी हमारी ऑक्सीजन की कुल जरूरत है। क्योंकि दिल्ली में आईसीयू और नाॅन आईसीयू मिलाकर कुल 21 हजार बेड इस समय हैं। इसके अलावा और कई हजार बेड पाइप लाइन में हैं, जो केजरीवाल सरकार बनाने जा रही है। इस तरह दिल्ली की कुल जरूरत 976 मिट्रिक टन ऑक्सीजन की प्रतिदिन है और 3 मई 2021 को मात्र 433 मिट्रिक टन ऑक्सीजन मिला, जो कुल मांग का 44 फीसद है। यानी कि दिल्ली में ऑक्सीजन की मांग और आपूर्ति में 56 फीसद का एक बहुत बड़ा अंतर अभी भी बरकरार है। मुझे विश्वास है कि बहुत जल्द यह अंतर कम होगा और जिस तेजी से यह अंतर कम होगा, उतनी तेजी से हमारी एसओएस कॉल और ऑक्सीजन की कमी भी कम होगी।

टीम केजरीवाल ने एक मां की गुहार पर दूसरे अस्पताल में ऑक्सीजन लेकर जा रहे ट्रक को रोका और उसके अस्पताल में पहुंचा कर उनके बेटे व अन्य मरीजों की जान बचाई- राघव चड्ढा

राघव चड्ढा ने कल की एक घटना का उदाहरण देते हुए बताया कि कल कई छोटे अस्पतालों से हमारे पास एसओएस कॉल आई। इनमें आइरिन अस्पताल, कुकरेजा हॉस्पिटल, रेनबो अस्पताल आदि हैं, जिनके एसएओएस काॅल का जवाब दिया गया। इनमें कुछ काल एकदम से दिल को छू जाने वाले होते हैं। जैसे कि एक महिला का मुझे फोन आया है। उस महिला का 10-11 साल का बेटा एक अस्पताल में भर्ती है और वह ऑक्सीजन पर है। उसे हाई फ्लो ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही थी। वह कोविड-19 मरीज हैं और उनकी मां का रोते हुए फोन पर बताया कि उनके अस्पताल में ऑक्सीजन खत्म होने वाली है। उस मां का कहना था कि कुछ भी कर के अस्पताल में ऑक्सीजन पहुंचाइए। उनके हॉस्पिटल में मात्र डेढ़ से दो घंटे की ऑक्सीजन रह गई। हमारा एक ट्रक लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन लेकर आ रहा था, जो किसी और अस्पताल में जा रहा था। जिस अस्पताल में वह ट्रक ऑक्सीजन पहुंचाने जा रहा था, उस अस्पताल में पहले से ही पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन था और वहां पर आपातकालीन परिस्थितियां नहीं थी। हमने जल्दी से उस ट्रक को उस अस्पताल में मोड़ा, जहां पर जिस मां ने हमें फोन करके बताया कि उनका बेटा बहुत नाजुक दौर से गुजर रहा है। वहां पर ऑक्सीजन आपूर्ति की कमी हो सकती है। वहां रेड जोन में ऑक्सीजन की आपूर्ति पहुंच चुकी थी। हमने जल्दी से उस ट्रक को मोड़ा और तुरंत उस अस्पताल में ऑक्सीजन पहुंचाया। वहां पर ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई। जिसके बाद उस मां को राहत मिली और उस अस्पताल में कई और लोगों की भी जाने बचीं।

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