दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल ने ईमानदारी की मिसाल पेश करते हुये लौटाया रुपयों भरा बैग

नई दिल्ली(शमशाद रज़ा अंसारी)
इस जमाने में ईमानादारी की मिसाल बहुत ही कम देखने को मिलती है। ऐसा कम ही देखने को मिलता है, जब किसी का रुपयों या आभूषण से भरा बैग उसको वापस मिल जाता है। ईमानदारी दिखाते हुये किसी की खोई चीज़ उसे लौटा देने वाला शख़्स लाखों में एक होता है। दिल्ली पुलिस के एक कांस्टेबल ने जो किया, उसे जानकर आप भी उसे सैल्यूट करेंगे। असल में एक मज​दूर का एक लाख रुपए से भरा बैग शिवाजी ब्रिज रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर छूट गया था। जब वहां ड्यूटी कर रहे कांस्टेबल नरेंद्र कुमार को यह बैग मिला तो उसने न सिर्फ उसे सुरक्षित रखा, बल्कि मजदूर तक वापस भी पहुंचाया।
दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने भी सिपाही की इस ईमानदारी की तारीफ़ की है।
मिली जानकारी के अनुसार यूपी के खुर्जा के रहने वाले विजय कुमार दिल्ली में मजदूरी करते हैं। वह उत्तरी दिल्ली के शकूर बस्ती में रहते हैं। वह अपने घर के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं। जिस दिन घटना हुई उस दिन विजय को अपने खुर्जा स्थित घर जाना था। उत्तर-पश्चिम दिल्ली के शकूर बस्ती में रहने वाले विजय कुमार ने 30 जून को अपने बैंक खाते से एक लाख रुपये निकाले थे। करीब 55 किलो राशन खरीदने के बाद उत्तर प्रदेश के खुर्जा स्थित अपने गृह नगर जाने के लिए शिवाजी ब्रिज रेलवे स्टेशन पहुँचे। यहां अनाज लेकर तो बरेली-नई दिल्ली इंटरसिटी एक्सप्रेस में बैठ गए, लेकिन अपना बैग और कुछ अन्य सामान प्लेटफॉर्म पर ही भूल गए। इस दौरान पुलिस कॉन्स्टेबल नरेन्द्र कुमार शिवाजी ब्रिज स्टेशन पर ड्यूटी पर था और ट्रेन के जाने के बाद गश्त लगा रहा था। उसने वहां बेंच पर एक बैग को लावारिस हालत में पड़ा देखा। नरेन्द्र ने प्लेटफॉर्म पर मौजूद कुछ यात्रियों से बैग के बारे में पूछा, लेकिन उसके मालिक के बारे में पता नहीं चला। नरेन्द्र ने कहा कि मैंने बैग को अपने पास ही रखने का फैसला किया। बैग की तलाशी लेने पर मैंने देखा कि उसमें नकदी के दो बंडल करीब एक लाख रुपये हैं। इसके अलावा उसमें कुछ रोटियां, पानी की बोतल, एक चेकबुक, बैंक की पासबुक, एक आधार कार्ड और राशन कार्ड था। मैंने फौरन इसकी जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दी। हमने विजय कुमार से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन जब संपर्क नहीं हो सका तो हमने इंतजार करने का फैसला किया।
इसके कुछ घंटे के बाद शाम के साढ़े छह बजे विजय शिवाजी ब्रिज रेलवे स्टेशन लौटा और उसने अपने बैग के बारे में पूछताछ की। पुलिस ने कुछ औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बैग और एक लाख रुपये विजय को लौटा दिए।
पुलिस उपायुक्त (रेलवे) हरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि विजय कुमार स्टेशन पर ही अपना बैग भूल गया था। हमारे सिपाही नरेन्द्र ने बैग को सुरक्षित रखा और एक लाख रुपये समेत बैग विजय को लौटा दिया।
विजय ने उस दिन की घटना के बारे में बताते हुये कहा कि वो प्लेटफॉर्म पर एक बेंच पर बैठे हुआ ट्रेन का इंतजार कर रहा था। ट्रेन के पहुंचने पर उसने जल्दबाजी में राशन के दो बैग ट्रेन में रखे और बेंच पर अपना थैला छोड़कर ट्रेन में जा बैठा। उसने कहा, ‘आनंद विहार स्टेशन पर प्यास लगने पर जब मैं पानी पीने के लिए उतरा तब मुझे एहसास हुआ कि मैं अपना थैला जिसमें एक लाख रुपये थे कहीं भूल गया हूँ। यह रुपये मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। मैं अपने बच्चों के लिए छोटा सा घर बनाने के लिए इन रुपयों को लंबे समय से जमा कर रहा था।’
विजय ने कहा कि मैं गरीब आदमी हूँ और मेरे लिए एक लाख रुपये बहुत बड़ी रकम है। मैं अपनी सारी उम्मीदें खो चुका था, लेकिन सिपाही नरेन्द्र मेरे लिए मसीहा बनकर आए।
दिल्ली पुलिस कमिश्नर बालाजी श्रीवास्तव ने डीसीपी दिल्ली रेलवे द्वारा किये गये नरेंद्र के ट्वीट को शेयर करते हुये लिखा है कि मैं अपनी टीम से यही उम्मीद करता हूँ, बीट ऑफिसर नरेंद्र मुझे आप पर गर्व है।

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