मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निर्देश पर दिल्ली में ऑक्सीजन रिजर्व बनाए जा रहे हैं, इनसे आपातकालीन हालात में अस्पतालों को ऑक्सीजन आपूर्ति की जाएगी: राघव चड्ढा

  • जब किसी अस्पताल तक ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं पहुंच पाएगी तो दिल्ली सरकार रिजर्व स्टॉक से ऑक्सीजन पहुंचाएगी, दिल्ली में कई जगहों पर ऑक्सीजन रिस्पांस पॉइंट बनाए जाएंगे- राघव चड्ढा
  • दिल्ली को ऑक्सीजन की कुल जरूरत 976 मीट्रिक टन की है जबकि 6 मई को सिर्फ 577 मीट्रिक टन ऑक्सीजन ही मिली है, केंद्र सरकार से दिल्ली को कुल मांग की 59 फीसदी ऑक्सीजन ही मिली है- राघव चड्ढा
  • हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद 5 मई को केंद्र सरकार ने 730 मीट्रिक टन ऑक्सीजन दी लेकिन अगले ही दिन 153 मीट्रिक टन ऑक्सीजन कम दी- राघव चड्ढा
  • केंद्र सरकार से मांग है कि 5 मई की तरह रोजाना 730 टन से अधिक ऑक्सीजन उपलब्ध कराएं, ऑक्सीजन में गिरावट का असर दिल्ली के अस्पतालों पर पड़ सकता है- राघव चड्ढा
  • ऑक्सीजन आपूर्ति में नियमितता और निश्चितता होनी चाहिए, अगर निर्धारित ऑक्सीजन प्लांटों से नियमित आपूर्ति नहीं की जाएगी तो समस्या हल नहीं हो पाएगी- राघव चड्ढा
  • केजरीवाल सरकार वर्तमान में मौजूद 21 हजार बेडों की संख्या को और बढ़ाना चाहती है, इसके लिए अधिक ऑक्सीजन चाहिए, केजरीवाल सरकार ने बेडों की संख्या बढ़ाने की पूरी योजना बना रखी है, बस अधिक ऑक्सीजन मिलने का इंतजार है- राघव चड्ढा

नई दिल्ली, 07 मई, 2021
आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता और विधायक राघव चड्ढा ने 06 मई का ऑक्सीजन बुलेटिन जारी करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निर्देश पर दिल्ली में ऑक्सीजन रिजर्व बनाए जा रहे हैं। इनसे आपातकालीन हालात में अस्पतालों को ऑक्सीजन आपूर्ति की जाएगी। जब किसी अस्पताल तक ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं पहुंच पाएगी तो दिल्ली सरकार रिजर्व स्टॉक से ऑक्सीजन पहुंचाएगी। दिल्ली में कई जगहों पर ऑक्सीजन रिस्पांस पॉइंट बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली को ऑक्सीजन की कुल जरूरत 976 मीट्रिक टन की है जबकि 6 मई को सिर्फ 577 मीट्रिक टन ऑक्सीजन ही मिली है। केंद्र सरकार से दिल्ली को कुल मांग की 59 प्रतिशत ऑक्सीजन ही मिली है। हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद 5 मई को केंद्र सरकार ने 730 मीट्रिक टन ऑक्सीजन दी लेकिन अगले ही दिन 153 मीट्रिक टन ऑक्सीजन कम दी है। केंद्र सरकार से मांग है कि 5 मई की तरह रोजाना 730 टन से अधिक ऑक्सीजन उपलब्ध कराएं। ऑक्सीजन में गिरावट का असर दिल्ली के अस्पतालों पर पड़ सकता है। ऑक्सीजन आपूर्ति में नियमितता और निश्चितता होनी चाहिए। अगर निर्धारित ऑक्सीजन प्लांटों से नियमित आपूर्ति नहीं की जाएगी तो समस्या हल नहीं हो पाएगी। केजरीवाल सरकार वर्तमान में मौजूद 21 हजार बेडों की संख्या को और बढ़ाना चाहती है। इसके लिए अधिक ऑक्सीजन चाहिए। केजरीवाल सरकार ने बेडों की संख्या बढ़ाने की पूरी योजना बना रखी है, बस अधिक ऑक्सीजन का इंतजार है।
आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता और विधायक राघव चड्ढा ने शुक्रवार को छह मई का ऑक्सीजन बुलेटिन जारी किया। राघव चड्ढा ने कहा कि दिल्ली में ऑक्सीजन की कुल जरूरत 976 मीट्रिक टन की है, उसके मुकाबले 6 मई को 577 मीट्रिक टन ऑक्सीजन ही मिली है। केंद्र सरकार से दिल्ली को कुल मांग की 59 प्रतिशत ऑक्सीजन ही मिली है। जबकि 2 दिन पहले 5 मई को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद केंद्र सरकार ने 730 मीट्रिक टन ऑक्सीजन दी। अगले ही दिन यह आंकड़ा घटकर 730 से 577 मीट्रिक टन पर आ गया है। दिल्ली को की गई ऑक्सीजन की आपूर्ति में 153 मीट्रिक टन की गिरावट आयी है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को लगातार कहा है कि 1 दिन 700 मीट्रिक टन से अधिक ऑक्सीजन दे देने से आपकी जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती है। ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति रोजाना की जानी चाहिए। ऐसा नहीं हो सकता कि मरीज को एक दिन पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन दे दें लेकिन अगले दिन कम ऑक्सीजन दे दें। हमारी ऑक्सीजन की मांग एक दिन की मांग नहीं, बल्कि रोजाना की मांग है। इस मांग पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की भी मुहर लग चुकी है। केंद्र सरकार से निवेदन है कि जिस तरह से 5 मई को 730 मीट्रिक टन ऑक्सीजन उपलब्ध कराई थी वैसे ही आने वाले समय में हमें 730 टन से अधिक ऑक्सीजन नियमित उपलब्ध कराएं। ऑक्सीजन में कल जो गिरावट देखी गई है उसका प्रभाव कहीं ना कहीं दिल्ली के अस्पतालों पर पड़ सकता है। केजरीवाल सरकार हर संभव प्रयास करेगी कि उसका कोई भी नकारात्मक प्रभाव दिल्ली के अस्पतालों पर ना पड़े। हम कम ऑक्सीजन आपूर्ति के बावजूद बेहतर प्रबंधन के जरिए अस्पतालों की मांग को पूरा करने की हर संभव कोशिश करेंगे। हम मांग करना चाहते हैं कि केंद्र सरकार 700 मीट्रिक टन से अधिक ऑक्सीजन की आपूर्ति की प्रतिबद्धता को पूरा करे। रोजाना 730 मीट्रिक टन से अधिक ऑक्सीजन दिल्ली को दी जाए, सिर्फ एक दिन के लिए अतिरिक्त इंतजाम करके ना रह जाएं।
राघव चड्ढा ने कहा कि ऑक्सीजन आपूर्ति एक ऐसी चीज है जिसमें नियमितता और निश्चितता होनी चाहिए। अगर नियमित तौर पर निर्धारित ऑक्सीजन प्लांटों से निरंतर आपूर्ति नहीं की जाएगी तो समस्या हल नहीं हो पाएगी। न्यायालय में हमारी यही मांग थी कि नियमित पर्याप्त ऑक्सीजन आपूर्ति होनी चाहिए। दिल्ली को रोजाना अन्य राज्यों की तरह पूरी ऑक्सीजन मिलनी चाहिए। क्योंकि यह दिल्ली की जरूरत है। केंद्र सरकार से अनुरोध है कि दिल्ली की जरूरत को पूरा करें। इसके अलावा दिल्ली में ऑक्सीजन बेड के हिसाब से 930 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत होती है। जिसकी मांग हम लगातार कर रहे हैं। हमारी मांग के बराबर ऑक्सीजन मिल जाए तो दिल्ली के अंदर सभी ऑक्सीजन बेड ठीक से चल पाएंगे और मरीज जल्दी ठीक हो जाएंगे। अगर दिल्ली में इन बेडों की संख्या को बढ़ाना है तो अधिक ऑक्सीजन की जरूरत पड़ेगी। जैसे वर्तमान में दिल्ली में आईसीयू और नॉन आईसीयू बेड 21000 हैं। केजरीवाल सरकार को यदि 21 हजार बेड के आंकड़े को बढ़ाकर 40 हजार बेड पर ले जाना है तो अधिक ऑक्सीजन चाहिए। कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में बेड का मतलब सिर्फ खाली गद्दा लगाकर दवाई देना नहीं है। इसमें बेड का मतलब ऑक्सीजन बेड़ से होता है। यानी कि ऑक्सीजन के साथ बेड की व्यवस्था चाहिए, ताकि मरीज को ऑक्सीजन लगाकर जल्द से जल्द ठीक कर सकें। ऑक्सीजन आपूर्ति दिल्ली में जैसे-जैसे बढ़ेगी उतनी ही गति से केजरीवाल सरकार बेड़ बढ़ाएगी। केजरीवाल सरकार ने बेडों की संख्या बढ़ाने की पूरी योजना बना रखी है।
राघव ने कहा कि तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण बिंदु दिल्ली के अंदर एसओएस कॉल पिछले कई दिनों से आ रहीं थी। अस्पताल फोन करते हैं कि हमारे यहां ऑक्सीजन 1 घंटे की बची है। ऐसी आपातकालीन परिस्थितियों से जूझने के लिए हम लोग बेहतर ऑक्सीजन प्रबंधन कर रहे थे। अब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी के निर्देश पर ऑक्सीजन रिजर्व बना रहे हैं। ऑक्सीजन रिजर्व अच्छी खासी संख्या में बनाए जाएंगे। दिल्ली के सभी हिस्सों में स्टॉक बनाए जाएंगे। यह स्टॉक आपातकालीन परिस्थितियों में ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए काम आएंगे। जब किसी अस्पताल तक आपूर्ति नहीं पहुंच पाएगी तो दिल्ली सरकार ऑक्सीजन रिजर्व से आपूर्ति करेगी, ताकि ऑक्सीजन की कमी किसी अस्पताल में ना हो।
उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कोई 300 बेड का बड़ा अस्पताल है। उसको शाम 5 बजे ऑक्सीजन की आपूर्ति मिलनी थी। लेकिन उस कंपनी का टैंकर रास्ते में किसी कारण खराब हो गया और अस्पताल नहीं पहुंच पाया। जब वह टैंकर अस्पताल नहीं पहुंच पाया तो ऑक्सीजन भी नहीं पहुंच पाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हो सकता कि ऑक्सीजन के अभाव में मरीजों के स्वास्थ्य पर असर पड़ने दिया जाए। ऐसी आपातकालीन परिस्थितियों को दूर करने के लिए केजरीवाल सरकार ने फैसला किया है कि एसओएस ऑक्सीजन रिजर्व बनाए जाएंगे।
राघव चड्ढा ने कहा कि हमें कल 9 अस्पतालों से एसओएस कॉल आयीं जिसके बाद 5.80 मीट्रिक टन ऑक्सीजन पहुंचायी गई। इन अस्पतालो में 909 ऑक्सीजन बेड़ थे। दिल्ली में सिर्फ एक दिन पर्याप्त ऑक्सीजन आपूर्ति से एसओएस कॉल में गिरावट देखी गई है। लेकिन कल पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन आपूर्ति नहीं मिल पायी। केंद्र सरकार से निवेदन है कि पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन दें। कल भेजी गई 570 मीट्रिक टन ऑक्सीजन पर्याप्त नहीं है, उससे दिल्ली की गाड़ी नहीं चल सकती है।

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