सऊदी अरब अब भारत को देगा महंगा तेल,जानिए क्या है वजह

उम्मीद की जा रही है कि कोरोना से उबर कर जल्द ही विश्व में कारोबार पटरी पर लौटने वाला है। कारोबार पटरी पर लौटने के कारण अचानक तेल की माँग में इज़ाफ़ा हो जायेगा। इसको देखते हुये सऊदी अरब ने भारत समेत एशिया के अपने कई ग्राहक देशों के लिए तेल की कीमतों में इजाफा कर दिया है। कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने और इस साल की सप्लाई में इजाफा होने की ओपेक की भविष्यवाणी के बाद सऊदी अरब ने यह फैसला लिया है। सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको ने एशिया के अपने ग्राहकों के लिए जुलाई की शिपमेंट की कीमतों में 10 सेंट से लेकर 1.90 डॉलर तक का इजाफा किया है। सऊदी अरब की ओर से कीमतों में की गई यह बढ़ोतरी उम्मीद से ज्यादा है। इससे पहले ब्लूमबर्ग के सर्वे में यह इजाफा सिर्फ 10 सेंट तक ही रहने का अनुमान जताया गया था।सऊदी अरब अपनी कुल तेल सप्लाई का 60 फीसदी हिस्सा एशियाई देशों को ही निर्यात करता है। एशिया में भी चीन, भारत, दक्षिण कोरिया और जापान ही उसके बड़े ग्राहक हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले महीने सऊदी अरब ने हर दिन 6.1 मिलियन बैरल कच्चे तेल की प्रतिदिन सप्लाई की थी। इससे पहले सऊदी अरब ने जून की सप्लाई के लिए दामों में कटौती की थी। इसकी वजह यह भी थी कि भारत में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के चलते पाबंदियां बढ़ गई थीं और तेल की डिमांड में कमी देखने को मिली थी। भारत समेत जापान और मलेशिया जैसे एशियाई देश अब भी कोरोना संकट से निपटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस बीच तेल निर्यातक देशों के समूह ओपेक ने अनुमान जताया है कि अगस्त तक उसके पास जमा तेल का स्टॉक कम होने लगेगा। इसकी वजह यह है कि दुनिया भर में कारोबार पटरी पर लौट सकता है। इस बीच सऊदी अरब और रूस की लीडरशिप वाले 23 देशों के समूह का कहना है कि उनकी ओर से जून और जुलाई में सप्लाई बढ़ाई जा सकती है। सऊदी अरब के एनर्जी मिनिस्टर प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने गुरुवार को रूस में एक फोरम में कहा कि ग्लोबल डिमांड को पूरा करने के लिए हमेशा बेहतर सप्लाई रहेगी।

पहले भी चला था तेल का खेल

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फ़रवरी में भारत ने सऊदी अरब से तेल का उत्पादन बढ़ाने के लिए कहा था ताकि तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कम हो सके। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुल अजीज से भारत के अनुरोध के बारे में पूछा गया था तो उन्होंने कह दिया था कि भारत ने पिछले साल सस्ते में जो तेल खरीदा था, उस तेल को पहले खर्च करे। सऊदी का यह बयान भारत के लिए झटका था। भारत ने ईरान से तेल आयात बंद कर सऊदी से बढ़ा दिया था। ऐसे में, भारत को उम्मीद थी कि सऊदी बड़े खरीदार के तौर पर भारत को कुछ रियायत जरूर देगा।

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