साम्प्रदायिक सद्भाव की मिसाल बनी रामनगरी, हिन्दू बहुल गाँव में मुस्लिम बना प्रधान

अयोध्या
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के नतीजे आए हुये काफ़ी दिन हो चुके हैं। लेकिन फिर भी अभी तक हर दिन पंचायत चुनाव से जुड़ी कोई न कोई खास खबर सामने आ ही जाती है। इस बार के पंचायत चुनाव कई मायनों में खास रहे। कई दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा तो कई ऐसे लोगों ने जीत दर्ज जिनकी किसी को उम्मीद नहीं थी। ऐसा ही एक मामला फैजाबाद जिले के राजापुर गांव से सामने आया है। जहाँ पर हिन्दू बहुल इलाके में पंचायत चुनाव जीत कर एक मुस्लिम प्रधान बना है। इससे भी अधिक ख़ास बात यह है कि मामला रामनगरी से जुड़ा है। आज के इस दौर में जब धर्म को लेकर लोगों में दूरी बनती जा रही है,ऐसे समय में राजापुर गाँव के लोगों ने मुस्लिम को जिता कर मिसाल पेश की है। ऐसे गांव में जहां हिन्दुओं की आबादी भारी मात्रा में है, उसने एक मुस्लिम व्यक्ति को अपना ग्राम प्रधान चुना। इस गांव की चर्चा इस वक्त हर व्यक्ति की जुबां पर है।
ग्राम पंचायत राजापुर में प्रधान पद के लिए आठ प्रत्याशियों ने चुनाव मैदान में ताल ठोंकी। उनमें से एक मात्र मुस्लिम हाफिज अजीमुद्दीन खां चुनाव लड़ रहे थे। सभी प्रत्याशी अपनी जीत का दावा कर रहे थे, किन्तु गांव की जनता ने किसी प्रलोभन या जातपात के हथकण्डे को नकारते हुए प्रत्याशी का व्यवहार, कर्मठता तथा ईमानदारी को पैमाना मानते हुए अजीमुद्दीन खां को अपने ग्राम पंचायत का प्रधान चुनकर गांव में साम्प्रदायिक सौहार्द की एक अनोखी मिसाल कायम की। जिसकी पूरे इलाके में चर्चा हो रही है।
जानकारी के मुताबिक राजापुर में 600 मतदाता हैं। इनमें से कुल 27 ही मुस्लिम वोटर्स हैं। यह सभी 27 लोग हाफिज के ही परिवार से ताल्लुक रखते हैं। ऐसे में 200 वोटों से जीतना हाफिज के लिए गर्व की बात है। उनका कहना है कि प्रधान बनना उनके लिए ईदी जैसा है। हाफिज कहते हैं कि अब लोगों की उम्मीद पूरा करना अब उनका फर्ज है। बताया जा रहा है कि हाफिज अजीमुद्दीन पेशे से किसान हैं। उन्होंने मदरसे से आलिम और हाफिज की डिग्री ली है। इसके अलावा, वह 10 साल तक एक मदरसे में शिक्षक भी रहे हैं। अब वह परिवार के साथ गांव में ही खेती करते हैं।
अजीमुद्दीन ने मीडिया को बताया कि गांव के लोगों का विश्वास देखकर उनकी आंखें भर आई हैं। वह इस विश्वास के लिए रामपुर के लोगों के आभारी हैं।
वहीं गांववालों का कहना है कि इस बार धर्म पर नहीं, बल्कि प्रत्याशी के हुनर को देखकर वोट डाला गया है। मुस्लिम प्रधान चुनकर ग्रामीणों ने यह संदेश दिया है कि सभी धर्मों का समान रूप से सम्मान करना चाहिए।

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