रिपोर्ट-शमशाद रज़ा अंसारी

बेटी बचाओं,बेटी पढ़ाएं एवं महिला सशक्तिकरण का नारा देने वाली भाजपा का महिलाओं के प्रति ही दोहरा व्यवहार देखने को मिल रहा है। एक तरफ सरकार जहाँ सरकार का समर्थन करने पर कंगना को वाई श्रेणी का सुरक्षा घेरा उपलब्ध करा रही है तो वहीँ दूसरी और सरकार के चहेते शिक्षा माफियाओं के विरुद्ध आवाज़ उठाने वाले व्यक्ति की पत्नी पर मुकदमा दर्ज़ करके एक महिला को प्रताड़ित किया जा रहा है। इससे पता चलता है कि सरकार महिलाओं के प्रति गम्भीर नही है बल्कि अपने हितैषियों के हितों के प्रति गम्भीर है।
अभिभावकों एवं स्कूलों की लड़ाई अब अभिभावक बनाम पुलिस की लड़ाई बनती जा रही है। व्यापारियों की सरकार कही जाने वाली भाजपा सरकार ने अप्रत्यक्ष रूप से शिक्षा व्यापारियों का साथ देते हुये अभिभावकों की उठती आवाज़ को दबाने के लिए मुकदमों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। ग़ाज़ियाबाद पैरेंट्स एसोसिएशन द्वारा फीस माफ़ी को लेकर की गयी भूख हड़ताल शातिराना तरीके से समाप्त करने के बाद पुलिस ने अभिभावकों की कमर तोड़ने के लिए जीपीए सचिव एवं उनकी पत्नी पर संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज़ कर दिया है।
जीपीए के सचिव अनिल सिंह पर शास्त्रीनगर चौकी इंचार्ज हरेंद्र पाल सिंह जादौन द्वारा सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई गई है। उनकी पत्नी पर झूठे आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कराया गया है। जबकि जीपीए के मीडिया प्रभारी विवेक त्यागी का कहना है कि पुलिस द्वारा शाम को लगभग साढ़े आठ बजे अनिल सिंह के घर पर दबिश दी गई। उस समय उनके घर में अनिल सिंह की पत्नी और एवं नाबालिग बेटा उपस्थित था। उसके बाद पुलिस द्वारा पुलिसिया भाषा का प्रयोग करते हुए जबरन लाइसेंसी पिस्टल, पिस्टल का लाइसेंस और पत्नी का मोबाइल ले लिया गया। इसमें सबसे बड़ी बात कि देर शाम बिना महिला पुलिस के घर जब अकेली महिला थी तब पुलिस घर के अंदर क्यों घुसी। वहीं अनिल सिंह की पत्नी का कहना है कि मैंने 112 न0 पर कॉल किया, जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, साथ ही पुलिस ने जब मेरा मोबाइल वापस किया तो उसमें सारे वीडियो एवं फ़ोटो नही थे, जो पुलिस के खिलाफ सबूत थे। मेरे ऊपर अपने बचाव के लिए झूठा आरोप लगाकर संगीन धारा 388 के तहत मुकदमा किया दर्ज किया गया है। जहाँ एक तरफ भाजपा सरकार महिला सुरक्षा,बेटी पढ़ाओ – बेटी बचाओ और महिला सशक्तिकरण पर जोर दे रही है, वहीं अपने अधिकार की आवाज़ उठाने वाले व्यक्ति के घर में महिला पुलिस के बिना घुस कर उसकी पत्नी पर झूठा मुकदमा दर्ज़ करना सरकार के झूठे दावों की पोल खोल कर रहा है।
ज्ञात हो कि 11 सितंबर को  शास्त्रीनगर ई ब्लाक स्तिथ  नेहरू वर्ल्ड स्कूल में अभिभावकों का शांतिपूर्ण सांकेतिक “ज्योति जलाओ,स्कूल जगाओ” का प्रयास था जो केवल स्कूल के गेट पर मोमबत्ती लगाना था। लेकिन वहां पहले से ही पुलिस मौजूद थी। जब अभिभावक वहां कैंडल जलाने पहुँचें तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की गयी। अभिभावकों द्वारा शास्त्रीनगर चौकी इंचार्ज को समझाने की भरपूर कोशिश की गई कि यह केंडल मार्च पूर्णतया शांतिपूर्ण है,सोशल डिस्टेंसिनग का पालन होगा और एक एक मोमबत्ती लगा सब घर चले जायेंगे। लेकिन उन्होनें एक न सुनी और अभिभावको की मोमबत्ती छीन उकसाने लगे। अभिभावकों ने महिलाओं के साथ अभद्रता करने के भी आरोप लगाये हैं। कैंडल जलाने के बाद जब सभी अभिभावक घर वापस चले गये तो उसके बाद चौकी इंचार्ज अनिल सिंह के घर पँहुच गये। जहाँ उनकी पत्नी एवं नाबालिग बच्चा मौज़ूद थे। बिना महिला सिपाही के अनिल सिंह के घर से पुलिस लाइसेंसी पिस्टल,पिस्टल का लाइसेंस एवं अनिल सिंह की पत्नी का मोबाइल ले आई।
वहीं पुलिस का कहना है कि नेहरू वर्ल्ड स्कूल पर पुलिस अपना ड्यूटी कर रही थी। जहाँ पर अभिभावकों के इकट्ठा होने पर जब चौकी प्रभारी ने अनिल सिंह से उनका तथा उनके पिताजी का नाम पूछा तो उनको बुरा लग गया एवं वह चौकी प्रभारी से दुर्व्यवहार करने लगे तथा अभिभावकों के साथ वहां से चले गए। जब पुलिस अनिल सिंह को ढूंढते हुए उनके आवास पर पहुँची तो वहां उनकी पत्नी ने भी पुलिस से दुर्व्यवहार किया।

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