15 दिसंबर को दिल्ली में आयोजित होगा एशिया का पहला ट्रांसजेंडर कॉन्क्लेव

अशरफ़ हुसैनी
नई दिल्ली। वर्ल्ड वमुने ऑर्गेनाइजेशन ने ट्रांसजेडर समुदाय के लिये केंद्रीय लोक सेवा आयोग समेत कई महत्तवपूर्ण संस्थाओं में प्रतिनिधित्व की मांग की है। वर्ल्ड वमुने ऑर्गेनाइजेशन की अध्यक्ष डॉक्टर आसमां बेग़म ने आज दिल्ली स्थित वेस्टर्न कोर्ट में प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि समाज में ट्रांसजेडर कम्यूनिटी को लेकर जागरुकता की जरूरत है। उन्होंने बताया कि 15 दिसंबर को दिल्ली स्थित अंबेडकर भवन में एशिया का पहला ट्रांसजेंडर कॉन्क्लेव होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि समाज ट्रांसजेंडर समुदाय में कई तरह के भेदभाव का सामना करना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय, आम भारतीय समाज के लिये किसी वरदान से कम नहीं हैं। कोई बच्चा अगर ट्रांसजेंडर है तो वह इसी समाज के परिवारों में ही पैदा होता है, लेकिन समाज में डर, लोक-लाज के भय की वजह उसे उस बच्चे को समाज से अलग कर दिया जाता है, जिसे ट्रांसजेंडर समाज अपनाता है, उसकी परवरिश करता है।
डॉ. आसमां बेग़म ने स्पोर्टस, सिविल सर्विस समेत सभी सरकारी नौकरियों में भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि समाज ट्रांसजेंडर के लिये लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। डॉ. आसमां बेग़म ने कहा कि समाज में ट्रांसजेंडर को लेकर जागरुकता की जरूरत है, ताकि समाज इनके साथ भेद-भाव न करे, उन्हें नौकरियों समेत जीवन के सभी विभागों में समान अवसर दिये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की तमाम राजनीतिक दलों को चाहिए कि वे न सिर्फ अपने चुनावी घोषणा-पत्र बल्कि असल में इस समाज के कल्याण के लिये कार्य करे।
भारत में पीस एंड स्पोर्टस काउंसिल ऑफ अफ़ग़ानिस्तान की प्रतिनिधि डॉ. तनज़ैर वशिष्ठ ने महिला सशक्तिकरण पर ज़ोर देते हुए कहा कि समाज में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 15 दिसंबर को होने वाले ट्रांसजेंडर कॉन्कलेव में वे भी शिरकत करेंगी, और समाज जागरुक करेंगी। उन्होंने कहा कि समाज में किस भी वर्ग को सिर्फ और सिर्फ इंसान के तौर पर पहचाना जाना चाहिए. उसके साथ लैंगिक आधार पर भेद-भाव नहीं किया जाना चाहिए।
ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट और नटका अखाड़ा की महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि समाज को ट्रांसजेंडर वर्ग को लेकर समाज में जो मिथ्य है उसे समाप्त होने की जरूरत है। समाज को समझना होगा कि ट्रांसजेंडर भी इसी समाज का हिस्सा है, वह भी इंसान है, उसकी भी वही सारी जरूरत हैं जो समाज के बाक़ी वर्ग की है। इसलिये उसके साथ किसी भी तरह का भेद-भाव नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 15 दिसंबर को दिल्ली में होने वाला एशिया का पहला ट्रांसजेंडर कॉक्लेव ऐतिहासिक होगा।
इस दौरान अमरेंद्र खटवा, एसबी ज़मान, रोज़ी आहुवालिया, वली मेहदी, आर्यन पाशा (बॉडी बिल्डर) डॉक्टर अंजू हड्डा, लुबना, दीपक गुप्ता, आदि मौजूद रहे।

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