नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राघव चड्ढा ने कहा कि मोदी सरकार देश की जनता की गाढ़ी कमाई से अखबारों में अंग्रेजी में विज्ञापन देकर अपना चेहरा चमकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, ‘भाजपा बताए कि देश के 62 करोड़ किसान और कृषि क्षेत्र के मजदूरों में वे कौन से लोग हैं, जो अंग्रेजी विज्ञापन को पढ़कर मिनिमम सपोर्ट प्राइस, पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम और पब्लिक सिक्योरमेंट को समझेंगे।’ चड्ढा ने कहा कि अंग्रेजी में विज्ञापन देना, क्या गरीब, दबे, कुचले व छले किसानों का मजाक उड़ाना नहीं है, क्या उसके जख्मों पर नमक छिड़कना नहीं है? वहीं, राज्यसभा में ‘आप’ के सांसद एन.डी. गुप्ता ने कहा कि देश में 2014 से जुमले की सरकार आई है। केंद्रीय गृहमंत्री ने खुद स्वीकारा है कि वो जुमले देते हैं, एमएसपी भी एक जुमला था। अब किसान कहीं भी माल भी बेच सकेंगे, लेकिन उसमें कास्ट प्राइस और एमएसपी का कोई लेना-देना नहीं होगा, किसानों को उनके रहमो करम पर छोड़ दिया गया है। उन्होने कहा कि राज्यसभा सांसद संजय सिंह का कुर्ता फाड़ दिया गया, संसद में मार्शल ने उनका पैर पकड़ खींचा और आठ सांसदों को निलंबित कर दिया गया। यह सरकार, आर्डिनेंस सरकार हो गई है, इसे न स्टैंडिंग कमेटी, न सेलेक्ट कमेटी और न पार्लियामेंट में विपक्ष की जरूरत है।

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता राघव चड्ढा ने कहा कि आज केंद्र में बैठी मोदी सरकार ने झूठे प्रचार का एक अनोखा रिकॉर्ड इस देश में रचा है। आज आम आदमी की गाढ़ी कमाई से अपना चेहरा चमकाने का एक अनोखा रिकॉर्ड केंद्र में बैठी मोदी सरकार ने रचा है और छले गए किसान, ठगे गए किसान के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम केंद्र में बैठी मोदी सरकार ने किया है। आज देश के कई बड़े अखबारों में अंग्रेजी में विज्ञापन देकर केंद्र सरकार गरीब किसान को, मजबूर किसान को और खेतों में काम कर रहे गरीब, दबे कुचले मजदूर को अंग्रेजी में विज्ञापन देकर समझाने की कोशिश कर रही है। अंग्रेजी में न्यूनतम समर्थन मूल्य क्या होता है? उस पर समझाने की कोशिश की है और एमएसपी पीडीएस सिस्टम क्या होता है? उसे समझाने की कोशिश की है।

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राघव चड्ढा ने कहा कि मुझे यह बताइए कि देश का कौन सा किसान अंग्रेजी अखबार में छपे अंग्रेजी विज्ञापन को पढ़कर मिनिमम सपोर्ट प्राइस क्या होता है, उसे समझेगा। आज मैं भारतीय जनता पार्टी से पूछना चाहता हूं कि देश के 62 करोड़ किसान और कृषि क्षेत्र के मजदूरों में से वह कौन से लोग हैं जो सुबह अपनी कैपचीनों काॅफी के साथ इस अंग्रेजी विज्ञापन को पढ़कर मिनिमम सपोर्ट प्राइस, पब्लिक डिसट्रीब्यूशन सिस्टम और पब्लिक सिक्योरमेंट को समझेंगे। आज एक तरफ जहां केंद्र में बैठी सरकार और भारतीय जनता पार्टी शासित कई एजेंसियां इस कोरोना काल में डॉक्टर और नर्स को वेतन नहीं दे पा रही हैं, दिल्ली में नगर निगम में कई दशकों से भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। बीते 5 महीने से नगर निगम में काम कर रहे लोगों को उनका वेतन नहीं मिला है और दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी लाखों करोड़ों रुपए खर्च करके अंग्रेजी में सुनहरे इश्तिहार दे रही है। अगर यह चेहरा चमकाना नहीं है, तो क्या है? मैं मोदी सरकार से पूछना चाहूंगा कि अंग्रेजी में इस प्रकार से विज्ञापन देना क्या गरीब, दबे, कुचले, छले किसान का मजाक उड़ाना नहीं है, तो क्या है, उसके जख्मों पर नमक छिड़कना नहीं है, तो क्या है?

राघव चड्ढा ने कहा कि 2015-16 का एग्रीकल्चरल सर्वे यह कहता है कि देश में 80 प्रतिशत किसानों के पास 2 एकड़ से भी कम जमीन है, वह गरीब किसान आज अपने गांव से साथ वाले गांव में अपनी फसल बेचने के लिए नहीं लेकर जा पाता है। क्या आज वह गरीब किसान अपनी मॉर्निंग कैपचीनों के साथ इस अंग्रेजी में इस्तिहार को पढ़ेगा और समझेगा? क्या यह टैक्स देने वालों के पैसे की फिजूलखर्ची नहीं है और अपना चेहरा चमकाना, दुष्प्रचार करना, भ्रमित करने का एक हथकंडा नहीं है, तो क्या है? राघव चड्ढा ने कहा कि आज हम भारतीय जनता पार्टी को साफ तौर पर चेतावनी देना चाहते हैं कि किसान को आपने जो ठगने की कोशिश की है और अब अंग्रेजी में विज्ञापन देकर मोदी जी अपना जो चेहरा चमकाना चाहते हैं, अपनी सरकार का चेहरा चमकाना चाहते हैं, इस चीज को देश का गरीब किसान आवश्य याद रखेगा और इस देश का गरीब का किसान सड़क से लेकर संसद तक इन दुष्कर्मों के लिए आपसे प्रायश्चित भी करवाएगा।

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद एन.डी. गुप्ता ने मीडिया के सामने पिछले दो दिनों में राज्यसभा में हुई घटनाओं को सिलसिलेवार ढंग से रखते हुए कहा कि 2014 से जुमले की सरकार आई है और इसे हमारे केंद्रीय गृहमंत्री जी ने खुद स्वीकार भी किया है। उन्होंने माना है कि हम जुमले देते हैं और वोट लेने के लिए झूठे वादे करते हैं। एमएसपी का भी एक जुमला था। आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने कई बार कहा है और उनके मंत्रियों ने भी कहा है कि हम किसान की आय 2022 तक दोगुना कर देंगे। किसान की आय कैसे दोगुना कर देंगे, इसका उन्होंने फार्मूला भी दिया है। उन्होंने कहा कि क्राफ्ट प्राइस और 50 प्रतिशत मुनाफा जोड़ कर करेंगे। आज इस बिल के माध्यम से जो राज्यसभा में परसों पास हुआ है। आज यह कर दिया है कि किसान अपना माल बाहर जाकर कहीं पर भी बेचे, लेकिन उस माॅल के कास्ट प्राइस और एमएसपी का कोई लेना देना नहीं है। उसको खुला छोड़ दिया है, उसको उसके रहमो करम पर छोड़ दिया है।

इस बिल पर पार्लियामेंट में जो हुआ है, उस संबंध में जानकारी देते हुए एन.डी. गुप्ता ने कहा कि आपको पता है कि राज्यसभा में सुबह 9 से दोपहर एक बजे तक का समय होता है। मंत्री जी का भाषण चल रहा था। हमारे अदरणीय उपसभापति ने कहा कि 1 बजे के बाद सर्वसम्मति बनाने की बात कही। लोकसभा में विपक्ष के नेता आदरणीय गुलाम नबी आजाद ने कहा कि इस पर सिर्फ आपकी पार्टी सहमत होगी, बाकी विपक्ष इस पर बिल्कुल सहमत नहीं है और इस सदन की पिछले 70 साल में यह परंपरा रही है कि जब भी कभी निश्चित समय से संसद का समय बढ़ाना हो, तो सदन की पूरी सहमति ली जाती है और आज सहमति नहीं है। इसके बाद आगे की चर्चा शुरू हो गई। जब बिल होता है, तब उसमें वोटिंग होती है। उसमें कुछ अमेंडमेंट क्लोज थी, उसमें कुछ बिल मुद्दे पर लिया जाता है। हर एक अमेंडमेंट क्लास पर विपक्ष ने कहा कि आप इस पर वोटिंग करवाइए। वोटिंग करवाने का विपक्ष का अधिकार है। नियम में यहां तक प्रावधान है कि यदि 240 सदस्यों में से 239 सदस्य बिल के पक्ष में है और अगर एक सदस्य भी वोटिंग चाहता है, तो उसकी बात को मानना पड़ेगा, लेकिन उसको स्वीकार नहीं किया गया और सभी संसोधन पास होते गए। उसके बाद उसमें बिल आया और उसमें फिर डिवीजन की मांग की गई, लेकिन डिवीजन नहीं दिया गया और वह पास हो गया।

एन.डी. गुप्ता ने कहा कि पहले संसद को बढ़ाने को लेकर सहमति नहीं थी, लेकिन आपने संसद बढ़ा दिया। उसके बाद बिल पास करने में डिविजन मांगा गया, लेकिन डिवीन नहीं दी गई। यह तय हुआ कि कल सुबह कर लीजिए, आपके पास संख्या है, आपका बिल पास हो जाएगा, लेकिन हमारी मांग को माना नहीं गया। इस प्रकार की तानाशाही से संसद को चलाया जा रहा है और इसी को लेकर के हमारे विपक्ष के सदस्यों ने विरोध किया। इस दौरान मार्शल ने उनके साथ दुव्र्यवहार किया। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह जी का कुर्ता भी फाड़ दिया गया। संसद के बीच में मार्शल ने उनका पैर पकड़ खींचा। संसद में इस प्रकार का वातावरण है। विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित किया गया है, उसे लेकर आज धरने पर हैं। संसद में दो प्रावधान होते हैं। एक मोशन होता है और दूसरा रिजाॅलूशन होता है। गुलाम नबी आजाद और प्रोफेसर रामगोपाल ने भी मोशन दिया। रामगोपाल जी हाथ जोड़ कर यह भी कहा कि हम उनकी तरफ से माफी मांगता हूं और यह निलंबन वापस ले लीजिए, लेकिन वहां पर वो अड़ गए और कहते हैं कि रिजाॅलूशन लाइए, यह मोशन नहीं चलेगा। सदन में काफी पुराने सदस्य हैं और उनके साथ इस प्रकार से तानाशाही व्यवहार किया जा रहा है। अब हम धरने पर हैं। आगे की कार्रवाई क्या होगी, देखी जाएगी।

एन.डी. गुप्ता ने कहा कि अब यह सरकार आर्डिनेंस की सरकार हो गई है। हर एक बिल से ऑर्डिनेंस लेकर आती है, जबकि संसद के नियम में प्रावधान है, संविधान में प्रावधान है। संसद की कुल 24 कमेटी हैं। जब भी कोई बिल आता है, उस कमेटी को बहस होता है। जितनी भी संसदीय कमेटी हैं, उसमें सत्तापक्ष के सदस्य ज्यादा होते हैं, वहां उनको डर नहीं होना चाहिए कि कहीं वोटिंग के जरिए विपक्ष आपकी बात को दबा देगा। इन्होंने यह सिस्टम बना लिया है, यह कभी भी बिल को पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी में रेफर नहीं करते हैं। जितने भी आर्डिनेंस लाए, उसमें बिल पास कर दिया। किसानों के बिल पर विपक्ष ने मांग की कि आप उसको सेलेक्ट कमेटी में भेज दीजिए, यह बहुत बड़ा मुद्दा है, यह किसान का मुद्दा है, मजदूरों का मुद्दा है, देश का मुद्दा है, जहां देश की 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर करती है। अभी भी आपने जीडीपी देखी होगी, 24 प्रतिशत जीडीपी नीचे आई है, अगर उसमें कृषि योगदान नहीं होता तो जीडीपी के 30 प्रतिशत चली जाती। आज किसान जीडीपी भी देख रहा है और उसके साथ इस तरह व्यवहार किया जा रहा है, उसकी बात नहीं रखी जा रही है। लोकतंत्र नाम की कोई चीज नहीं है। यह सरकार, आर्डिनेंस सरकार हो गई है। इसे न स्टैंडिंग कमेटी की जरूरत है, न सेलेक्ट कमेटी की जरूरत है और न पार्लियामेंट में विपक्ष की जरूरत है।

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