नई दिल्ली : दुर्गेश पाठक ने कहा कि भाजपा शासित नगर निगम विज्ञापन एवं पार्किंग माफियाओं के दबाव में काम कर रही है.

नार्थ एमसीडी की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में लिए गए निर्णय पर दुर्गेश पाठक ने कहा कि आम आदमी पार्टी के दबाव में आकर भाजपा शासित नार्थ एमसीडी ने 34 प्रतिशत हाउस टैक्स की वृद्धि का प्रस्ताव वापस ले लिया है.

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लेकिन पार्किंग और विज्ञापन ठेकेदारों का मार्च से सितंबर तक का बकाया टैक्स माफ कर दिया है, उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि एमसीडी के पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं, इसके बावजूद पार्किंग और विज्ञापन ठेकेदारों से मिलने वाले टैक्स के करोड़ों रुपए माफ कर रही है.

पाठक ने कहा कि चर्चा में मुख्य रूप से तीन मुद्दों पर बात होनी थी, जिसमें पहला- हाउस टैक्स में 34 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव, दूसरा, विज्ञापन एवं पार्किंग ठेकेदारों पर बकाया टैक्स को माफ करने का प्रस्ताव और तीसरा नावेल्टी सिनेमा की जमीन को बेचने का प्रस्ताव शामिल था.

उन्होंने बताया निरंतर प्रयास के बाद कल की बैठक में जनता के ऊपर 34 प्रतिशत अतिरिक्त हाउस टैक्स की मार का प्रस्ताव भाजपा शासित नगर निगम को रद्द करना पड़ा, परंतु क्योंकि हम पहले भी इस बात को कहते रहे हैं.

भाजपा विज्ञापन एवं पार्किंग माफिया के दबाव में काम कर रही है, इसीलिए स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में विज्ञापन के ठेकेदारों एवं पार्किंग के ठेकेदारों का मार्च से लेकर सितंबर तक का बकाया टैक्स माफ कर दिया गया.

दुर्गेश पाठक ने कहा कि यह समझ से बिल्कुल परे है कि एक तरफ तो नगर निगम के तमाम विभागों के कर्मचारी अपने वेतन के लिए सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं, भूख हड़ताल कर रहे हैं.

धरना कर रहे हैं और नगर निगम कह रहा है कि हमारे पास उनका वेतन देने के लिए पैसा नहीं है, वहीं, दूसरी तरफ भाजपा की नगर निगम विज्ञापन ठेकेदारो, पार्किंग ठेकेदारों और बड़े-बड़े उद्योगपतियों का करोड़ों रुपए का बकाया टैक्स माफ कर रही है.

उन्होंने कहा कि पिछले 6 महीने में जो करोड़ों रुपए का राजस्व पार्किंग ठेकेदारों और विज्ञापन ठेकेदारों से नगर निगम को आना था, भाजपा ने वह करोड़ों रुपए का बकाया टैक्स माफ कर दिया, जिसका भाजपा शासित नगर निगम पर विपरीत प्रभाव पढ़ रहा है, भाजपा को नगर निगम के अधीन आने वाली जमीने जैसे कि नॉवल्टी सिनेमा की जमीन बेचनी पड़ रही है.

उन्होंने कहा कि बड़ी ही असमंजस की स्थिति है कि एक तरफ तो भाजपा शासित नगर निगम के पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसा नहीं है.

दूसरी ओर नगर निगम दिल्ली की गरीब जनता के ऊपर 34 प्रतिशत अतिरिक्त हाउस टैक्स का बोझ डालने की साजिश रच रही है और तीसरी और जहां से करोड़ों रुपया का टैक्स इकट्ठा किया जा सकता था, उन तमाम विज्ञापन ठेकेदारों और पार्किंग ठेकेदारों का पिछले 6 महीने का बकाया कर माफ कर दिया है, यह समझ से बिल्कुल ही परे है कि भाजपा दिल्ली नगर निगम को किस प्रकार से चलाना चाहती है.

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