नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली का चुनाव प्रभावित करने के लिए सीएए व एनआरसी के खिलाफ शाहीनबाग में धरना कराया था। भाजपा ने पूरा चुनाव शाहीनबाग पर ही लड़ा और पहले सर्वे में जो 18 प्रतिशत वोट मिलना था, जो बढ़ कर 38 प्रतिशत हो गया। जिस शाहीन बाग के बारे में कहा गया कि लोगों ने देश विरोधी, देश के टुकड़े-टुकड़े करने व पाकिस्तान समर्थित आदि के नारे लगाए, उन्हें कल खुद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने पार्टी में शामिल कराया। दिल्ली पुलिस एक दिन से ज्यादा किसी धरने को नहीं टिकने देती है, लेकिन शाहीनबाग का धरना 101 दिनों तक चलने दिया और लाखों लोग परेशान हुए। भाजपा ने शाहीनबाग पर चुनाव लड़ने के लिए स्क्रीप्ट तैयार की थी कि कब, किसे और क्या बोलना है? गृहमंत्री अमित शाह बताते थे, लेकिन हमें समझ नहीं आता था कि ‘कमल’ निशान का तार शाहीनबाग से जुड़ा हुआ था। चुनाव के बाद भी नफरत इतनी बधाई गई कि दिल्ली में दंगे हुए, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई और हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति बर्बाद हुई। आम आदमी पार्टी के वरष्ठि नेता और विधायक सौरभ भारद्वाज ने यह बातें पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान कही।

आम आदमी पार्टी के वरष्ठि नेता और विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पहले दिल्ली का चुनाव बिजली के मुद्दे पर लड़ा जाता था, पानी के मुद्दे पर लड़ा जाता था, सड़क के मुद्दे पर लड़ा जाता था, प्रदूषण के मुद्दे पर लड़ा जाता था, परंतु इस बार जो दिल्ली का चुनाव भाजपा ने लड़ा वह इन मुद्दों पर नहीं बल्कि शाहीन बाग के मुद्दे पर लड़ा। भाजपा की चुनाव लड़ने की जो रणनीति होती है, वह कोई ऐसा नहीं कि प्रवेश वर्मा नाम का कोई व्यक्ति अपनी मर्जी से ऐसी रणनीति बना ले या कोई अनुराग ठाकुर उसका फैसला कर लेगा। बकायदा उच्च स्तर के नेताओं द्वारा बैठकर रणनीति तैयार की जाती है कि इस चुनाव में रणनीति क्या रहेगी ? इसकी कपट नीति क्या रहेगी? यह बाकायदा तय किया गया था कि दिल्ली का चुनाव भाजपा शाहीन बाग के मुद्दे पर ही लड़ेगी।

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उन्होंने कहा कि चुनाव के तहत पूरी रणनीति तैयार की गई थी कि कौन किस को गाली देगा, कौन किस से बदतमीजी करेगा, कौन कब क्या बोलेगा? पहले कौन बोलेगा और उसके बाद कौन बोलेगा? भाजपा की इसी सुनियोजित रणनीति के कुछ पहलुओं को मीडिया के सामने रखते हुए सौरभ भारद्वाज ने कहा की 28 जनवरी को भाजपा नेता प्रवेश वर्मा ने कहा कि जैसे कश्मीर के अंदर पअत्याचार हुआ उनकी मां-बहनों का बलात्कार किया जा रहा है, वही लोग अब दिल्ली में आपकी मां -बहनों का बलात्कार करेंगे।

 उसके बाद 2 फरवरी को कपिल नाम का लड़का शाहीन बाग में गोली चलाता है और दंगा भड़काने की कोशिश करता है। 4 फरवरी को भाजपा के केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर कहते हैं देश के गद्दारों को, गोली मारो सालों को, और यही नहीं खुद भाजपा के बड़े नेता और देश के गृहमंत्री अमित शाह जी एवं भाजपा के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी लगातार शाहीन बाग के नाम पर दिल्ली में जगह-जगह वोट मांगते रहे। अमित शाह जी अपने बयान में कहते हैं कि जब आप यहां मशीन में कमल का बटन दबाएंगे, तो बटन यहां दबे का और करंट शाहीन बाग में लगेगा। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि उस वक्त समझ नहीं आता था कि कमल के बटन से शाहीन बाग का क्या कनेक्शन है? परंतु अब जाकर समझ आ रहा है कि भाजपा और शाहीन बाग के तार जुड़े हुए थे।अब ये साफ हो गया है, की कनेक्शन जुड़ा हुए है।

भाजपा के समर्थकों को और देश की जनता को यह ज़रूर पता चलना चाहिए कि कैसे एक राजनीतिक दल, एक सोची-समझी रणनीति के तहत अपने ही कार्यकर्ताओं को मोहरे की तरह इस्तेमाल करता है। इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा झटका शायद उन लोगों को लगेगा, जो इस प्रदर्शन में यह सोचकर शामिल हुए थे कि हम डेमोक्रेसी को बचाने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं, परंतु उनको नहीं मालूम था कि यह पूरा का पूरा चक्रव्यू भारतीय जनता पार्टी द्वारा रचा गया है। इस पूरे प्रोटेस्ट की डोर भारतीय जनता पार्टी के हाथ में  है।

उन्होंने कहा की उन सभी लोगों को यह जानकर बेहद दुख होगा कि शाहीन बाग स्थल पर जो मुख्य संयोजक थे, जिन्हें भारतीय जनता पार्टी गद्दार कह रही थी, देशद्रोही कह रही थी, उन्हीं में से कुछ लोगों को भाजपा के वर्तमान दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता और भाजपा के एक अन्य बड़े नेता श्याम जाजू ने बाकायदा प्रेस वार्ता का आयोजन करके भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता दिलाई है। प्रश्न यह उठता है कि क्या भारत विरोधी नारे लगाने वाले लोग, अब भाजपा में शामिल होंगे? या फिर वह भाजपा के ही लोग थे और सिर्फ दिल्ली के चुनाव को खराब करने के लिए वह भाजपा के इशारे पर शाहीन बाग में बैठे हुए थे? क्या वह लोग जिनके लिए भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा कहते थे कि यह लोग अब दिल्ली में हमारे घरों में घुसकर हमारी बहन -बेटियों का बलात्कार करेंगे, क्या ऐसे लोग अब भाजपा में शामिल हो गए ?

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हमने शाहीन बाग के प्रोटेस्ट को बहुत नजदीकी से देखा है और अक्सर इस बात की शिकायत मिलती थी कि यहां पर अनजान लोग आकर दंगा भड़काने की कोशिश करते हैं। पुलिस जांच नहीं की गई की है अनजान लोग कौन थे।

उन्होंने कहा कि मैं भाजपा समर्थकों को आज यह बताना चाहता हूं कि जिन लोगों को आप पानी पी पीकर गालियां देते थे, कोसते थे और जिनसे अपनी मां -बहनों की सुरक्षा करने की बात करते थे, वह भाजपा के ही लोग थे। जो आज खुल्लम-खुल्ला भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो चुके हैं।

दिल्ली के चुनाव से पहले शाहीन बाग के प्रोटेस्ट को भाजपा ने इस प्रकार से प्रदर्शित किया जैसे कि है पूरे देश के खिलाफ प्रोटेस्ट हो रहा है। भाजपा ने इस तरह का माहौल बनाया कि यदि भाजपा नहीं जीती तो इस प्रकार के प्रदर्शन पूरे देश के कोने-कोने में होंगे। यदि भाजपा जीतेगी तभी यह शाहीन बाग का प्रोटेस्ट खत्म हो सकेगा। भाजपा के प्रायोजित लोग जो वहां प्रदर्शन में मौजूद थे, वह बार-बार कहते थे कि जब तक यह CAA का कानून वापस नहीं लिया जाएगा, हम शाहीन बाग से नहीं उठेंगे। दिल्ली के चुनाव हुए और मात्र ऐसी जगहों पर जहां भाजपा ने हिंदू और मुसलमानों के बीच में नफरत भरी जैसे कि नॉर्थ ईस्ट दिल्ली का इलाका, सिर्फ वहां भाजपा की 4 सीटें आई। भाजपा के लोग खुद इस बात को मानते हैं कि दिल्ली में भाजपा को मात्र 18 प्रतिशत वोट उनके खुद के सर्वे के मुताबिक मिल रहा था, परंतु जब शाहीन बाग का पूरा प्रकरण भाजपा ने करवाया, तो उनका वोट प्रतिशत अट्ठारह से बढ़कर 38 प्रतिशत तक पहुंच सका। उन्होंने कहा कि इतने सबके बावजूद भी जब भाजपा चुनाव नहीं जीती, तो शाहीन बाग प्रदर्शन को दिखा कर भाजपा ने हो नफरत फैलाई, उसी के कारण दिल्ली में दंगे हुए जिसमें लगभग 53 लोगों की मृत्यु हुई और करोड़ों रुपए की संपत्ति का नुकसान हुआ। जब तक भारतीय जनता पार्टी को शाहीन बाग प्रोटेस्ट का लाभ मिला तब तक यह प्रोटेस्ट चलता रहा और जब भारतीय जनता पार्टी चुनाव हार गई तो 24 मार्च को खुद-ब-खुद यह प्रदर्शन खत्म हो गया।

11 दिसंबर 2019 को देश की संसद में सीएए बिल पास किया गया। 14 दिसंबर को 6 लेन का दिल्ली नोएडा एक्सप्रेसवे,  जिसे कोई सामान्य व्यक्ति पार नहीं कर सकता, उस 6 लेन के एक्सप्रेस-वे को मात्र 10 महिलाओं ने मिलकर जाम कर दिया और जाम भी ऐसा कर दिया कि 101 दिनों तक दिल्ली नोएडा एक्सप्रेसवे की आवाजाही बंद रहे। प्रदर्शनकारियों ने मात्र एक सड़क बंद की थी, मगर भाजपा शासित दिल्ली पुलिस ने आसपास की तमाम रोड जो दिल्ली -नोएडा को जोड़ते थे, बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया। दिल्ली शहर में खूब प्रोटेस्ट होते हैं, डॉक्टर प्रदर्शन करते हैं,किसान प्रदर्शन करते हैं, विकलांग अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन करते हैं, तमाम तरह के प्रदर्शन दिल्ली में होते हैं, परंतु कभी ऐसा नहीं हुआ कि दिल्ली पुलिस ने कोई भी प्रदर्शन 1 दिन से ज्यादा सड़क पर होने दिया हो। परंतु यह प्रोटेस्ट 3 महीने से अधिक अवधि तक चलता रहा। यह कोई ऐसा प्रोटेस्ट भी नहीं था, जिसमें कुछ लोग आए और जमकर बैठ गए। इस प्रोटेस्ट में बाकायदा लोग आते थे, दिनभर बैठते थे, शाम को अपने घर चले जाते थे खाना खाते थे, अगले दिन फिर आकर बैठ जाया करते थे। कुछ लोगों की रात में शिफ्ट लगाई जाती थी। यदि आज हम लोग जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट का आह्वान कर दें, तो दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर जाने वाले तमाम रास्तों को बंद कर देगी। आसपास के सभी मेट्रो स्टेशन बंद करवा देगी, परंतु शाहीन बाग का यह प्रोटेस्ट 3 महीने तक चलता रहा, लोग आते जाते रहे, परंतु दिल्ली पुलिस ने किसी को नहीं रोका। हम लगातार इस बात को कहते रहे कि दिल्ली पुलिस जिस दिन चाहेगी, यह प्रोटेस्ट खत्म हो जाएगा, परंतु इस प्रोटेस्ट को रोकने में दिल्ली पुलिस की कोई रूचि नहीं थी। लगभग एक लाख वाहन रोजाना परेशान होते थे। सोशल मीडिया पर लगातार लोग अपनी परेशानियों का जिक्र करते रहते थे। हाई कोर्ट में भी तुरंत प्रभाव से आदेश दिया कि शाहीन बाग के प्रोटेस्ट पर पुलिस पुलिस कार्यवाही करे, ये उसके अन्तर्गत आता है, परंतु  केंद्र की ने कोई कदम नहीं उठाए।

एक उदाहरण देते हुए सौरभ भारद्वाज जी ने कहा जैसे यदि किसी की हत्या हो जाती है, तो पुलिस जांच करने में सबसे पहले इस बात पर गौर करती है कि उस हत्या से सबसे अधिक लाभ किसको हो सकता है। जांच की प्रक्रिया पुलिस उस व्यक्ति से शुरू करती है। अब प्रश्न यह उठता है की शाहीन बाग के पूरे मामले से सबसे ज्यादा लाभ किसे पहुंचा। क्या शाहीन बाग के प्रदर्शन का लाभ कांग्रेस को हुआ, समाजवादी पार्टी को हुआ, टीडीपी को हुआ, आम आदमी पार्टी को हुआ या भाजपा को हुआ? हम सभी जानते हैं कि शाहीन बाग का सबसे ज्यादा लाभ किस पार्टी को हुआ और किस पार्टी ने इसका लाभ लेने की कोशिश की।

मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से यह कहा जाता था कि वहां पर लोग देश विरोधी नारे लगा रहे हैं। भारत के टुकड़े करने के नारे लगा रहे हैं। पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं। यदि ऐसे नारे लगाए जा रहे थे, तो दिल्ली पुलिस क्या कर रही थी। उन देश विरोधी नारे लगाने वालों को पकड़ा क्यों नहीं गया? कहा जाता था कि वहां पैसे बांटे जाते हैं। यदि यह बात सत्य है, तो दिल्ली की पुलिस क्या कर रही थी केंद्र की भाजपा सरकार क्या कर रही थी?

रिपोर्ट सोर्स, पीटीआई

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