नई दिल्ली : दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सदभाव समिति के चेयरमैन राघव चड्ढा को कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें फेसबुक द्वारा जानबूझ कर भड़काउ और घृणा फैलाने वाले पोस्ट को नजर अंदाज किया गया है, जो कि खुद फेसबुक की पाॅलिसी के खिलाफ है और इन शिकायतों में अमेरिका स्थित आॅनलाइन न्यूज प्लेटफार्म द वाॅल स्ट्रीट जर्नल में 14 अगस्त 2020 को प्रकाशित न्यूज के हवाले से किसी बड़े साजिश का आशंका व्यक्त की गई है और इसमें फेसबुक के अधिकारियों के शामिल होने का अंदेशा जताया गया है।

इन शिकायतों में आरोप लगाया है कि घृणित और भड़काउ पोस्ट के खिलाफ आंतरिक पाॅलिसी होने बावजूद इन पर फेसबुक द्वारा अंकुश नहीं लगाया गया, बल्कि फेसबुक इस तरह की पोस्ट को लेकर अपनी आंखें बंद किए हुए है। इस तरह के पोस्ट न केवल सामुदायों के बीच में घृणा पैदा करते हैं, बल्कि समाज में दंगा और हिंसा की स्थिति पैदा करने में भी सक्षम हैं। शिकायर्ताओं ने खासतौर पर द वाॅल स्ट्रीट जर्नल के आर्टिकल ‘फेसबुक हेट स्पीच रूल्स कोलाइड विद इंडियन पोलिटिक्स’ का जिक्र किया है। जिसमें अंखी दास द्वारा जो फेसबुक की पब्लिक पाॅलिसी डायरेक्टर हैं, उन्होंने अपनी पाॅलिसी को नजरअंदाज करते हुए कुछ राजनीतिज्ञों, जो हिन्दू राष्ट्रवादी और इस तरह के ग्रुप से जुड़े हैं, उन्हें फायदा पहुंचाने के लिए इन लोगों के द्वारा उन ग्रुपों पर किए गए भड़काउ पोस्ट, जो फेसबुक के आंतरिक नियमों के अंतर्गत हिंसा को बढ़ावा देने की श्रेणी में आते थे, उसे जानबूझ कर नजरअंदाज किया गया।

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यहां यह उल्लेख करना आवश्यक है कि इस कमेटी का गठन इसी साल, अभी हाल ही में एक बीजेपी नेता द्वारा कथित तौर पर दिए गए गैर जिम्मेदाराना बयान के परिप्रेक्ष्य में किया गया था, जिसके परिणाम स्वरूप दिल्ली में हिंसात्मक प्रदर्शन हुए और जिसने बाद में दंगे का रूप धारण कर लिया। यह कमेटी अपने स्वरूप में आने के बाद से ही दिल्ली में या देश के अन्य हिस्सों में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हो और नागरिक सुरक्षा और शांति बनी रहे, इसके लिए प्रयासरत है। गौरतलब है कि बीजेपी के उसी नेता का जिक्र वॉल स्ट्रीट जर्नल के आर्टिकल में भी किया गया है, जिनके भड़काऊ पोस्ट को फेसबुक द्वारा नजरअंदाज किया गया। दिलचस्प बात यह है कि मार्क जुकरबर्ग ने एक वीडियो में उस नेता के पोस्ट को भड़काऊ और समाज में नफरत फैलाने वाला बताया था। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कमेटी इस बात पर मजबूर हुई है कि दिल्ली में हाल ही में हुए दंगों में फेसबुक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए।

दिल्ली में शांति और सुरक्षा को बनाए रखने के मौलिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए दिल्ली विधानसभा की इस कमेटी द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि पूरे मामले की तह तक जाया जाए और देश के किसी अन्य हिस्से, मुख्य रूप से दिल्ली में इस तरह की घटना दोबारा न हो सके, इसके लिए सभी आरोपों की जांच की जाए। इस कमेटी ने शिकायतों की जांच के बाद प्रथम दृष्टया यह पाया है कि फेसबुक अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोप काफी संगीन है, जिसकी यदि जांच नहीं की गई, तो इसके काफी दुष्प्रभाव परिणाम सामने आ सकते हैं। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कमेटी के चेयरमैन श्री राघव चड्ढा ने मामले का संज्ञान लिया है और शिकायतकर्ता, और गवाहों को कमेटी के सामने उपस्थित होने का नोटिस जारी किया है।

निम्नलिखित लोगों को कमेटी के सामने 25-8-2020 को औपचारिक तौर पर उपस्थित होने के लिए समन जारी किया गया है-

  1. परांजॉय गुहा ठाकुर्ता: प्रख्यात पत्रकार और ‘द रियल फेस आॅफ फेसबुक इन इंडिया’ के सह लेखक हैं। उन्हें विशेषज्ञ के तौर पर फेसबुक के खिलाफ शिकायतों में कथित आरोपों पर अपनी राय देने के लिए बुलाया गया है।
  2. निखिल पाहवा: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की तकनीकी से संबंधित अपनी विशेषज्ञता के लिए भारत में डिजिटल इको सिस्टम में डिजिटल राइट्स एक्टिविस्ट और प्रमुख चेहरा हैं।
  3. विभिन्न मीडिया हाउस के कुछ पत्रकारों ने इस मुद्दे को कवर किया है और साथ ही फेसबुक के अधिकारियों के साथ विशेष पत्राचार किया है।
  4. शिकायतकर्ता

मुख्य रूप से, इसमें सार्वजनिक महत्व के मुद्दे शामिल होने की वजह से राघव चड्ढा की अध्यक्षता में इस कमेटी ने यह फैसला किया है कि पूरी कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग की जाएगी और मीडिया को भी मौजूद रहने की इजाजत दी जाएगी, ताकि इसकी पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। वहीं, समिति का उद्देश्य इस मसले का जल्द से जल्द निवारण करना है, इसलिए इस मुद्दे को उसके तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचाने के लिए कार्यवाही में तेजी लाई जाएगी।

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