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दिल्ली के शिक्षा मॉडल की तारीफ सिर्फ देश में ही नहीं, दुनिया भर में हो रही है – मनीष सिसोदिया

नई दिल्ली: दिल्ली के उप मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर कहा कि वर्तमान शिक्षा सत्र (मार्च 2021) तक शिक्षा निदेशक को दिल्ली में ही बने रहने दिया जाए। उन्होंने पत्र के माध्यम से कहा है कि कोरोना के कारण इस समय पूरा देश एक अभूतपूर्व संकट से गुजर रहा है। कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन का सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है। स्कूल और यूनिवर्सिटी पूरी तरह बंद है। दिल्ली में बामुश्किल, कदम-ब-कदम योजना बनाते हुए संकट के इस दौर में भी किसी तरह बच्चों की शिक्षा को जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में इस संकट के बीच दिल्ली के शिक्षा निदेशक को अचानक हटाए जाने से दिल्ली सरकार की कोशिशों को बहुत नुकसान पहुंचेगा।

विनय भूषण को शिक्षा निदेशक का कार्यभार मिले मात्र एक वर्ष ही हुआ, फिर उन्हें इस पद से हटाने की ऐसी जल्दबाजी क्यों – मनीष सिसोदिया

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केंद्रीय गृह मंत्री को भेजे पत्र में उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 12वीं क्लास के नतीजे इस बार 98 प्रतिशत रहे हैं। यह संभवतः पहली बार है कि देश में किसी राज्य में सरकारी स्कूलों के नतीजे इतने शानदार रहे हैं। पिछले सप्ताह नतीजे आने के तुरंत बाद से ही मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल जी और मैं अधिकारियों और शिक्षाविदों की टीम के साथ यह रणनीति बनाने में जुटे हुए थे कि आने वाले वर्षों में सरकारी स्कूलों में एक भी बच्चा अनुत्तरीण ना रहे और हर बच्चा बेहतरीन शिक्षा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा सके। अपने प्रधान-अध्यापकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के साथ मिलकर हम बहुत तेजी से इस रणनीति पर जुट गए थे। मनीष सिसोदिया ने लिखा है कि बृहस्तपिवार को भी मैं शिक्षा विभाग के अपने अधिकारियों के साथ अनुत्तीर्ण रह गए छात्रों से बात कर यह समझने की कोशिश कर रहा था कि आखिर कमी कहां रह गई? जिस व्यवस्था में 98 प्रतिशत बच्चे पास हुए उसमें 2 प्रतिशत बच्चे किन परिस्थितियों और कारणों से अनुत्तीर्ण रह गए। इन छात्रों से बात करके जैसे ही हम अपनी शिक्षा व्यवस्था में और सुधार की आगामी रणनीति बना रहे थे, वैसे ही मेरे हाथ में भारत सरकार के गृह मंत्रालय का एक आदेश आया, जिसमें लिखा था कि दिल्ली के शिक्षा निदेशक श्री विनय भूषण का दिल्ली से बाहर ट्रांसफर कर अंडमान भेज दिया गया है। मेरे सामने अधिकारियों की टीम अगले कुछ वर्षों में शिक्षा को लेकर सपने बुन रही थी और मैं आप के उस आदेश को पढ़ रहा था, जिसमें आपने उन सपनों की बुनियाद से एक मजबूत नींव का पत्थर ही खींच दिया था। श्री विनय भूषण को शिक्षा निदेशक का कार्यभार मिले अभी तो मात्र एक वर्ष ही हुआ है, फिर उन्हें इस पद से हटाने और दिल्ली से बाहर भेजने की ऐसी जल्दबाजी आपने क्यों दिखाई?

मनीष सिसोदिया ने आगे पत्र में लिखा है कि कोरोना के कारण इस समय पूरा देश एक अभूतपूर्व संकट से गुजर रहा है। कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन का सबसे ज्यादा नुकसान हमारे बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है। स्कूल और यूनिवर्सिटी पूरी तरह बंद है। हम बामुश्किल, कदम-ब-कदम योजना बनाते हुए संकट के इस दौर में भी किसी तरह बच्चों की शिक्षा को जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में इस संकट के बीच में दिल्ली के शिक्षा निदेशक को अचानक हटाया जाना, हमारी इन कोशिशों को भी बहुत नुकसान पहुंचाएगा।

दिल्ली के शिक्षा मॉडल की तारीफ सिर्फ देश में ही नहीं, दुनिया भर में हो रही है – मनीष सिसोदिया

उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने यह भी लिखा है कि मुझे समझ नहीं आ रहा कि आपने ऐसा क्यों किया? क्या आपको खुशी नहीं हुई कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों के अच्छे नतीजे आए हैं? क्या आपको यह नहीं लगा कि जिन अधिकारियों की टीम ने यह संभव कर दिखाया है, उन्हें शाबाशी देनी चाहिए और उनके काम को पूरे देश के सामने एक मॉडल के रूप में रखना चाहिए, ताकि पूरे देश में सरकारी स्कूल अपनी खोई हुई गरिमा वापस प्राप्त कर सकें? मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल मानते हैं कि शिक्षा के बिना हम अपनी राष्ट्र को मजबूत और विकसित नहीं बना सकते। उनके इसी विजन पर काम करते हुए आज दिल्ली के सरकारी स्कूल एक नई पहचान बनाते जा रहे हैं और दिल्ली के शिक्षा मॉडल की तारीफ सिर्फ देश में ही नहीं, दुनिया भर में हो रही है। क्या आपको नहीं लगता कि ऐसे मुख्यमंत्री को साथ लेकर आपको पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार का खाका बनाने पर चर्चा करनी चाहिए, बजाय इसके कि आप उनके शिक्षा निदेशक को उनसे सलाह किए बिना दिल्ली से बाहर भेजें?

किसी भी केद्र शासित राज्य के मुख्यमंत्री से बिना सलाह किए ही ये ट्रांसफर ऑर्डर कर दिये – मनीष सिसोदिया

उप मुख्यमंत्री ने पत्र के माध्मय से लिखा है कि आप कहते हैं कि दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश है तो क्या केंद्र की यह जिम्मेदारी नहीं बनती कि वह दिल्ली में शिक्षा के इस काम में और मदद करें? कानून के तहत आप एजीएमयूटी कैडर (अरुणाचल, गोवा, मिजोरम एवं यूनियन टेरिटरीज) के आईएएस अधिकारियों की कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी हैं। यह अथॉरिटी आपको इसलिए दी गई है ताकि आप इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ सलाह मशवरा करके इनके बीच आईएएस अधिकारियों की तैनाती करें। आपने इनमें से किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री से बिना सलाह किए ही ये ट्रांसफर ऑर्डर कर दिये।


उप मुख्यमंत्री ने लिखा है कि मेरा आपसे विनम्र अनुरोध है कि अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करें और श्री विनय भूषण के अंडमान ट्रांसफर किए जाने के आदेश को बदलते हुए उन्हें कम से कम मार्च 2021 (वर्तमान शिक्षा सत्र की समाप्ति) तक बतौर दिल्ली के शिक्षा निदेशक कार्य जारी रखने दें। साथ ही इस तरह से किसी भी अधिकारी की अंतर्राज्यीय ट्रांसफर पोस्टिंग से पहले इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा करके ही निर्णय लेने की व्यवस्था को कायम करें। मुझे उम्मीद है कि आप मुझे निराश नहीं करेंगे और उपरोक्त के संबंध में शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेंगे।

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