नई दिल्ली : आतिशी ने बताया कि मोदी सरकार के एयर क्वालिटी कमीशन के चेयरपर्सन ने पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने के मुद्दे को लेकर दिल्ली विधानसभा की पर्यावरण समिति को मिलने का समय दे दिया है, समिति सोमवार को सुबह 11 बजे कमीशन के चेयरपर्सन से मुलाकात करेगी.

पंजाब व हरियाणा में पराली जलाने से संबंधित तथ्य प्रस्तुत करेगी, हमें उम्मीद है कि कमीशन के चेयरपर्सन दोनों सरकारों के मुख्यमंत्रियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के आदेश देंगे, क्योंकि बाॅयो डीकंपोजर तकनीक से पराली का समाधान उपलब्ध होने के बावजूद हरियाणा और पंजाब की सरकारें हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पराली को जलाने से नहीं रोक पाईं हैं.

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आतिशी ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि दिल्ली में प्रति वर्ष अक्टूबर एवं नवंबर के महीने में प्रदूषण बहुत बढ़ जाता है, उन्होंने कहा कि प्रदूषण का स्तर इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि दिल्ली में रहने वाले लोगों को सांस लेने तक में तकलीफ होती है.

उन्होंने कहा कि यदि इसके पीछे के कारण को देखा जाए तो पता चलता है कि पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने के कारण अचानक से अक्टूबर और नवंबर के महीने में दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है.

आतिशी ने कहा कि जैसे-जैसे पंजाब और हरियाणा में पराली जलना शुरू होता है, दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ता चला जाता है, इस वर्ष भी जैसे ही पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने का सिलसिला शुरू हुआ, दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा और अब हम देख रहे हैं कि जब से पंजाब और हरियाणा में पराली जलना बंद हुआ है.

4 दिन से दिल्ली में प्रदूषण का स्तर भी कम हुआ है, नीला आसमान दिखाई देने लगा है और धूप भी नजर आने लगी है, उन्होंने कहा कि इस सारी बिगड़ी हुई परिस्थितियों के जिम्मेदार हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने इस पराली को जलाने की समस्या के निवारण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए.

जबकि दिल्ली में स्थित पूसा इंस्टीट्यूट ने खेत में ही पराली को डीकंपोज करने की एक बेहतरीन तकनीक इजाद की है, जिससे पराली को बिना जलाए बहुत ही सस्ते दामों पर खेत में ही डीकंपोज किया जा सकता है.

इस तकनीक के द्वारा पराली को खेत में ही मात्र 30 रुपए प्रति एकड़ के खर्च पर खाद बनाया जा सकता है, परंतु फिर भी पंजाब और हरियाणा की सरकारों ने कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया.

आतिशी ने बताया कि इसी बाबत हमने कुछ दिनों पहले दिल्ली विधानसभा की पर्यावरण समिति की ओर से केंद्र की एयर क्वालिटी कमीशन से मिलने का समय मांगा था, उन्होंने बताया कि हमने एयर क्वालिटी कमीशन से इसलिए समय मांगा था.

ताकि उन से अनुरोध कर सकें कि पंजाब और हरियाणा की सरकारों के खिलाफ उनके इस लापरवाह रवैया को देखते हुए सख्त से सख्त कार्यवाही के आदेश दिए जाएं, हम एयर क्वालिटी कमीशन से मिलकर यह भी अनुरोध करना चाहते थे कि वह पंजाब और हरियाणा की सरकारों को आदेश दें कि जब दिल्ली में स्थित पूसा इंस्टीट्यूट ने एक समाधान पराली को जलाने से रोकने के लिए निकाला है.

तो हरियाणा और पंजाब की सरकारें उसको प्रयोग में क्यों नहीं ला रहीं? क्यों नहीं हरियाणा और पंजाब में पराली के जलने से होने वाले प्रदूषण को रोकने में इसका इस्तेमाल कर रहीं?

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