नई दिल्ली : मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पिछले कुछ दिनों में व्यापारियों और औद्योगिक एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। व्यापारियों और औद्योगिक यूनिट्स के मालिकों का कहना है कि वे कोरोना के कारण हुए आर्थिक नुकसान के बावजूद बिजली के फिक्स्ड चार्ज का भुगतान करने के लिए बाध्य हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने और सरकार की तरफ से कुछ राहत देने की सिफारिश की है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उन्हें आश्वासन दिया है कि जल्द ही उन्हें राहत देने के लिए पर्याप्त कदम उठाए जाएंगे। पिछले कुछ दिनों में, कई व्यापारी और औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने सीएम अरविंद केजरीवाल से मुलाकात कर इस संबंध में हस्तक्षेप करने और उन्हें राहत प्रदान करने का अनुरोध किया है।

पिछले कुछ दिनों में, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कई एसोसिएशन से मुलाकात की है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि कोरोना वायरस के कारण व्यवसायों और अर्थव्यवस्था के पूरी तरह से बंद होने के कारण दिल्ली सरकार की राजस्व कलेक्शन पर बहुत ज्यादा असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि हालांकि पूरी तरह से लॉकडाउन लगाने का फैसला जरूरी था, लेकिन दिल्ली ने अब लॉकडाउन हटाने का फैसला किया है और अब अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने केे लिए कारोबार और उद्योग फिर से शुरू हो गए हैं। कुछ दिन पहले, सीएम अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की थी कि पिछले वर्ष अप्रैल महीने में राजस्व 3,500 करोड़ रुपये था, जो गिरकर इस साल 300 करोड़ रुपये हो गया है।

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सीएम अरविंद केजरीवाल ने व्यापारियों और औद्योगिक एसोसिएशन के प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि दिल्ली सरकार द्वारा वाणिज्यिक और औद्योगिक इकाइयों के मालिकों को फिक्स्ड बिजली चार्ज में राहत देने के लिए जल्द ही कदम उठाए जाएंगे। इन इकाइयों के विभिन्न हितधारक और प्रतिनिधि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात कर उनसे हस्तक्षेप का अनुरोध कर रहे हैं, क्योंकि कोविड-19 लॉकडाउन के कारण अधिकांश इकाइयां बंद रही हैं।

केंद्र के अनलॉक दिशानिर्देशों का पालन करते हुए दिल्ली सरकार ने भी राष्ट्रीय राजधानी में कई आर्थिक गतिविधियों की अनुमति दी है। कई चरणों में सीएम अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए विभिन्न उपायों की घोषणा की है। हाल ही में, दिल्ली विद्युत नियामक आयोग ने कोविड-19 महामारी को देखते हुए लगातार छठें वर्ष भी बिजली टैरिफ में कोई वृद्धि नहीं करने की घोषणा की थी।

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