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पूर्व सपा सांसद का तंज ‘ग्रेटा पर क्यों रपट लिखाई, कौन सलाह देता है भाई, क्यों करवाते जग हंसाई’

नई दिल्लीः स्वीडन की पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने भारत में चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में एक के बाद एक कई ट्वीट किये थे। जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने ग्रेटा थनबर्ग के खिलाफ दिल्ली पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज की गई। ग्रेटा पर एफआईआर दर्ज किये जाने पर सपा के पूर्व सांसद जावेद अली ख़ान ने तंज किया है। उन्होंने इसे जग हंसाई बताया है। राज्यसभा सदस्य रहे जावे अली ख़ान ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि सड़कों में क्यों कील फँसाई, ग्रेटा पर क्यों रपट लिखाई, कौन सलाह देता है भाई, क्यों करवाते जगत हँसाई।

उन्हें न दिखता बिल काला

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सपा नेता ने केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर पर भी तंज किया है। दरअस्ल तोमर ने बीते रोज़ किसान यूनियन और विपक्ष से पूछा कि क़ानून में काला क्या है? उन्होंने कांग्रेस पर निशाने साधते हुए कहा कि दुनिया जानती है कि ‘पानी से खेती होती है। ख़ून से खेती सिर्फ कांग्रेस ही कर सकती है, भाजपा ख़ून से खेती नहीं कर सकती। इस पर कांग्रेसी नेताओं ने पलटवार भी किया। अब उनके बयान पर समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सांसद रहे जावेद अली ख़ान ने तंज किया है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि रगों में जिनकी सफ़ेद ख़ून, पूछें – कैसे है काला क़ानून।

जावेद अली ख़ान ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि रगों में जिनकी सफ़ेद ख़ून, पूछें – कैसे है काला क़ानून, जिन का हो गया दिल काला, उन्हें न दिखता बिल काला। सपा नेता स्वीडन की पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग पर दर्ज हुई एफआईआर पर भी तंज किया है। उन्होंने कहा कि सड़कों में क्यों कील फँसाई, ग्रेटा पर क्यों रपट लिखाई, कौन सलाह देता है भाई, क्यों करवाते जगत हँसाई।

बता दें कि किसान आंदोलन के समर्थन में स्वीडन की ग्रेटा और अमेरिका की पॉप स्टार रेहाना ने ट्वीट किये थे। जिसके बाद सरकार समर्थित गुटों द्वारा किसानों के गतिरोध को भारत का आंतरिक मामला बताया गया गया था। पूर्व सांसद ने इसे लेकर भी सवला उठाया है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी, ख़ालिस्तानी, पाकिस्तानी और देशद्रोही जैसे आरोप किसान आन्दोलन पर शुरुआत में ही मढ़ दिये गये थे ।26 जनवरी का घटनाक्रम उनके पुष्टिकरण का प्रायोजित षड्यंत्र था।

जावेद अली ख़ान ने कहा कि मानव अधिकारों व लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन विश्व समुदाय की नज़र में किसी भी देश का आन्तरिक मामला नहीं माना जाता। भारत ने हमेशा ही विश्व भर मे लोकतांत्रिक आन्दोलनों को नैतिक समर्थन देकर अपनी साख़ क़ायम की है।

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