अपनी ही सरकार के प्रशासन से ख़फ़ा भाजपा विधायक एटा में डीएम कार्यालय के सामने धरने पर बैठे,बोले प्रशासन ने हराया

एटा
उत्तर प्रदेश के एटा जिले में भाजपा के चार विधायक जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए हैं। उनके साथ तमाम समर्थक भी हैं। विधायकों ने जिला प्रशासन पर पार्टी के जिला पंचायत सदस्य कैंडिडेट्स को हरवाने और समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों को जिताने का आरोप लगाया है। विधायकों ने सभी 30 सीटों पर किसी दूसरे निर्वाचन अधिकारी की देखरेख में फिर से मतगणना कराने की मांग की है। जिलाधिकारी डॉक्टर विभा चहल और एसएसपी उदय शंकर सिंह फोर्स के साथ मौके पर हैं।
धरने पर बैठने वालों में एटा जिला पंचायत चुनाव के प्रभारी एमएलसी धर्मवीर प्रजापति शामिल हैं। इसके अलावा मारहरा सीट से विधायक वीरेंद्र लोधी, अलीगंज से विधायक सत्यपाल सिंह राठौर, जलेसर के विधायक संजीव दिवाकर धरना देने वालों में शामिल हैं। ​​​

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एमएलसी धर्मवीर प्रजापति ने कहा कि प्रशासन ने हमें हराया है। उनका कहना है कि काउंटिंग शुरू होने के कुछ देर बाद से हमारे कार्यकर्ताओं के फोन आने लगे कि एजेंटों को मतगणना स्थल से बाहर कर दिया। एक घंटे बाद पता चला कि जो हमारा उम्मीदवार 900 और 1000 वोटों से आगे चल रहा है, वह दो हजार से पीछे कर दिया गया। इसकी शिकायत करने के बाद भी इसे गंभीरता से नहीं लिया। जिला प्रशासन ने अपने कर्मचारियों को सही सिद्ध किया। आज हमारे 10 नंबर वार्ड से जीते कैंडिडेट को सर्टिफिकेट देने के बजाय किसी और को दिया गया। 10 नंबर वार्ड में सात बूथों का पता नहीं है। कटिंग कर नंबर बढ़ाए गए हैं।
धर्मवीर प्रजापति दावा किया है कि यदि 27 वार्डों में दोबारा काउंटिंग की गयी तो हम 25 वार्ड जीतेंगे। सभी मतगणना कर्मियों ने शिकायतों को नजरअंदाज किया गया है। प्रशासन का समाजवादी पार्टी से गेम फिक्स था।
उन्होंने कहा कि इस जिले के अलावा किसी और जिले के अधिकारी से मतगणना कराई जाए।

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