क्या है जाब्तागंज दिल्ली स्थित प्राचीन शाही मस्जिद के गिराने की ख़बर की गहराई,अन्य किन मस्जिदों को गिराने की है ख़बर

नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश में मस्जिदों के विध्वंस के बाद अब दिल्ली के मानसिंह रोड पर स्थित कई शताब्दी पुरानी ज़ाब्ता गंज शाही मस्जिद भी ख़तरे में है। सैकड़ों वर्ष पुरानी ऐतिहासिक मस्जिद की दीवारों को गिराने के लिए सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की टीम पहुंचकर कार्यवाई शुरू करने ही वाली थी कि इससे पहले आसपास के लोग वहाँ पहुँच गये, उनके विरोध के चलते सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की टीमें वहाँ से लौट गयीं।


आपको बता दें कि जाब्तागंज मस्जिद लगभग 280 वर्ष पुरानी है। ज़ाब्ता गंज मस्जिद सन् 1740 की बनी हुई है। यह मस्जिद वक्फ़ बोर्ड के अधीन आती है। वक्फ़ की तरफ़ से ही इसमें इमाम नियुक्त है। जब इस बारे में मस्जिद के इमाम असद फलाही से बात की तो उन्होंने बताया कि

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“कुछ अंदेशे थे,जिनको लेकर उच्चाधिकारियों से बात की गयी और अधिकारियों ने इस सिलसिले में पूरा भरोसा दिलाया। अन्य सम्बंधित लोगों से बात की गयी तो उन्होंने भी सन्तोषजनक उत्तर दिया गया। निर्माण से सम्बंधित सभी नक्शे इत्यादि प्राप्त कर लिए गये हैं। मस्जिद अल्हम्दुलिल्लाह सुरक्षित है और इंशाअल्लाह सुरक्षित रहेगी।”

-असद फलाही

असद फलाही ने सख़्त अफ़सोस और चिंता जताते हुये कहा कि मसले को सही तरीके से जाने बिना कुछ लोगों ने इस मसले को सोशल मीडिया पर अनावश्यक रूप से उछाल कर सुर्ख़ियों में ला दिया। इस प्रकार के मामलों में धार्मिक भावनायें जुड़ी होती हैं,इसलिये ऐसे मामलों में हमेशा ज़िम्मेदारी और समझदारी दिखानी चाहिए।

इतने गम्भीर मसले पर इमाम का इस तरह का बयान बहुत से सवाल खड़े कर रहा है। इमाम के जवाब से सबसे बड़ा सवाल तो यह खड़ा होता है कि क्या सेंट्रल विस्टा जैसे अहम प्रोजेक्ट (जिसके लिए लॉकडाउन में भी कन्स्ट्रक्शन की अनुमति दी गयी थी) की टीम बिना नक्शे के ही वहाँ दीवार गिराने पहुँच गयी थी।


जबकि सूत्रों से पता चला है कि सरकार और महकमे की काफी दिनों से इस मस्जिद पर नज़र है कई बार उनकी तरफ से इस तरह की कोशिशें हो भी चुकी हैं , नमाज़ियों में इस बात को लेकर बड़ी चिंता भी है फिर भी इमाम साहब का ये बयान इस मसले की गंभीरता को कम करता है और जनता के दिमाग़ में सवाल खड़े करता है कि इमाम साहब आखिर इतने पुरसुकून और मुतमईन क्यों हैं, जबकि मस्जिद पर मुस्तकिल तलवार लटकी हुई है।
इस बारे में जब दिल्ली वक्फ़ बोर्ड के चेयरमैन अमानतुल्लाह खान से बात की तो उन्होंने बताया

“हमें ख़बर मिली है कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की वजह से मानसिंह रोड पर स्थित ज़ाब्ता गंज मस्जिद, मौलाना आज़ाद रोड पर स्थित वाइस प्रेसिडेंट आवास कम्पाउंड की मस्जिद और कृषि भवन में 100 साल से ज़्यादा पुरानी मस्जिद को नुक्सान पहुँचाया जा सकता है। इस संदर्भ में हम PMO और केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री हर्षदीप सिंह पुरी से राब्ता करेंगें।
किसी भी हालात में इन मस्जिदों को किसी भी तरीके का नुकसान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

-अमानतुल्लाह खान

इतिहास बताता है कि इस क्षेत्र को जब अंग्रेज़ों ने नई दिल्ली के लिए अधिग्रहित किया और लोगों को उत्तर प्रदेश के बिजनौर के गांवों में बसाया, तब भी उन्होंने इस मस्जिद को हाथ नहीं लगाया था। लेकिन कुछ समय से यह मस्जिद लोगों की आँखों की किरकिरी बनी हुई है।


ज्ञात हो कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत एक नया संसद भवन, एक नए आवासीय परिसर के निर्माण की परिकल्पना की गई है, जिसमें प्रधानमंत्री और उप-राष्ट्रपति के आवास के साथ-साथ कई नए कार्यालय भवन और मंत्रालयों के कार्यालयों के लिए केंद्रीय सचिवालय का निर्माण होना है। 22 लाख वर्गफीट भूभाग की इस परियोजना पर 20 हजार करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।

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