बच्चो के संरक्षण, शिक्षा, सुरक्षा व सशक्तिकरण के लिए प्रारंभ की बाल सेवा योजना: मुख्यमंत्री


मेरठ। कोरोना से अपने माता-पिता या अभिभावक को खोने वाले बच्चो के संरक्षण, शिक्षा, सुरक्षा व सशक्तिकरण के लिए मुख्यमंत्री जी की पहल पर प्रारंभ की गयी उ.प्र. मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का शुभारंभ लोक भवन, सभागार लखनऊ में राज्यपाल, उ.प्र. आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ द्वारा किया गया। राज्यपाल ने कहा कि इस तरह की योजना प्रारंभ करने वाला उ.प्र. पहला राज्य है। इस अवसर पर प्रदेश के 4050 बच्चों के बैंक खातों में 04 हजार प्रतिमाह की दर से तीन माह के कुल 12 हजार का हस्तानांतरण व योजना के लिए बनाये गये लोगो का लोकार्पण राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने बटन दबाकर किया। मेरठ में 102 बच्चे इस योजना से लाभान्वित हुये हैं।
राज्यपाल उ.प्र. आनंदी बेन पटेल ने कहा कि उ.प्र. देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने इस तरह की योजना बनायी है। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया है कि पूरे भारत में इस तरह की योजना का क्रियान्वयन किया जाये। उन्होंने कहा कि गत डेढ़ वर्षों से प्रदेश व देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि उ.प्र. में कोरोना महामारी में अच्छा कार्य हुआ है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी से अपने माता-पिता या अभिभावक खोने वाले बच्चों की अंगुली पकड़ने का कार्य राज्य सरकार ने किया है।

उन्होंने कहा कि योजनान्तर्गत मात्र 04 हजार प्रतिमाह की सहायता ही नहीं है बल्कि उनकी शिक्षा, सुरक्षा व सशक्तीकरण पर भी योजना में ध्यान दिया गया है, जो कि प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा कि उनके स्तर से विश्वविद्यालयो को निर्देश दिये गये हैं कि कोरोना महामारी से अपने माता-पिता या अभिभावक को खोने वाले विद्यार्थियो को विश्वविद्यालय सूचीबद्ध करें तथा ऐसे प्रत्येक विद्यार्थी को विश्वविद्यालय का एक प्रोफेसर एक बच्चे को गोद लें तथा उसकी शिक्षा, सुरक्षा व सशक्तीकरण पर कार्य करें। उन्होंने कहा कि पूर्व में उन्होंने टीबी से पीड़ित बच्चों को गोद लेने का आह्वान किया था जिसमें कई संस्थाओ व शिक्षकों ने बच्चों को गोद लिया तथा जिसके फलस्वरूप कई बच्चे टीबी से मुक्त हुये हैं।

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राज्यपाल उ.प्र. आनंदी बेन पटेल ने बताया कि मेरी बेटी व दामाद ने एक पांच वर्षीय बच्चे को गोद लिया तथा उसकी शिक्षा, सुरक्षा व सशक्तीकरण पर कार्य किया। उन्होंने कहा कि दहेज प्रथा को रोकने के लिए सामूहिक विवाह का आयोजन कराना एक अच्छा उपाय है । इस प्रकार के आयोजनों से गुजरात में दहेज प्रथा पर लगाम लगी है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यों में जनशक्ति का सहयोग आवश्यक है। उन्होने कहा कि सरकार के प्रयासो के साथ-साथ जनशक्ति का सहयोग व भूमिका भी आवश्यक है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने कहा कि पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी नियंत्रण के लिए अपना मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि महामारी से बचाव के उपाय के बावजूद भी कई लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है। उन्होंने कहा कि यूएसए की आबादी भारत की आबादी से एक चैथाई है तथा वहां इन्फ्रास्ट्रक्चर ज्यादा है। इसके बावजूद वहां कोरोना से हुयी मृत्यु की संख्या भारत की तुलना में डेढ़ गुना से भी अधिक है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के कुशल मार्गदर्शन से कोरोना महामारी नियंत्रण में सहायता मिली है। उन्होंने कहा कोरोना की प्रथम लहर में प्रधानमंत्री ने अनेक कदम उठाये। उ.प्र.ने भी श्रमिकों को भरण-पोषण भत्ता सहित अन्य कदम उठाये। उन्होंने कहा कि आज उ.प्र. में कोरोना के 04 लाख टेस्ट प्रतिदिन करने की क्षमता है, 1.5 लाख से अधिक बेड हैं। उन्होंने कहा कि महामारी में लापरवाही नही हो सकती। उन्होंने कहा कि उ.प्र. में कोरोना महामारी नियंत्रण के लिए विभिन्न कदम सफलतापूर्वक उठाये गये।

उन्होंने कहा कि उ.प्र. मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना में 01 मार्च 2020 से अब तक अपने दोनों माता-पिता खोने वाले 240 बच्चे हैं तथा 3810 ऐसे बच्चे हैं जिन्होंने अपने माता-पिता में से एक या अपना लीगल संरक्षक खोया है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने अपना माता-पिता या लीगल संरक्षक खोया है ऐसे बच्चों को 18 मण्डलो में प्रारंभ होने वाले अटल आवासीय विद्यालयो में निःशुल्क शिक्षा आदि दी जायेगी। बच्चियों को कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में निःशुल्क शिक्षा आदि दी जायेगी।

उन्होंने कहा कि अगर सरकार संवदेनशील है तो उसकी संवेदना दिखनी भी चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्होने महिला एवं बाल विकास विभाग को निर्देशित किया है कि वह ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता या लीगल संरक्षक कोरोना के अतिरिक्त किसी अन्य कारण से उनकी मृत्यु हुयी है ऐसे बच्चो की भी सूची बनाये ताकि उनको भी संरक्षित किया जा सके।

राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार महिला बाल विकास स्वाती सिंह ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुये कहा कि उन्होंने बच्चों की पीड़ा को समझा और उनकी देखभाल का जिम्मा लिया तथा एक संरक्षक व पिता की तरह कार्य किया। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चे जिनकी आयु 11 से 18 वर्ष है, उनको आगे की शिक्षा के लिए बालकों को अटल आवासीय विद्यालय में व बालिकाओं को कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों में भेजा जायेगा। उन्होंने कहा कि लड़की की शादी योग्य उम्र होने पर उसकी शादी पर 01 लाख 01 हजार दिये जायेंगे तथा कक्षा 9 से आगे या व्यवसायिक शिक्षा प्राप्त कर रहे ऐसे बच्चों को टैबलेट या लैपटाॅप दिया जायेगा।

इससे पूर्व कार्यक्रम के दौरान प्रतीकात्मक रूप से राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने 10 बालक व बालिकाओं को स्वीकृति प्रमाण पत्र, स्कूल बैग आदि वितरित किया। वहीं बच्चो ने प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुये कहा कि हमें ऐसी सरकार मिली है जो संकट की घड़ी में हमारे साथ खड़ी है। इस अवसर पर योजना के लिए बनायी गयी फिल्म का प्रसारण भी किया गया। मेरठ में 102 बच्चे इस योजना से लाभान्वित हुये हैं।

मेरठ के एनआईसी में लखनऊ के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया गया। कार्यक्रम उपरांत ज़िलाधिकारी के. बालाजी ने बच्चों को स्वीकृति प्रमाण पत्र वितरित किए व कहा कि अगर उन्हें किसी भी प्रकार की चीज की जरूरत है या किसी भी प्रकार के सहयोग की आवश्यकता है तो बच्चे उनसे सीधे संपर्क कर सकते हैं।

इस अवसर पर लखनऊ से स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह, मुख्य सचिव राजेन्द्र तिवारी आदि व मेरठ के एनआईसी में विधायक किठौर सत्यवीर त्यागी, ज़िलाधिकारी के. बालाजी, सीडीओ शशांक चौधरी, ज़िला प्रोबेशन अधिकारी शत्रुघ्न कन्नौजिया सहित अन्य अधिकारी व बालक व बालिकाएं उपस्थित रहे।

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