भारत में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार की गूँज विदेशों तक पहुँची,विश्व के 30 से ज़्यादा संगठनों ने अमेरिकी सरकार से की कार्यवाई की अपील

पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की घटनाएं अचानक बढ़ गयी हैं। आये दिन अल्पसंख्यकों की लिंचिंग एवं मारपीट की घटनाएं सामने आती रहती हैं। इन घटनाओं से भारत की छवि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख़राब हो रही है। अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की घटनाओं पर नज़र रख रहे दुनियाभर के 30 सामाजिक संगठनों ने अमेरिका में भारत के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया है। इस साझा प्रस्ताव में कहा गया है कि ‘भारत में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहा है। ऐसे में अमेरिकी सरकार को चाहिए की भारत को धार्मिक मामलों में ‘कंट्री ऑफ पर्टिकुलर कंसर्न’ ‘(CPC) विशेष चिंता वाले देश’ की सूची में डाल दे।’
सामाजिक संगठनों ने बाइडेन सरकार से भारत के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग यह कहकर की है कि यहां गैर हिंदुओं के साथ धार्मिक भेदभाव और उनका खुलेआम उत्पीड़न किया जा रहा है। यह प्रस्ताव अमेरिका में पहली बार हुई अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता समिट के दौरान पारित किया गया।


इससे पहले अमेरिकी संसद द्वारा गठित अंतरराष्ट्रीय धार्मिक आजादी आयोग (यूएससीआईआरएफ) ने लगातार दूसरे साल भारत समेत चार देशों विशेष चिंता वाले देश(CPC) घोषित करने की सिफारिश की थी। आयोग का आरोप था कि भारत में धार्मिक आजादी की स्थिति 2020 में भी नकारात्मक बनी रही।
उधर अमेरिका की सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी के तीन सांसदों ने भी भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को निशाना बना रही है, अभिव्यक्ति की आजादी पर कार्रवाई कर रही है। इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल द्वारा आयोजित ‘भारत में धार्मिक स्वतंत्रता : चुनौतियां और अवसर’ विषय पर सामूहिक परिचर्चा में डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद एड मार्के ने कहा, ‘‘मैं भारत में 20 करोड़ मुसलमानों सहित अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता के बारे में काफी चिंतित हूं।’’ वहीं सांसद मेरी न्यूमन ने आरोप लगाया कि पिछले सात साल में सैकड़ों मुस्लिमों पर भीड़ ने हमला किया है। उन्होंने कहा, ‘‘यह न्याय का मजाक है और यह खौफनाक है।

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दरअसल, अमेरिकी विदेश मंत्रालय किसी भी देश को सीपीसी की सूची में डाल सकता है। वह भी तब जब उस देश में धार्मिक स्वतंत्रता उल्लंघन के गंभीर मामले सामने आएं। ऐसा होने पर अमेरिकी सरकार आर्थिक और गैर-आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए उस देश पर धार्मिक स्वतंत्रता बनाए रखने का दबाव डालती है।
भारत सरकार ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत में स्वतंत्र प्रेस, स्वतंत्र न्यायपालिका, लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था है। इसके अलावा अनेक राष्ट्रीय व राज्य स्तर के आयोग हैं जो मानवाधिकार उल्लंघन की निगरानी करते हैं। साथ ही देश में प्रगतिशील सिविल सोसाइटी भी है।

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