नई दिल्ली : पंचायत चुनाव में मिली हार के बाद गहलोत सरकार के सामने संकट खड़ा हो गया है, भारतीय ट्राइबल पार्टी ने राजस्थान की गहलोत सरकार से समर्थन वापस ले लिया है, बीटीपी के दो विधायक लगातार गहलोत सरकार को समर्थन दे रहे थे.

इस साल की शुरुआत में जब विधानसभा में गहलोत सरकार ने अपना बहुमत साबित किया था, तब दोनों विधायकों ने गहलोत का समर्थन किया था.

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बीटीपी के दोनों विधायकों राजकुमार रोत और रामप्रसाद ने पार्टी अध्यक्ष और गुजरात के विधायक महेश वसावा से समर्थन वापसी लेने की बात कही थी, जिस पर अमल करते हुए उन्होंने अपना निर्णय ले लिया है.

पायलट के बगावत ही नहीं बल्कि राज्यसभा चुनाव के दौरान भी कांग्रेस प्रत्याशी केसी वेणुगोपाल और नीरज डांगी के पक्ष में मतदान किया था, लेकिन जिला परिषद का चुनाव कांग्रेस से नाता तोड़ने के लिए उन्हें मजबूर कर दिया.

हाल ही में राज्य में हुए पंचायत समिति के चुनाव में कांग्रेस को कई सीटों पर नुकसान हुआ है, बीटीपी के विधायकों ने आरोप लगाया था कि चुनावों में कांग्रेस ने उसका साथ नहीं दिया और धोखा दिया.

पंचायत चुनाव में 1833 सीटों पर BJP ने जीत हासिल की थी, जबकि कांग्रेस को 1713 सीटों पर जीत मिली है, इसके अलावा जिला प्रमुख के चुनावों में भी BJP का प्रदर्शन कांग्रेस से काफी बेहतर था.

बता दें कि राजस्थान के आदिवासी डूंगरपुर जनपद में जिला परिषद सदस्यों के चुनाव में बीटीपी को सबसे ज्यादा सीटें मिली थी, लेकिन कांग्रेस और BJP के हाथ मिलाने के चलते बीटीपी का जिला प्रमुख नहीं बन सका, वहीं, डूंगरपुर में BJP ने अपना जिला प्रमुख बना लिया.

हालांकि, दो विधायकों के समर्थन वापस लेने से गहलोत सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि अब कांग्रेस के पास राज्य में बहुमत है, लेकिन कुछ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है.

राजस्थान में कुल 200 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से अभी गहलोत सरकार के पास 118 हैं, हालांकि, इनमें से कई निर्दलीय विधायक भी शामिल हैं.

साथ ही बीते दिनों खुद CM गहलोत ने आशंका जताई थी कि राज्य में फिर एक बार सरकार गिराने की हलचल शुरू हो गई है.

गहलोत ने ये दावा पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए किया था, गहलोत के मुताबिक, BJP फिर राजस्थान और महाराष्ट्र में सरकार बनाने की कोशिश कर सकती है.

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