नई दिल्ली : एआईकेएससीसी पंजाब के किसान संगठनों द्वारा केन्द्रीय कृषि सचिव द्वारा बुलाई गयी बैठक का बहिष्कार करते हुए उससे वाॅकआउट करने का पूरा समर्थन करती है, क्योंकि यह बैठक केन्द्र सरकार द्वारा यह गलत समझ पैदा करने के लिए बुलाई गई थी कि सरकार किसानों से बात करने का प्रयास कर रही है, जबकि सच यह है कि वह इन किसान विरोधी काले कानूनों को अमल करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रही है। देश के किसान व खेत मजदूर लगातार इन तीन किसान, खेती व फसल सम्बन्धित कानूनों के विरोध में संघर्षरत हैं। इन कानूनों को केन्द्र सरकार ने जबरन अमल किया है। इस पृष्ठभूमि में केन्द्रीय कृषि सचिव ने पंजाब के 31 संगठनों को वार्ता के लिए बुलाया था, ताकि इस प्रयास को वे सुर्खियों में ला सकें। इस प्रयास में उन्होंने किसी समाधान की कोई पेशकश नहीं की और किसान नेताओं द्वारा उठकर बाहर आना पूर्णतः उचित था।

एआईकेएससीसी व देश भर के कई अन्य किसान संगठनों के नेतृत्व में देश भर के किसानों ने सरकार के सामने किसी भी वार्ता के लिए बहुत ही उचित शर्तें पेश की हुई हैं, पहली यह कि सरकार को इन कानूनों पर पुनर्विचार करने तथा जरूरत होने पर इन तीनों कानूनों को वापस लेने के लिए तैयार होना चाहिए।

देश दुनिया की अहम खबरें अब सीधे आप के स्मार्टफोन पर TheHindNews Android App

दूसरा कि सरकार को इस बात के लिए राजी होना चाहिए कि वह एमएसपी के कानूनी अधिकार तथा खेती के लागत के दाम खाद्यान्न सुरक्षा व अन्य समस्याओं को हल करेगी। कृषि सचिव के साथ बैठक के होने में कोई भी शर्त पूरी नहीं होती क्योंकि न तो वे कानून को वापस ले सकते हैं, न संशोधित कर सकते हैं, न नए कानून बना सकते हैं। उनका काम सरकार द्वारा बनाए गये कानूनों को अमल करना है और वे इस सही चर्चा के लिए गलत इंसान हैं।

इस बीच जैसा कि पहले से घोषित था, एआईकेएससीसी के घटकों ने 20 से अधिक राज्यों में सैकड़ों स्थानों पर एमएसपी अधिकार दिवस मनाया, जिसमें रैलियां, जनसभाएं, मंडी सभाएं आयोजित हुईं। हरियाणा, उत्तराखण्ड, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक केरल, महाराष्ट्र, गुजरात व अन्य राज्यों में यह बड़ी भागीदारी के साथ मनाए गये। एमएसपी के कानूनी अधिकार के लिए प्रस्ताव अपनाए गये।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here