नई दिल्ली: ऑल इंडिया स्मॉल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स फेडरेशन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अखबारों को बचाने के लिए आर्थिक पैकेज दिये जाने की मांग की है। फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरिन्दर सिंह ने लघु और मझोले अखबारों की स्थिति पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री को देश की बड़ी समाचार एजेन्सी यूएनआई व पीटीआई की स्थिति से अवगत कराया है जिनमें यूएनआई में कार्यरत पत्रकारों को पिछले 4 वर्षों से वेतन नहीं मिल पा रहा है और पीटीआई की वित्तीय स्थिति भी गंभीर है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे अपने पत्र में फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरिन्दर सिंह ने अवगत कराया कि प्रिंट मीडिया वर्ष  2016 के बाद से ही विज्ञापनों की भारी कमी के कारण आर्थिक दबाव में है। पिछलेे वर्षों में लगातार आर्थिक मंदी के कारण प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थानों में कर्मचारियों की छटनी से हजारों लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी। वर्ष 2018-19 में प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) से भी काफी लोगों को नौकरी से हटाया गया, जबकि यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (यूएनआई)  की हालत काफी खराब है, यहां तक कि यूएनआई में पत्रकारों का वेतन करीब चार वर्ष (44 माह) का लम्बित है। पिछलेे पांच वर्षों में कोई नया समाचार पत्र समूह भारत में नहीं उभर सका है और दिन-प्रतिदिन लघु और मझोले समाचार पत्र वित्तीय संकट के कारण बंद होते जा रहे हैं।

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राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरिन्दर सिंह ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री से मांग की कि कोरोना संक्रमण के कारण देश में लगाये गये लॉकडाउन की अवधि में अखबारों को विज्ञापन के मद में हुए नुकसान की प्रतिपूर्ति के लिए आर्थिक पैकेज दिया जाए व सरकार द्वारा प्रचार-प्रसार के लिए निर्धारित बजट को बढ़ाया जाए। समाचार पत्रों, इलैक्ट्रिोनिक मीडिया संस्थान एवं समाचार एजेंसियों में कार्य करने वाले संपादक, संवाददाताओं व छायाकारों का न्यूनतम 50 लाख रुपए का जीवन बीमा कराया जाए। उन्होने मांग की कि देश की प्रतिष्ठित समाचार एजेंसियों को बचाने के लिए विशेष कदम उठाये जाएं व सरकार द्वारा ब्यूरो ऑफ आउटरीच कम्युनिकेशन (डीएवीपी) द्वारा जारी होने वाले विज्ञापनों में लघु और मझोले समाचार पत्र को वरीयता दी जाये।

गुरिन्दर सिंह ने बताया कि विश्वव्यापी कोरोना (कोविड-19) के संक्रमणकाल में हमारा पूरा देश जहां इस वायरस के संक्रमण के खिलाफ जंग लड़ रहा है वहीं मीडिया क्षेत्र में काम करने वाले कर्मवीर भी पूरी जी जान से इस लड़ाई में जुटे हैं। अपने निजी संसाधनों के द्वारा मीडिया संस्थान कोरोना से लड़ने में सरकार के दिशानिर्देशों को जन-जन तक पहुंचाने व आम जनमानस को जागरूक करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे समय में सरकारों द्वारा लघु व मझोले समाचार पत्रों को आर्थिक पैकेज व इनमें कार्यरत मीडियाकर्मियों को जीवन बीमा सुरक्षा आदि दी जानी चाहिए।

गौरतलब है कि फेडरेशन देशभर के लघु एवं मझोले समाचार पत्रों के प्रकाशकों-स्वामियों की अग्रणी संस्था है। विभिन्न प्रदेशों में कार्यरत अशोक कुमार नवरत्न, एल. सी. भारतीय, बी. एम. शर्मा, दीपक सिंह, बी. आर. रामा मूर्ति, अमित पात्रो,  अनवर अली खान, दिनेश शक्ति त्रिखा, सुधीर पांडा, एच. यू. खान, शिवशरण सिंह गहरवार, महेश अग्रवाल, मलय बनर्जी, पवन सहयोगी, संजय कुमार शर्मा व श्याम सुंदर बंसल आदि अपने प्रदेशों में मीडियाकर्मिर्यों व प्रकाशकों की समस्याओं को बेहतर तरीके से उठा रहे हैं और उनके निवारण के लिए प्रयत्नशील हैं।

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