नई दिल्ली : प. बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासत तेज हो गई है, इसी को लेकर सीएम ममता ने भी कसम खा ली है, ममता ने कहा कि यह पार्टी का संकल्प है कि हम झूठ बोलकर वोट नहीं लेंगे.

खास बात है कि बीजेप अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के काफिले पर हुए हमले के बाद से ही बंगाल में सियासी हलचलें तेज हो गई हैं.

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एक कार्यक्रम के दौरान सीएम ममता ने कहा, ‘तृणमूल कांग्रेस सरकार तीन चीजों से मिलकर बनी है मां, माटी, मानुष और ये तीनों चीजें कभी छल नहीं कर सकती, धोखा नहीं दे सकती और झूठ नहीं बोल सकती हैं.’

खास बात है कि इस दौरान ममता ने मंच से ही एक कसम भी खाई, उन्होंने कहा, ‘हम झूठ बोलकर वोट नहीं लेंगे, जो कहा है वह करेंगे, यह टीएमसी की शपथ है.’

उन्होंने कहा, ‘बंगाल में चंबल के डाकू और बाहर के गुंडे घुस आए थे, उस समय उन्होंने पुलिस को डराया और कभी-कभी टीएमसी को भी धमकियां दीं, आज टीएमसी की जड़ें बरगद के पेड़ की तरह गहरी हैं.’

ममता सरकार की परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं, पार्टी के दिग्गज नेता माने जाने वाले शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है, काफी समय से उनके पार्टी छोड़ने के कयास लगाए जा रहे थे.

इस पर लगातार बंगाल बीजेपी नेता बयान दे रहे हैं, पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को भी सीएम ममता ने निशाने पर लिया, उन्होंने कहा, ‘2-3 लोग जो जानते हैं कि उन्हें पार्टी से टिकट नहीं मिलेगा, वे जा रहे हैं.’

मुकुल रॉय ने कहा, ‘जिस दिन शुभेंदु अधिकारी ने मंत्रीपद से इस्तीफा दिया था, मैंने कहा था कि अगर वह टीएमसी छोड़ देंगे तो मुझे खुशी होगी और हम उनका स्वागत करेंगे,’ रॉय ने कहा ‘आज उन्होंने बंगाल की विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है.

मैं उनके फैसले का स्वागत करता हूं,’ उन्होंने कहा, ‘टीएमसी ताश के पत्तों की तरह ढह रही है, हर रोज उनकी पार्टी से हमारे पास पार्टी जॉइन करने के लिए आता है.

बीजेपी राज्य में लगातार पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठा रही है, बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने बुधवार को कहा कि चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पश्चिम बंगाल में बगैर किसी डर के स्वतंत्र और निषपक्ष चुनाव कराएं जाएं.

उन्होंने कहा, ‘इसके लिए जरूरी है कि राज्य प्रशासन का चुनाव में इस्तेमाल न किया जाए,’ उन्होंने कहा, ‘अगर पुलिस इसमें शामिल होती है, तो निषपक्ष चुनाव होना मुमकिन नहीं है.

उन्होंने कहा कि इस वीडियो में साफ तौर से देखा जा सकता है कि कैसे बीजेपी के एक बड़े नेता सफाई कर्मचारी यूनियनों को मजबूर कर रहे हैं.

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