नई दिल्ली/भोपाल: मध्य प्रदेश के इंदौर और भोपाल शहर में कोरोना का प्रकोप देखने को मिल रहा है, इंदौर में 200 से अधिक और भोपाल में 90 से अधिक कोरोना पीड़ित सामने आ चुके हैं, भोपाल के कोरोना पीड़ितों में करीब आधे यानी 40 से अधिक लोग स्वास्थ्य विभाग के हैं, इनमें प्रदेश की प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य पल्लवी जैन गोविल और एमडी हेल्थ कॉर्पोरेशन जे विजय कुमार के रूप में दो आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं, इसके अलावा अतिरिक्त निदेशक स्वास्थ्य संचार वीना सिन्हा भी कोरोना से पीड़ित हैं,

इन अधिकारियों के कोरोना पीड़ित होते ही स्वास्थ्य मानकों को शिथिल कर दिया गया और तयशुदा अस्पताल में इलाज कराने के बजाय प्रमुख सचिव अपने घर पर ही स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं जो कोरोना प्रोटोकॉल के खिलाफ है, कोरोना प्रोटोकॉल के मुताबिक कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति के लिए अस्पताल में भर्ती होना अनिवार्य है लेकिन इस मामले में एम्स भोपाल ने आनन-फानन में पत्र जारी करके कहा कि लक्षण नहीं होने पर मरीज घर में रह सकता है,

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गौरतलब है कि इससे पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि संक्रमण या उससे जुड़ी अन्य बात छिपाने वालों पर गैर इरादतन हत्या का मामला चलाया जा सकता है, लेकिन इस मामले में संबंधित अफसरों और कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी, इस बीच, मानवाधिकार आयोग ने सरकार से इस बारे में जवाब तलब किया है, आयोग ने मुख्य सचिव से पूछा है कि रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद अधिकारियों को फौरन अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में क्यों नहीं रखा गया था,

मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य महकमे में आईएएस अधिकारियों के अलावा, उप निदेशक, अतिरिक्त निदेशक, व्यक्तिगत सहायक और चपरासी भी संक्रमित हैं, इसके अतिरिक्त भोपाल में 10 से अधिक पुलिसकर्मी भी कोरोना से संक्रमित हैं, मध्य प्रदेश कोरोना से होने वाली मौतों के मामले में भी देश में सबसे अग्रणी देशों में शामिल है, वहां अब तक सामने आए करीब 350 मामलों में से 26 लोगों की मौत हो चुकी है, गुरुवार को इंदौर में एक चिकित्सक और करीबी शहर देवास में समाचार पत्र से जुड़े एक व्यक्ति की कोरोना से मौत हो गयी

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