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कोरोना: बोले केजरीवाल- ‘अपनी जान की परवाह किए बिना डाॅक्टर, नर्स, पुलिस, माॅर्शल समेत कई अन्य दिन रात कर रहे काम, यही हैं दिल्ली के हीरो’

नई दिल्ली: कोरोना और लाॅकडाउन के दौरान कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो अपने जान की परवाह किए बगैर रात-दिन काम कर रहे हैं, ताकि हमारी दिल्ली सुरक्षित रहे, दिल्ली के लोग सुरक्षित रहें। ऐसे कोरोना योद्धा हैं, डाॅक्टर्स, नर्स, प्रिंसिपल और शिक्षक (राशन वितरण), सिविल डिफेंस वालेंटियर्स, पुलिस, आशा वर्कर्स, बस ड्राइवर्स, कंडक्टर्स व माॅर्शल्स।  जिन्हें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ‘दिल्ली के हीरो‘ नाम दिया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कहना है कि आज दिल्ली सबसे मुश्किल जंग अपने दिल्ली के इन योद्धाओं की वजह से इतनी मजबूती से लड़ रही है। इन योद्धाओं की वजह से ही कोरोना के ठीक हो रहे मरीजो की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। इनकी वजह से ही दिल्ली में 10 लाख लोगों को प्रतिदिन खाना खिलाया जा रहा है। इनकी वजह से ही लाखों प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजा जा रहा है। दिल्ली के यह हीरो, अपना घर-बार छोड़कर रात-दिन बस दिल्ली को सुरक्षित करने की जंग लड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इनका धन्यवाद किया, उन्हें सलाम किया और अपने आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से दिल्ली के हंगर रिलीफ सेंटर के कूक विजय यादव का वीडियो ट्वीट कर कहा कि महामारी के दौरान हमारे हंगर रिलीफ सेंटर के रसोइए जरूरतमंदों के लिए खाना बना कर पुण्य का काम कर रहे हैं। रोजाना 10 लाख लोगों की भूख मिटाने का काम करते हैं ये दिल्ली के हीरो। दिल्ली इन कोरोना योद्धाओं के जज़्बे को सलाम करती है। एक अन्य ट्वीट कर सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान हम में से ज्यादातर लोग अपने अपने घरों में बंद थे लेकिन कुछ दिल्लीवासी अपने जान की परवाह किए बिना, हमारे शहर और देश की सेवा में तैनात थे। इन दिल्ली के हीरो को पूरी दिल्ली सलाम करती है। ऐसे कुछ हीरो की कहानियां मैं आज से सोशल मीडिया पर शेयर कर रहा हूँ। ‘दिल्ली के हीरो’ की कहानी, उनकी ही जुबानी, इनकी कहानी इस सप्ताह सीएम अपने ट्वीटर हैंडल से ट्वीट भी करेंगे

लाॅकडाउन में 22 घंटे कर रहे काम, ताकी भूखा न रहे 30 से 35 हजार परिवार – विजय यादव

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हंगर रिलीफ सेंटर के कूक विजय यादव (37) ने बताया कि जब से लाॅकडाउन हुआ है, तब से आराम सिर्फ 2 घंटे का मिल रहा है। इस समय बहुत मेहनत करनी पड़ रही है। जब मिड-डे-मील होता था, तब काम कम था। अब हमें 22 घंटे तक काम करना पड़ रहा है। मेरे यहां से प्रतिदिन 36 हजार लोगों का खाना बनता है। हमारे पास 60 से 70 हंगर रिलीफ सेंटर है। रात के 2 बजे से खाना बनाने का काम शुरू हो जाता है और सुबह 8 बजे तक बनता है। इसके बाद सफाई होनी शुरू हो जाती है और दोपहर 12 बजे से फिर शाम का खाना बनने लगता है। दिल्ली सरकार में इतनी हिम्मत है कि इतने लोगों के लिए कर रही है। 10 से 12 लाख लोगों को खाना खिलाना, उनको ठहराना, उनके सोने का इंतजाम और शारीरिक दूरी का पालन कराना, यह आसान काम नहीं है। यह सरकार का बहुत बड़ा काम है। परिवार वाले बहुत परेशान हैं। वे बुला रहे हैं कि आ आओ, लेकिन सबके लिए सोचना पड़ रहा है। हम परिवार को देखेंगे, तो यहां 30 से 35 हजार लोग भूखे हैं, उनको कौन देखेगा। परिवार से यही कहना है कि वे यही सोचें कि यहां हम एक और परिवार को पाल रहे हैं। ऐसा समझो कि अब हमारा 30 से 35 हजार लोगों का परिवार है।

दिल्ली सरकार का भूखे लोगों को खाना खिलाने का फैसला सही – राजेंद्र

27 वर्षीय सिविल डिफेंस वालेंटियर राजेंद्र कालकाजी में स्थिति दिल्ली सरकार के हंगर रिलीफ सेंटर में सोशल डिस्टेसिंग सुनिश्चित कराने का काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि दिल्ली सरकार के सिविल डिफेंस वालेंटियर्स यह सुनिश्चित कर रहे है कि हंगर रिलीफ सेंटर्स में अच्छी तरह से सभी को खाना परोसा जाए। हम सभी सिविल डिफेंस वालेंटियर का फर्ज बनता है कि लोगों की रक्षा करें। मेरी यहां पर माॅर्शल के तौर पर ड्यूटी लगी है। जितने लोग यहां आते हैं, उनमें सोशल डिस्टेंसिंग सुनिश्चित करता हूं। सभी को अच्छी तरह खाना उपलब्ध करवाता हूं। दिल्ली सरकार ने बहुत अच्छा फैसला लिया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जो लोग भूखे मर रहे हैं, उनको बहुत अच्छे तरीके से खाने प्रबंध कराया है। हर व्यक्ति को सुबह-शाम अच्छे तरीके से खाना मिल रहा है। अगर उनके परिवार में चार सदस्य हैं, तो उन चारों को खाना मिल रहा है। किसी को भी कोई परेशानी नहीं हो रही है। चाहे वे बाहर ही क्यों न आए हों। 21 मार्च को लाॅकडाउन हुआ था, उसके एक सप्ताह बाद से ही स्कूलों में खाना शुरू करा दिया गया था। मैं अपने परिवार को बहुत कम समय दे पा रहा हूं। मैं कभी घर जाता हूं, तो कभी नहीं जाता हूं। यदि घर जाता हूं तो पूरा चेकअप करा कर जाता हूं। बाहर ही स्नान करने के बाद घर में प्रवेश करता हूं। हम सभी सिविल डिफेंस के वालेंटियर्स अपने आप पर गर्व महसूस कर रहे हैं। हम अपनी जान के बारे में कुछ नहीं सोच रहे हैं। हमें अपने देश को बचाना है।

महीने भर से घर नहीं गई, फोन से अपने परिवार के संपर्क में रहती हूं – आशा

एलएनजेपी अस्पताल की नर्स आशा का कहना है कि हमें अभी 14 दिनों तक लगातार ड्यूटी करनी है। हमारी तीन शिफ्ट सुबह, शाम और रात की ड्यूटी है। सुबह और शाम की ड्यूटी 6-6 घंटे की है और रात की ड्यूटी 12 घंटे की है। इस तरह 14 दिन लगातार ड्यूटी करनी है और कोई अवकाश नहीं मिलेगा। इसके बाद 14 दिन क्वारंटाइन में रहना है। फिलहाल अभी हमें जो भी समय मिलता है, उसमें फोन या वीडियो काॅल करके परिवार के संपर्क में रहते हैं। वीडियो काॅल से ही बात हो पाती है। हमें अस्पताल में सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, हम अपने घर नहीं जा सकते है, क्योंकि हमारे परिवार को खतरा है। दिल्ली सरकार हमारे परिवार की सभी जरूरतों का ख्याल रख रही है। इसके लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी को धन्यवाद करना चाहती हूं। दिल्ली के लोगों से कहना चाहती हूं कि आप लोग अपने घर पर ही रहिए। सुरक्षित रहिए और हमारी मदद कीजिए। यह मत सोचिए कि आप घर पर हैं, तो आप पर बहुत बड़ा जुल्म हो रहा है। यह भी एक सौभग्य की बात है कि आप घर पर हैं और अपने परिवार को समय दें रहे हैं। आप हमसे पूछिए की घर पर रहना क्या होता है? महीने भर से हम लोग अपने घर नहीं गए हैं।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में जितना संभव हो सकता था, उतना सभी को सहूलियतें दीं – डा. अजीत जैन 

राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी हाॅस्पिटल के काॅर्डियक सर्जरी विभाग के प्रमुख डाॅ. अजीत जैन (52) का कहना है कि हम लोग पिछले दो महीने से अधिक हो गए, अस्पताल में ही हैं, घर नहीं गए। हम लोग अस्पताल में ही देखरेख करते हैं। रात के 2 से 3 बजे तक हम लोग होटल जाते हैं और अगले दिन सुबह 7-8 बजे तक तैयार होकर अस्पताल आ जाते हैं। होटल में जाने के बाद भी हम लोग फ्री नहीं होते हैं। वहां पर जाने के बाद भी लगातार फोन आते रहते हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी ने हम सभी के साथ बैठक की थीे। जब लाॅकडाउन था, सबकुछ बंद था और आने-जाने में समस्या हो सकती थी। उन्होंने दिल्ली में जितना संभव हो सकता था, उतना सभी को सहूलियतें दीं। हम सभी को अस्पताल से होटल और होटल से अस्पताल पहुंचाने के लिए परिवहन की सुविधा प्रदान की। लाॅकडाउन के दौरान हमारे किसी भी स्टाॅफ को कहीं पर भी आने-जाने में कोई दिक्कत नहीं हुईं। परिवार से फोन पर बात करते हैं। पत्नी को हमारी समस्या समझती है, क्योंकि वह भी एक डाॅक्टर हैं, लेकिन बच्चों को समझाना मुश्किल होता है। उनसे कुछ कहना भी बहुत कठिन होता है। फिर भी हम सब वापस जाॅब पर आते हैं। हम सोचते हैं कि देश भर में अभी आपदा की स्थिति है। हमारा मानना है कि एक बार जब हम इस पर जीत हासिल कर लेंगे, तो सभी चीजें अच्छी हो जाएंगी।

यह हैं दिल्ली के हीरो-

– कम्युनिटी किचन कूक

– सिविल डिफेंस वालेंटियर्स

– प्रिंसिपल और शिक्षक (राशन वितरण)

– पुलिस

– आशा वर्कर्स

– डाॅक्टर्स

– नर्स

– बस ड्राइवर्स, कंडक्टर्स, माॅर्शल्स

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