नई दिल्ली: दिल्ली के बवाना इलाके के हरेवली गाँव में 12 मुस्लिम परिवारों को जबरन धर्म परिवर्तन करवाने का मामला सामने आया है, आरोप है कि 5 मई को बवाना इलाके के हरेवली गाँव के 12 मुस्लिम परिवारों के लगभग 60 लोगों को गाँव के कुछ जाट दबंगों द्वारा हिंदू धर्म अपनाने के लिए बाध्य किया गया, गाँव का एक मुस्लिम युवक दिलशाद, तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल होने भोपाल गया था, वहां से लौटने के बाद गाँव के हिंदू जाट समुदाय के युवकों ने दिलशाद पर कोरोना फ़ैलाने का आरोप लगाकर बेरहमी से पीटा और उसपर दोबारा तबलीगी जमात में नहीं जाने के दबाव बनाया,

दा हिंद के चीफ एडिटर अब्दुल माजिद निजामी से बात करते हुए दिलशाद ने कहा जब गाँव के जाट लोग मुझे मार रहे थे तो मुझ से मुस्लिम धर्म छोड़ने को कह रहे थे, वो मुझे मारते हुए धमकी भी दे रहे थे कि अगर गाँव में रहना है तो हिन्दू धर्म अपनाना पड़ेगा, इस घटना के बाद आरोपी 5 मई को गाँव के 12 मुस्लिम परिवारों को जबरन मंदिर ले गए और उन्हें हिन्दू धर्म अपनाने के लिए दबाव बनाया, पीड़ित गुलाब कहते हैं कि हम लोगों को मंदिर में ले जाकर गंगा जल छिड़का गया और कहा गया कि अब तुम हिन्दू हो गए हो और हिन्दू बनकर ही रहोगे

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हरेवली गाँव के कुछ लोगों ने बताया कि दबंगों ने वाट्सएप्प पर इसकी प्लानिंग की और गाँव के लोगों को मंदिर में जमा होने की अपील भी की जिसके बाद मंदिर के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई, दबंगों ने फिर मुस्लिम परिवारों के लोगों को मंदिर बुलाया और जबरन धर्म परिवर्तन कराया, पीड़ित दिलशाद के पडोसी बलबीर, जिनपर हिन्दू धर्म अपनाने का दबाव बनाया गया, दबंगों ने जबरन मंदिर ले जाकर गौ मूत्र पिलाया और कहा कि आज से कोई भी मस्जिद नहीं जाएगा और मुर्दों को कब्रिस्तान में नहीं दफ्नाएगा, सभी को हिन्दुओं की तरह मुर्दे को शमशान ले जाकर जलाना है,

दिलशाद को मारने पीटने का वीडियो भी बनाया गया था और बाद में उसे सोशल मीडिया पर वायरल किया गया, आरोपी युवक अब दिलशाद पर पुलिस कम्प्लेन न करने का दबाव बना रहा है, नरेला के मोहम्मद अकरम जो एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और इस मामले को करीब से देख रहे हैं, इस गाँव में 12 मुस्लिम परिवार हैं जो पढ़े लिखे नहीं हैं, गाँव में कोई मस्जिद भी नहीं है इसलिए लोगों की इस्लामी तालीम नहीं हो सकी है, आज़ादी के बाद यहाँ जो मुसलमान रह गए थे वो अपना नाम हिन्दू जैसा ही रखने लगे,

अकरम ने कहा कि हालाँकि वो सभी मुसलमान ही हैं मगर उनके नाम हिन्दू नामों जैसे हैं, अब जब नई पीढ़ी इस्लाम समझ रही है और अपने नाम भी मुसलमानों जैसा रखने लगे हैं तो गाँव के कुछ दबंग जाटों को ये बात नागवार गुज़र रही, इसीलिए तबलीगी जमात के बहाने गाँव के 12 मुस्लिम परिवारों का जबरन धर्मांतरण करा रहे हैं, पिछले कुछ महीनों में हरियाणा के कई गांवों में मुसलमानों को हिंदू धर्म अपनाने के लिए मजबूर किए जाने का मामला सामने आया है, एक ग्रामीण ने बताया कि उन्होंने हिंदू जाटों द्वारा अत्याचार के डर से शुद्धिकरण का विरोध नहीं किया, उन्होंने कहा, मंदिर में सैकड़ों लोग जुटे और 12 मुस्लिम परिवारों में से प्रत्येक परिवार के बड़े सदस्यों को बुलाया गया और फिर उन्हें मंदिर चलने का दबाव बनाया गया, हम उनके डर से मंदिर तो चले गए लेकिन अपना धर्म नहीं छोड़ेंगे, हम मुसलमान थे और मुसलमान ही रहेंगे,

सामजिक कार्यकर्ता मोहम्मद अकरम ने बताया इस गाँव के सभी मुस्लिम परिवार रमज़ान में रोज़े रख रहे हैं, जितना इस्लाम को जानते हैं उसपर चलने की कोशिश कर रहे हैं, इस समय दबंगों से खुद को बचाना भी इनके लिए प्राथमिकता है, लॉकडाउन ख़त्म होने के बाद हम इस सम्बन्ध में शिकायत करेंगे, मीडिया के प्रोपगंडे और दक्षिणपंथी ताकतों के द्वारा फैलाई गई नफरत का असर दूर दराज़ के गांवों में भी पहुँच चुका है, कोरोना के प्रकोप के कारण तबलीगी जमात को कटघरे में खड़ा किया गया और मीडिया द्वारा ज़हर घोले जाने के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों से मुसलमानों पर हमले की ख़बरें आने लगीं,

कई शहरों में मुस्लिम सब्ज़ी वालों से, मुस्लिम फल बेचने वालों से और मुस्लिम पहचान वालों से अमानवीय बर्ताव किया गया और उनका आर्थिक बहिष्कार भी किया गया है, हालाँकि आर्थिक बहिष्कार से अब जबरन धर्मांतरण तक का मामला सामने आरहा है जो देश के क़ानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है

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