नई दिल्ली : व्हाट्सएप की नई प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर उठे विवाद के बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया कंपनी की नई निजता नीति को स्वीकार करना यूजर्स की इच्छा पर निर्भर है.

अगर कोई इसकी शर्तों और नियमों से सहमत नहीं है, तो वह इसका इस्तेमाल बंद करने का विकल्प चुन सकता है.

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याचिकाकर्ता ने व्हाइट्सएप की नई प्राइवेसी पॉलिसी को चुनौती दी थी, जो फरवरी में लागू होने वाली थी, हालांकि अब इसे मई तक के लिए टाल दिया गया है.

जस्टिस संजीव सचदेवा ने कहा, ‘‘यह एक निजी ऐप है,  इसे स्वीकार करना या नहीं करना स्वैच्छिक है, आप सहमत नहीं है तो किसी और ऐप का इस्तेमाल कीजिए.

HC ने कहा कि यदि मोबाइल ऐप की शर्तें एवं नियम पढ़ी जाएं, तो अधिकतर ऐप के बारे में यह जानकर हैरानी होगी कि आप किन बातों पर सहमति जता रहे हैं.

HC ने कहा कि यहां तक कि ‘गूगल मैप्स’ भी आपके सभी डेटा को एकत्र करता है, इस मामले पर चर्चा की आवश्यकता है, इसलिए इस मामले को 25 जनवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाता है.

सरकार ने भी इस पर सहमति जताई, व्हाट्सएप और फेसबुक की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी ने कोर्ट से कहा कि यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है और इसमें उठाए गए कई मुद्दों का कोई आधार ही नहीं है.

परिवार के सदस्यों एवं मित्रों के बीच निजी बातचीत कूट (गोपनीय) रहेगी, उसे व्हाट्सएप एकत्र नहीं कर सकता और नई नीति में भी यह स्थिति कायम रहेगी.

वकीलों ने कहा कि नीति में बदलाव से व्हाट्सएप पर कारोबारी बातचीत ही प्रभावित होगी, याचिका में कहा गया है कि नई प्राइवेसी पॉलिसी संविधान के तहत निजता के अधिकारों का हनन करती है.

व्हाट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी यूजर्स की ऑनलाइन गतिविधियों पर पूरी पहुंच की अनुमति देती है, इसमें सरकार की कोई निगरानी नहीं है.

नई नीति के तहत यूजर्स या तो इसे स्वीकार करता है या एप से बाहर हो जाता है, लेकिन वे अपने डेटा को फेसबुक के स्वामित्व वाले दूसरे मंच या किसी अन्य ऐप के साथ साझा नहीं करने का विकल्प नहीं चुन सकते हैं.

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