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डुसिब की जमीन कब्जा कर मकान बनाने के मामले में दिखाए फर्जी दस्तावेज, जय प्रकाश अपने पद से इस्तीफा दें : दुर्गेश पाठक

नई दिल्ली : दुर्गेश पाठक ने कहा कि भाजपा शासित नार्थ एमसीडी के महापौर ने डुसिब की जमीन कब्जा कर मकान बनाने के मामले में फर्जी दस्तावेज दिखाए हैं। हमारी मांग है कि वे अपने पद से तत्काल इस्तीफा दें।

जब तक महापौर जय प्रकाश अपने पद से इस्तीफा  नहीं दे देते हैं, तब तक भाजपा शासित नार्थ एमसीडी की किसी भी कार्यवाही में आम आदमी पार्टी भाग नहीं लेगी। उन्होंने इस मामले में कांग्रेस से भी साथ देने की मांग  करते हुए कहा, कांग्रेस अपना रुख साफ नहीं करती है, तो यही माना जाएगा कि भाजपा से उसकी सांठगांठ है।

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महापौर जय प्रकाश ने दावा किया है कि उन्होंने डूसिब की संपत्ति को अक्टूबर 2020 से किराए पर ली थी, जबकि मकान में मीटर फरवरी 2020 में लगा दिया गया था। अब बात नैतिकता की भी है, इसलिए अब देखना है कि दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता और संगठन सचिव सिद्धार्थन महापौर जय प्रकाश को लेकर क्या फैसला करते हैं?

दुर्गेश पाठक ने कहा कि नॉर्थ एमसीडी के भाजपा महापौर जिन्होंने कब्जे की जमीन पर मकान बनाया हुआ है उनसे संबंधित दस्तावेज कल हमने पेश किया था। कैसे उनका पूरा का पूरा मकान सरकारी जमीन यानि कि डुसिब की जमीन पर बना हुआ है।

हमने बताया कि जब ये मकान बनना शुरू हुआ तो वहां के स्थानीय एसएचओ ने शिकायत दर्ज की। इसके बाद लगभग 3 बार खुद डुसिब ने नोटिस भेजकर कहा कि यह जमीन उनकी है जिस पर उत्तरी नगर निगम के महापौर और उनके बेटे ने कब्जा किया है।

इसके बाद भारतीय जनता पार्टी के महापौर जयप्रकाश ने प्रेस वार्ता कर कई दस्तावेज दिखाए और कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है। उन्होंने जो दस्तावेज जारी किए  उनको मैंने अच्छे से पढ़ा और पढ़ने के बाद मैं उन्हीं दस्तावेजों को आपके सामने प्रस्तुत करने जा रहा हूं।

उत्तरी नगर निगम के महापौर जय प्रकाश जी द्वारा दिखाए गए दस्तावेजों को पेश करते हुए दुर्गेश पाठक ने कहा कि 10 जुलाई 2019 को सदर बाजार थाने के एसएचओ ने शिकायत दर्ज कर कहा कि जयप्रकाश के सुपुत्र डुसिब की जमीन पर अवैध निर्माण कर रहे हैं।

लगभग 6 महीने बाद 29 फरवरी 2020 को उसी मकान में रितेश के नाम पर मीटर लग गया। जबकि जय प्रकाश के अनुसार उन्होंने यह घर 9 अक्टूबर 2020 को किराए पर लिया। अगर उन्होंने यह घर अक्टूबर 2020 में किराए पर लिया तो उसका मीटर फरवरी में कैसे लग गया? महापौर अपने दस्तावेज पेश करते हुए ये भूल गए कि उनके मीटर की तारीख फरवरी 2020 की है और निर्माण लगभग 1 साल पहले से शुरू कर दिया था।

इस पर सवाल यह उठता है कि अगर इस घर का निर्माण 1 साल पहले शुरू हुआ तो आपने इसका किराया इतनी देर से भरना क्यों शुरू किया? अगर आपने घर अक्टूबर 2020 में किराए पर लिया तो इसका मीटर फरवरी 2020 में कैसे लग गया?

इससे साफ होता है कि यह सभी दस्तावेज फर्जी हैं। उनके अधिकार पत्र में लिखा है कि उन्होंने उस घर की दूसरी और तीसरी मंजिल को किराए पर लिया है लेकिन उनका बेटा पहली मंज़िल का किराया भर रहा है।

जब आपने किराए पर दूसरी और तीसरी मंजिल ली हुई है तो पहले माले का किराया क्यों भर रहे हैं? सब कुछ देखने के बाद साफ हो जाता है कि यह एक ओपन शट केस है। मुझे तो लगता है कि इनके सभी दस्तावेज फर्जी हैं।

जब उन्हें लगा कि वह इन सबके बीच फंस रहे हैं तो कैसे भी करके फर्जी दस्तावेज तैयार कर लिए और जल्दबाजी में उनमें भी अपने झूठ छिपाना भूल गए।

दुर्गेश पाठक ने कहा कि मेरा प्रश्न भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व से है। मैं कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सुन रहा था। भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की कल पुण्यतिथि थी।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक किस्सा सुनाया और बताया कि जब पार्टी के पास संगठन के कामों के लिए पैसे नहीं होते थे तो पंडित दीनदयाल उपाध्याय किस तरह से पूरे देश में घूमा करते थे। रेलवे स्टेशन के शौचालय के पास चादर बिछा कर लेटा करते थे। वे इस प्रकार संगठन का काम संभाला करते थे।

मैं सोच रहा था कि यदि पंडित दीनदयाल उपाध्याय आज जीवित होते और यह दस्तावेज उनके हाथ लगते तो उनका सर शर्म से झुक जाता कि जिस पार्टी के लिए उन्होंने इतनी मेहनत की, संगठन के लिए इतना काम किया उसे आज की भाजपा मिट्टी में मिला रही है। मैं भी संगठन में काम करता हूं इसलिए उसमें किए गए त्याग और पीड़ा को मैं भलीभांति समझता हूं।

मेरा प्रश्न भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष आदेश गुप्ता और उनके यहां संगठन का काम देखने वाले सिद्धार्थन से है। मेरा प्रश्न भाजपा के दोनों लीडर से है कि अब इन फर्जी दस्तावेजों पर आपको क्या कहना है?

यह प्रश्न वैध-अवैध का नहीं रहा बल्कि अब प्रश्न नैतिकता का है। भारतीय जनता पार्टी इस मामले में लीगली तो हार चुकी है इसलिए अब मामला नैतिकता का बचता है। अब देखना यह होगा कि आदेश गुप्ता और सिद्धार्थन को नैतिक रूप से इस पर क्या कहना है। उनके महापौर साहब ने सरकारी जमीन पर कब्जा किया है।

एक महापौर को राज्य का प्रथम नागरिक समझा जाता है उसके पद की तुलना भगवान के स्थान के साथ की जाती है। अब जब इस पर दाग लग चुका है तो यह देखना होगा कि आदेश गुप्ता  और सिद्धार्थन इस पर क्या कदम उठाते हैं क्योंकि अब यह सारा का सारा मामला उनके ऊपर है।

दुर्गेश पाठक ने कहा कि चूंकि प्रश्न अब नैतिकता का है आम आदमी पार्टी ने यह तय किया है कि जब तक महापौर जयप्रकाश जी कुर्सी पर बनेंगे रहेंगे आम आदमी पार्टी के पार्षद उत्तरी एमसीडी की किसी भी कार्यवाही में भाग नहीं लेंगे।

हम ऐसे किसी भी अनैतिक व्यक्ति के साथ मिलकर काम नहीं कर सकते हैं। मैं आशा करता हूं कि कांग्रेस पार्टी भी इस पर अपना रुख साफ करें। अगर कांग्रेस पार्टी एमसीडी के साथ मिलकर काम करती है तो यह माना जाएगा कि भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने मिलकर आपस में गठबंधन कर लिया है।

सोम दत्त ने कहा कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम के वार्ड नंबर 80 जहां से महापौर जयप्रकाश, खुद पार्षद चुनकर आए हैं। यह प्रॉपर्टी नंबर 3231 बहादुरगढ़ रोड आजाद मार्केट गली की प्रॉपर्टी है जो कि डुसिब की ज़मीन है।

इसको अवैध तरीके से हथिया लिया गया। अवैध रूप से इस पर चार माले तैयार कर लिए गए। इनके राजनीतिक दबाव में ना तो पुलिस द्वारा और ना ही एमसीडी द्वारा कोई कार्रवाई की गई। हमने पहले भी और आज भी इससे संबंधित सभी दस्तावेज आपके सामने पेश किए। इन कागजों में जिस तरह से लीपा-पोती की गई है।

 इनके कागज कुछ बोल रहे हैं और महापौर कुछ बयान दे रहे हैं। यह सारी की सारी चीजें आपके सामने हैं। जनता के माध्यम से महापौर से मेरी मांग है कि वे अपने इस पूरे गड़बड़झाले की जिम्मेदारी स्वीकार करें और भाजपा द्वारा इनसे त्यागपत्र लिया जाए।

आम आदमी पार्टी से उत्तरी नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष विकास गोयल ने कहा कि एक सच्ची कहावत है कि झूठ के पांव नहीं होते। जब महापौर की पोल खुली तो वे अफरा-तफरी में न जाने कहां से दस्तावेज लेकर आए और जल्दबाजी में प्रेस वार्ता की।

जब वे प्रेस वार्ता कर रहे थे तो मैं उन्हें देख रहा था। उनके चेहरे से ही पता लग रहा था कि वे कितने घबराए हुए हैं जैसे उनकी पोल खुल गई हो। उन्होंने प्रेस वार्ता में तीनों नोटिसों का कोई जवाब नहीं दिया।

उन्होंने यह भी नहीं बताया कि एसएचओ ने एमसीडी को चिट्ठी लिखी। डुसिब ने एमसीडी को चिट्ठी लिखी और एमसीडी ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की, उन्होंने ये भी नहीं बताया। साफ है कि महापौर की चोरी पकड़ी जा चुकी है।

जिससे बचने के लिए उन्हें कोई बहाना भी नहीं मिल रहा है। अभी तक एमसीडी में लेंटर, दवाई घोटाला सहित अन्य घोटाले हो जाते थे लेकिन महापौर ने तो हद ही कर दी। उन्होंने सरकारी ज़मीन पर ही कब्ज़ा कर लिया। उत्तरी दिल्ली नगर निगम का पार्षद होने के नाते मैं कहना चाहता हूं कि आज हाउस है।

हम मांग रखेंगे कि महापौर जय प्रकाश को पवित्र कुर्सी से को तुरंत हटाया जाए। तभी हाउस चलेगा वर्ना आम आदमी पार्टी इस हाउस में हिस्सा नहीं लेगी। हम कांग्रेस से भी उम्मीद रखते हैं कि वह भी इसमें हमारा साथ दें।

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