नई दिल्ली: लॉकडाउन के कारण कोटा राजस्थान में विभिन्न संस्थानों में पढ़ने वाले दिल्ली के सैकडों छात्र फंस गए। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निर्देश पर इन छात्रों को दिल्ली में उनके माता-पिता के पास वापस लाने की परिवहन मंत्रालय ने योजना बनाई। दिल्ली सरकार ने कोटा, राजस्थान से अपने छात्रों को वापस लाने के लिए 1 मई को 40 बसें भेजीं। दोपहर 2 बजे के आसपास ये बसें कोटा पहुंचीं, जहां इनकी उचित देखभाल की गई। रात 8 बजे 480 छात्रों ने दिल्ली से कोटा की ओर यात्रा शुरू की और रविवार सुबह ISBT कश्मीरी गेट पहुँचे।

दिल्ली सरकार की ओर से 813 छात्रों को लाने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन 480 छात्र ही दिल्ली से थे, उन्हें वापस लाया गया। शेष छात्र अन्य स्थानों से से बताए गए।  ISBT कश्मीरी गेट पर दिल्ली के जिलों के लिए 11 काउंटर बनाए गए थे, जहां प्रत्येक छात्र को COVID-19 के लिए 11 अलग-अलग मेडिकल टीमों द्वारा एक डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाँफ ने उचित जांच की। इसके अलावा, हर जिलेवार काउंटर के सामने, 6 फीट की दूरी पर 100 सर्कल बनाए गए थे ताकि स्क्रीनिंग के दौरान सामाजिक दूरियों के मानदंडों का ठीक से पालन किया जा सके। मेडिकल स्क्रीनिंग के बाद, प्रत्येक छात्र को अपने विशिष्ट मार्ग के लिए समर्पित डीटीसी बस नंबर को इंगित करते हुए एक कूपन दिया गया था।

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माता-पिता को आईएसबीटी में नहीं आने के लिए कहा गया था क्योंकि सरकार ने डीटीसी बसों के माध्यम से उचित व्यवस्था की ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रत्येक छात्र अपने-अपने घरों तक सुरक्षित पहुंच जाए। छात्रों के आने से पहले, वहां मौजूद हर डीटीसी बस के साथ आईएसबीटी कश्मीरी गेट के पूरे परिसर को सेनेटाइज कर दिया गया था। दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत व्यक्तिगत रूप से इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि हम कोटा से अपने सभी छात्रों को सुरक्षित वापस ले आए। मैं उन सभी छात्रों से अनुरोध करना चाहूंगा कि वो अपने घर कज सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 14 दिनों के लिए होम क्वारंटाइन में रहें।

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