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लॉकडाउन: मोदी जी कोरोना के खिलाफ लड़ाई में केरल से सीखा जा सकता है?

जेपी सिंह 

कोरोना वायरस के संक्रमण पर नियन्त्रण में माकपा नीत केरल अन्य सभी राज्यों से आगे निकलता नजर आ रहा है। केरल में रिकवरी दर सबसे अधिक है। केरल में कुल 314 लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं, जबकि सिर्फ 2 लोगों की मौत हुई है। अगर शुरुआती 25 मरीजों की बात करें जो 9 मार्च से 20 मार्च के बीच मिले थे, तो केरल में रिकवरी दर 84 फीसदी है, जो बाकी सभी राज्यों से अच्छी है। केरल में कोरोना संक्रमण से एक हजार मौतों की आशंका थी। लेकिन राज्य सरकार ने जिस तेजी से काम किया उसका परिणाम सामने आने लगा है। 16 मार्च को ही केरल ने ‘ब्रेक द चेन’  मुहिम शुरू कर दी। जनवरी महीने मे ही अस्पतालों मे आइसोलेशन वार्ड बनाने शुरू कर दिए। केरल के लोग 124 देशों में काम करते हैं लेकिन तब भी वहाँ की सरकार ने खोज-खोज के टेस्ट किए। एक कोरोना संक्रमित की मौत हुई तो मंत्री खुद उस गांव गए और लोगों को समझाया। सबसे शिक्षित राज्य है तो उसे उम्मीदों पर खरा उतरना ही था।

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देश भर में कोरोना वायरस से अब तक करीब 4250 लोग संक्रमित हो चुके हैं और 124 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे खराब हालत महाराष्ट्र की है, जहां पर 690 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं और 45 लोगों की मौत हो चुकी है। संक्रमण के मामले में 571 केस के साथ दूसरे नंबर पर तमिलनाडु है और तीसरे नंबर पर 503 मामलों वाली राजधानी दिल्ली। कोरोना वायरस के संक्रमण से केरल में कुल 314 लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं, जबकि सिर्फ 2 लोगों की मौत हुई है। अगर शुरुआती 25 मरीजों की बात करें जो 9 मार्च से 20 मार्च के बीच मिले थे, तो केरल में रिकवरी दर 84 फीसदी है, जो बाकी सभी राज्यों से अच्छी है। अब तक कुल 55 लोग ठीक होकर घर जा चुके हैं। समय रहते सही कदम उठाने के कारण अब तक केरल की रिकवरी दर 17 फीसदी है, जो काफी अच्छी है। शनिवार तक के आंकड़ों के मुताबिक केरल ने कोविड-19 की टेस्टिंग के लिए 9744 सैंपल जमा किए हैं, जो राजस्थान के बाद सबसे अधिक सैंपल लेने वाला दूसरा राज्य है।

कोरोना वायरस का संक्रमण सबसे अधिक महाराष्ट्र में फैला है और उसके बाद तमिलनाडु और दिल्ली का नंबर आता है। महाराष्ट्र में अब तक 690 लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें से 45 की मौत हो गई है और 42 लोग सही होकर घर गए हैं। यानी महाराष्ट्र की रिकवरी दर करीब 6.08 फीसदी है। आंध्र प्रदेश अभी तक रिकवरी के मामले में फिसड्डी है, जहां 226 लोगों में संक्रमण फैल चुका है, लेकिन अब तक सिर्फ 1 ही शख्स सही होकर घर लौटा है। यानी यहां पर रिकवरी दर सिर्फ 0.44 फीसदी है। हालांकि, यहां मरने वालों की संख्या भी बहुत ही कम है। अब तक सिर्फ 3 लोगों की मौत हुई है। तमिलनाडु में अब तक 571 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 5 लोगों की मौत हो चुकी है और 8 लोग सही होकर घर गए हैं। यहां पर रिकवरी दर करीब 1.40 है। दिल्ली में अब तक 503 मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें से 7 लोगों की मौत हो गई है और 18 लोग सही होकर घर गए हैं। दिल्ली में रिकवरी दर करीब 3.57 फीसदी है।

निपाह और जीका जैसे वायरस से निपटने के बाद कोरोना से जंग में भी केरल ने संक्रमण की दर पर तेजी से काबू पाया है। केरल सरकार ने पहला मामला आने से पहले ही 26 जनवरी को कोरोना से निपटने के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित कर लिया था। क्वारंटाइन से लेकर आइसोलेशन और कांटैक्ट खोजने के काम के लिए 18 समितियों का गठन कर दिया था। देश में पहला मामला 30 जनवरी को केरल में आया और एक-एक करके कुल तीन हो गए। ये तीनों ही फरवरी में स्वस्थ हो गए। इसके बावजूद केरल सरकार ने सतर्कता में कमी नहीं आने दी। जांच में भी केरल आगे है। पूरे देश में शुक्रवार तक 66 हजार जांच हुई। इसमें से 10 हजार जांच अकेले केरल में हुई है। वहीं केरल पुणे की एक निजी से लैब से रैपिड-पीसीआर किट खरीदने वाला देश का पहला राज्य है।

साबुन से हाथ धोने की आदत डालने के लिए केरल सरकार ने ‘ब्रेक द चेन’ की शुरुआत की। इसमें लोगों को दिन में कई बार साबुन से हाथ धोने को कहा गया। सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर वॉश बेसिन लगवाए। केरल के सभी हवाईअड्डों को जिला अस्पतालों की आपातकालीन कार्य सेना से जोड़ा गया है। किसी भी यात्री को बुखार या कोरोना के लक्षण दिखने पर उसे तुरंत हवाईअड्डे से अस्पताल भेज दिया जाता है। केरल में ब्लड बैंक में वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए रक्त दान करने वालों की कई बार स्क्रीनिंग की जा रही है। सभी जिला प्रशासन को विदेश से लौटे लोगों के रक्त दान पर रोक लगाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। सड़क मार्ग से राज्य में आने वाले लोगों की जांच के लिए डॉक्टर को तैनात किया गया है । यात्रियों के शरीर के तापमान को जांचने के साथ ही उन्हें वायरस को रोकने के उपायों के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है।

गौरतलब है कि जनवरी के पहले हफ्ते में चीन ने जैसे ही डब्ल्यूएचओ को न्यूमोनिया से मिलते-जुलते संक्रमण के तेजी से फैलने की जानकारी दी, केरल सरकार ने अपने सभी स्वास्थ्य कर्मियों को अलर्ट कर दिया। चारों हवाईअड्डों पर स्क्रीनिंग शुरू हो गई। संदिग्धों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के लिए एंबुलेंस और चिकित्सकीय दलों की तैनाती कर दी गई। चीन से लौटने वाले यात्रियों को विशेष निगरानी में रखा जाने लगा। विशेषज्ञ रोजाना उनकी सेहत की रिपोर्ट तैयार करने लगे। देश में कोरोना के वायरस कोविड 19 को लेकर यदि सबसे ज्यादा सतर्कता कहीं बरती जा रही है तो वह है केरल। दरअसल केरल से वुहान जाने आने वालों की संख्या काफी है और इसी के चलते तीन मामले सामने भी आए। इनके सामने आते ही केरल सरकार ने इसे आपात स्थिति मानते हुए हर अस्पताल में हो रहे टेस्ट, इलाज और अन्य विवरणों पर कड़ी नजर रखना शुरू की।

केरल में सभी स्वास्थ्य संस्थानों, मसलन लैब, क्लीनिक, निजी अस्पताल आदि को प्रोटोकॉल का पालन करने का सख्त निर्देश दिया गया। पुलिस के श्वास परीक्षण सहित अन्य जांच करने पर रोक लगा दी गई। घरों और आइसोलेशन वॉर्ड में पृथक रखे गए लोगों की काउंसिलिंग के लिए मनोवैज्ञानिकों की टीम तैयार की गई।जो लोग कोरोना से संक्रमित तीनों मरीजों के संपर्क में आए थे, उन्हें 28 दिनों तक अलग-थलग रखा गया, जबकि डब्ल्यूएचओ ने महज 14 दिनों की पृथक अवधि सुझाई थी। अलग-थलग रखे गए लोगों की सेहत और जरूरतों का पूरा ख्याल रखा गया।

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