ध्रुव गुप्त

ओली दास करे सब काजा।
हृदय राखि बीजिंगपुर राजा।।
प्रिय भारतवासियों, तपाई सबैलाई अभिवादन छ ! मुझे लेकर आपकी मीडिया पिछले कुछ दिनों से बहुत जहर उगल रही है। आज मैं आपको सच बताने आया हूं कि आपके रामलला को हम अयोध्या से उठाकर नेपाल में क्यों ले आना चाहते हैं। पिंग प्रभु की आज्ञा है कि नेपाल के बाद आपके भारत में भी कम्युनिस्ट विचारधारा का प्रसार हो। आप भारत के दक्षिणपंथी लोग इसे आसानी से स्वीकार करेंगे नहीं, इसीलिए हम आपके राम जी का सहारा ले रहे हैं। जनक महाराज, सीता जी और बाल्मीकि बाबा तो पहले से नेपाली हैं। लव कुश भी यहीं पैदा और बड़े हुए। अब रामजी को नेपाली साबित करने के लिए हम उनके सर पर जटा की जगह नेपाली टोपी लगाएंगे और हाथ में धनुष की जगह खुखरी थमा देंगे।

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यह साबित करेंगे कि असली अयोध्या नेपाल के बीरगंज के पास कहीं है। चित्रकूट नेपाल का वर्तमान चितवन है। दंडकारण्य नेपाल की सीमा पर भारत का चंपारण्य है जिसे अब चंपारण कहते है। हनुमान की किष्किंधा नेपाल सीमा पर गंडक नदी के इस पार चंपारण के वर्तमान बाल्मीकि टाइगर प्रोजेक्ट का जंगल है। आज भी वहां के जंगल में बंदरों की कई प्रजातियां बहुतायत से पाई जाती हैं। रावण की लंका वस्तुतः समुद्र के पार श्रीलंका में नहीं, बल्कि नेपाल-भारत की सीमा पर गंडक नदी के पार आपके उत्तर प्रदेश में है। गंडक के उस पार पद रावणा नाम का एक शहर भी था जिसे अब लोग पडरौना कहने लगे हैं। पाकिस्तान की आई.एस.आई की मदद से हम और भी कुछ प्रमाण जुटा रहे हैं। उसके बाद जल्द ही हम चीन की मदद से बीरगंज में दुनिया का सबसे बड़ा राम मंदिर बनाएंगे। यहां भारतीयों की भीड़ लगेगी, लेकिन हम उन्हीं भारतीयों को मंदिर में प्रवेश देंगे जो कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्यता का टिकट लेकर यहां आएंगे।

आज तक दुनिया में क्रांतियों के रास्ते कम्युनिज्म आते आपने देखा होगा। हम नेपाली भारत में धर्म के रास्ते कम्युनिज्म लाकर नई मिसाल क़ायम करेंगे। आप साथ दीजिए ! तपाईं को प्रार्थना समर्थन गर्दछ !

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