नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एक बयान जारी कर कहा कि पूरे देश भर में कोरोना एक महामारी के तौर पर फैल रहा है और अभी तक हमारे पास प्रमाणिक तौर पर डाटा है, उसके मुताबिक अभी तक तीन लाख से अधिक लोग इसके शिकार हो चुके हैं, लेकिन कोराना और भी कितने लोगों को हो चुका है, यह किसी को जानकारी नहीं है। इस समय सबसे ज्यादा जरूरी है कि जांच को बढ़ाया जाए। अधिक से अधिक जांच हो, लेकिन उसके लिए आईसीएमआर की गाइड लाइन की जो बाध्यता है, उस बाध्यता को खत्म किया जाना चाहिए। अगर किसी को हार्ट, कीडनी, लीवर समेत कोई भी बीमारी है, उसके लिए वह सीधे जाकर जांच करा लेता है। महीने, तीन या चार महीने में लोग अपना नियमित जांच कराते हैं। इस टेस्ट को कराने के लिए इतने प्रकार के नियम, कानून और बांध्यताएं क्यों है? बीमारी का सरकारीकरण बंद होना चाहिए। 

सांसद संजय सिंह ने कहा कि मैने आज केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डाॅ. हर्ष वर्धन जी को पत्र भी लिखा है। जिसमें मांग की गई है कि आईसीएमआर की गाइड लाइन को बदला जाए। कोई भी व्यक्ति, जिसको आशंका है कि उसको कोरोना हो सकता है या उसको बुखार व खांसी है, उसे किसी भी तरह की परेशानी महसूस हो सकती है, तो वह पैथोलाॅजी में जाकर जांच कराए। पूरे देश में अधिक से अधिक पैथोलाॅजी को लाइसेंस दीजिए और सभी राज्यों को अधिक से अधिक टेस्टिंग किट उपलब्ध कराइएं। वरना हम आग के गोले पर बैठ कर विस्फोट होने का इंतजार कर रहे हैं। क्योंकि देश भर में कितने लोगों को कोरोना हो चुका है, यह तो पता चले। अगर लोगों को पता चलेगा, तो वे अपने आप को आइसोलेशन में रखेंगे, होम क्वारंटीन सेंटर में रखेंगे या जरूरत पड़ेगी, तो अस्पताल में जाएंगे। यदि किसी को पता ही नहीं चलेगा कि उसको क्या बीमारी है, तो मुझे लगता है कि हम शांति से आग के गोले पर बैठे हुए और आने वाले दिनों के अंदर इसका विस्फोट बहुत भयानक तरीके से होगा। इसलिए मैने केंद्र सरकार और स्वास्थ्य मंत्री से निवेदन किया है कि वे आईसीएमआर की गाइड लाइन को बदलें। जिस तरह कोई भी व्यक्ति दूसरी बीमारियों टीबी, हाॅर्ट, लीवर व किडनी आदि का टेस्ट करा सकता है, उसी तरह कोरोना की जांच को भी सबके लिए खोल दिया जाए। लोग जाकर अपनी जांच कराएं और वे जानें कि वे निगेटिव हैं या पाॅजिटिव हैं। यदि संक्रमण है, तो वे सावधानी बरतें। उसे होम आइसोलेशन में रखें या क्वारंटीन सेंटर में रखें या अस्पताल में रखें, जैसा मरीज को जरूरत है। अगर उनको निगेटिव है, तो वे निश्चिंत होकर रह सकते हैं। लेकिन यह असमंजस की स्थिति खत्म होनी चाहिए। 

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सांसद संजय सिंह ने कहा कि मैं किसी की आलोचना और निंदा में नहीं जाना चाहता हूं, लेकिन यदि जांच होगी ही नहीं, तो पता कैसे चलेगा कि कितने लोग बीमार हैं और कितने लोग बीमार नहीं हैं। आज की तारीख में अपनी तरफ से आंकड़ेबाजी लगाई जा रही है। कहा जा रहा है कि दिल्ली में कोरोना बढ़ गया है। दिल्ली में इसलिए बढ़ गया, क्योंकि दिल्ली में जांच अधिक हो रही है। दिल्ली में प्रति मिलियन हम 12 हज़ार से ज्यादा लोगों की जांच कर रहे हैं। उसके बावजूद यह कहा जा रहा है कि हम कम जांच कर रहे हैं, तो यह विवाद ही खत्म किया जाए। आईसीएमआर की गाइड लाइन बदली जाए और उसमें कहा जाए कि किसी भी व्यक्ति, जिसको जरा सा भी शंका है, वह स्वतंत्र है और पैथालाॅजी में जाकर जांच करा सकता है। केंद्र सरकार सभी लैब को लाइसेंस और राज्यों को टेस्टिंग किट दे दे। जब तक लोगों को पता नहीं चलेगा कि उनको संक्रमण है या नहीं है, वो उनको इस बीमारी से बचने के लिए जो सावधानी, चिकित्सीय सुविधा या डाॅक्टर की मदद चाहिए, वो नहीं लेंगे। फिर इससे मृत्यु के आंकड़े भी बढ़ेंगे और आने वाले दिनों में स्थितियां और भयावह होंगी।

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