नई दिल्ली : राकेश टिकैत ने झलवा में संवाददाताओं से कहा नवंबर-दिसंबर तक इस आंदोलन के चलने की उम्मीद है, टिकैत ने बताया दिल्ली से सरकार के लोग पश्चिम बंगाल में किसानों से एक मुट्ठी अनाज मांग रहे हैं.

हमने किसानों से कहा कि जब वे चावल दें तो अनाज मांगने वालों से कहें कि वे इस पर एमएसपी भी तय करवा दें और 1850 रुपये का भाव दिला दें.

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टिकैत ने कहा कल हम बंगाल में थे, पूरे देश में जा रहे हैं, हम किसानों से एमएसपी का कानून बनवाने की मांग करने के लिए कह रहे हैं, अभी बिहार में धान 700-900 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदा गया, हमारी मांग है कि एमएसपी का कानून बने और इससे नीचे पर खरीद ना हो.

टिकैत ने कहा हम दिल्ली में ही रहेंगे, पूरे देश में हमारी बैठकें चल रही हैं, हम 14-15 मार्च को मध्य प्रदेश में रहेंगे फिर 17 मार्च को गंगानगर में और 18 तारीख को फिर गाजीपुर बार्डर चले जाएंगे, इसके बाद 19 को ओडिशा में रहेंगे और 21-22 को कर्नाटक में रहेंगे.

टिकैत ने कहा कि नए कानून से छोटे दुकानदार खत्म हो जाएंगे, केवल दो मॉल रहेंगे, व्यापारी वर्ग खत्म होगा, लघु उद्योग खत्म हो जाएंगे, वालमार्ट जैसी कंपनियों के आने से साप्ताहिक बाजार खत्म हो जाएंगे.

टिकैत ने कहा यदि सरकार किसी पार्टी की होती तो वह बातचीत कर लेती, लेकिन इस सरकार को तो बड़ी कंपनियां चला रही हैं, इन्होंने पूरा देश बेच दिया, बैंकिंग क्षेत्र, एलआईसी, हवाई अड्डे, देश का सबकुछ बिक गया, अगर जनता पंखे और एसी में सोती रही तो देश बिक जाएगा.

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