नई दिल्लीः देश की आज़ादी में महत्तवपूर्ण भूमिका निभाने वाली जमीयत उलमा ए हिन्द देश के मौजूदा हालात, और देश में बढ़ती सांप्रदायिकता को लेकर दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में अमन एकता सम्मेलन आयोजित किया। इस सम्मेलन में मुस्लिम समाज के उलमाओ ने तो शिरकत की ही साथ ही हिन्दू, सिख, ईसाई, जैन और बोद्ध समाज के धर्म गुरुओ ने भी शिरकत की। हिन्दू समाज की तरफ से इस सम्मेलन में शिरकत करने वाले स्वामी स्वामी चिदानंद ने कहा कि अब समय है कि मुस्लिम समाज शर्म से नहीं, शिकवों से नहीं बल्कि हक़ से कहें कि यह मुल्क हमारा है।

स्वामी स्वामी चिदानंद ने कहा कि जब मैं इस सम्मेलन में शिरकत करने के लिये आया तो मैंने देखा कि सड़क के चारों ओर जाम था, जमीयत उलमा ए हिन्द के लोगों के एक हाथ में तिरंगा झंडा था तो दूसरे हाथ में जमीयत का परचम था, सड़कें जाम हो सकतीं हैं, लेकिन दिलो को जाम नहीं होना चाहिये। उन्होंने कहा कि आज जमीयत उलमा ए हिन्द ने आकर यह संदेश दिया है कि  हम दिल्ली में दिल्ली में दिलों को विशाल करने आए हैं, दिलों को जाम करने के लिये नहीं।

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उन्होंने कहा कि जमीयत उलमा ए हिन्द दिलों को जोड़ने दिलों को विशाल करने का काम कर रही है। स्वामी स्वामी चिदानंद ने कहा कि संसद में बिल पास होते हैं, बिल पास होते रहेंगे लेकिन केवल बिल पास होने से ही बहुत कुछ चीज़ें नहीं बदलतीं हमें अपने दिलों को बदलना होगा, वहां संसद बिल बनाएं हम दिल बनाएं इसी से यह देश बदलेगा।

स्वामी स्वामी चिदानंद ने मुसलमानों की तरफ से कहा कि कूड़े डालने वाले कूड़ा डालेंगे लेकिन तो हम रास्ता बदलेंगे, न आस्था बदलेंगे। उन्होंने कहा कि बीते सो साल में जमीयत उलमा ए हिन्द ने कठिन से कठिन परिस्थिती में  गालियां खाकर लोगों को गले लगया है। उन्होंने कहा कि लोगों के दिलों तक पहुंचना आसान नही है लेकिन जमीयत उलमा ए हिन्द ये सब कर दिखाया। स्वामी स्वामी चिदानंद ने कहा कि मैं इस देश के मुसलमानों से कहना चाहता हूं कि वे शर्म से नहीं शिकवे से नहीं, शिकायतों से नहीं बल्कि हक़ से कहें कि यह वतन हमारा है।

उन्होंने कहा कि इस्लाम शान्ति और अमन का पैग़ाम देता है, धनवान वह नही है जिसकी तिजौरियों में धन भरा हो धनवान वह है जिसके हृदय में इंसानियत ज़िंदा हो, उन्होंने कहा कि हमें यह सबूत देना है कि फैसले कुछ भी हों लेकिन फासले नहीं आएंगे।

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