नई दिल्ली : दुर्गेश पाठक ने कहा कि भाजपा शासित नगर निगम के पास कर्मचारियों को वेतन देने के लिए रुपए नहीं हैं। ऐसे में  अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन देने के लिए पैसा कहां से आया है?

भाजपा सीबीआई जांच से बचने के लिए नगर निगम को टैक्स में मिले जनता के पैसे का दुरुपयोग कर अखबारों में विज्ञापन छपवा रही है। नगर निगम के कर्मचारियों के घर में आज भुखमरी के हालात पैदा हो गए हैं। लोग अपने बच्चों के स्कूल तक की फीस तक नहीं दे पा रहे हैं।

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भारतीय जनता पार्टी ने पूरी दिल्ली में जगह-जगह होर्डिंग और पोस्टर लगाकर भ्रष्टाचार को छुपाने की एक नाकाम कोशिश की है, हालांकि इन करोड़ों रुपयों का सही इस्तेमाल कर कर्मचारियों को समय पर वेतन दिया जा सकता था।

दुर्गेश पाठक ने कहा कि, यदि भाजपा शासित नगर निगम के पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं तो अखबारों में इतने बड़े-बड़े विज्ञापन देने के लिए पैसा कहां से आया?

भाजपा शासित एमसीडी का असली चाल-चरित्र जनता के सामने आ गया है और भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ हो गया है।

अब भाजपा सीबीआई जांच से बचने के लिए नगर निगम को टैक्स के रूप में दिए गए जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे का दुरुपयोग कर जनता में भ्रामक स्थिति पैदा करने के लिए इस प्रकार के विज्ञापन अखबारों के माध्यम से जनता के बीच में प्रस्तुत कर रही है।

दुर्गेश पाठक ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने पिछले 15 साल के अपने शासनकाल में दिल्ली नगर निगम के भीतर इतना भ्रष्टाचार किया है कि, आज दिल्ली नगर निगम कंगाल हो चुका है।

नगर निगम के अधीन काम करने वाले अध्यापक, डॉक्टर, नर्स, सफाई कर्मचारी आदि अपनी मेहनत की कमाई, वेतन लेने के लिए विरोध प्रदर्शन और आंदोलन कर रहे हैं। कर्मचारियों को भूख हड़ताल तक करनी पड़ रही है। भाजपा शासित नगर निगम के अधीन कार्यरत तमाम विभाग के कर्मचारियों के घर में आज भुखमरी के हालात पैदा हो गए हैं। लोग अपने बच्चों के स्कूल की फीस तक नहीं दे पा रहे हैं।

दोस्तों-रिश्तेदारों से कर्जा ले लेकर अपने घर का खर्च चला रहे हैं। आज दिल्ली में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं जिसकी वजह से ढेरों बीमारियां पैदा हो रही हैं। दिल्ली की जनता ऐसी तमाम समस्याओं से जूझ रही है लेकिन भारतीय जनता पार्टी को लाखों कर्मचारियों और दिल्ली के 2 करोड़ लोगों की परेशानियों से कोई सरोकार नहीं है। उन्हें तो केवल और केवल अपनी गंदी राजनीति को चमकाना है।

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने पूरी दिल्ली में जगह-जगह होर्डिंग और पोस्टर लगाकर अपने भ्रष्टाचार को छुपाने की एक नाकाम कोशिश की है। पूरी दिल्ली में जगह-जगह पेड पोल्स पर करोड़ों रुपया खर्च करके भारतीय जनता पार्टी ने विज्ञापन लगवाए हैं।

यदि इन करोड़ों रुपए का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाता तो भाजपा शासित नगर निगम के अधीन काम करने वाले तमाम अध्यापकों, डॉक्टरों, सफाई कर्मचारियों और अन्य सभी विभाग के कर्मचारियों को उनका वेतन समय पर दिया जा सकता था।

 यदि भारतीय जनता पार्टी यह गंदी राजनीति करने के बजाए इन करोड़ों रुपए से अपने कर्मचारियों का वेतन दे देती तो शायद भाजपा शासित स्कूलों के अध्यापकों को आत्महत्या करने के लिए राष्ट्रपति जी से अनुमति नहीं मांगनी पड़ती।

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