नई दिल्ली : मध्य प्रदेश भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रांतीय उपाध्यक्ष द्वारा शायर राहत इंदौरी के निधन के बाद किए गए एक बेतुके ट्वीट को लेकर सोशल मीडिया पर बवाल मचा हुआ है। राहत साहब के प्रशंसक और प्रेमी, नेता के साथ पूरी बीजेपी एवं उससे जुड़े संगठनों को घेर रहे हैं। अंशुल तिवारी ने राहत साहब के निधन के बाद एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में अंशुल ने लिखा, ‘मसजिदें कबूल थीं, बस मंदिर खटक गए, भूमि पूजन से आहत, राहत सटक गए।’अंशुल के ट्वीट पर मंत्री जीतू पटवारी ने मीडिया से कहा, ‘यह ओछी और छोटी मानसिकता का परिचायक है। राहत साहब मोहब्बत का पैगाम और देशभक्ति का नाम थे। देश की थाथी थे। राजनीतिक लोगों पर लगने वाले आरोप-प्रत्यारोप पर तो बात हो सकती है, लेकिन साहित्यकार, लेखक और शायरों के लिए इस तरह की भावना रखना अपने आप में एक तरह से संविधान को चुनौती देने जैसा है.

बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष अंशुल तिवारी ने ट्वीट कर लिखा कि, “मस्जिदें कबूल थीं, बस मंदिर खटक गए, भूमिपूजन से आहत, राहत सटक गए”. तिवारी का ये ट्वीट करने की देर थी कि राहत इंदौरी को लेकर भद्दे भद्दे कमेंट शुरू हो गए. ट्रोल आर्मी यह तक नहीं देख रही कि अब राहत इंदौरी इस दुनिया में नहीं रहे.उन्हें लेकर कई तरह के ट्वीट अंशुल तिवारी के ट्वीट के कमेंट ऑप्शन में आए

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ट्वीट को लेकर राहत इंदौरी के अनेक प्रशंसकों ने भाजयुमो नेता और बीजेपी को घेरा है और इसे लेकर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। राहत इंदौरी के एक फैन ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी का स्मरण कराया है। उन्होंने कहा है कि वाजपेयी जी अपने घनघोर से घनघोर दुश्मन को भी सम्मान दिया करते थे। राहत इंदौरी के प्रशंसकों ने यह भी कहा कि किसी की मृत्यु के बाद उसके ख़िलाफ़ इस तरह की टिप्पणियों को भारतीय संस्कृति के ख़िलाफ़ करार दिया गया है। ‘ट्रोल आर्मी’ भी पूरी तरह से सक्रिय है। अंशुल तिवारी के इस ट्वीट को बड़ी संख्या में लोगों ने लाइक किया है। इस ‘आर्मी’ ने राहत साहब के बारे में अनेक भद्दे कमेंट भी किये हैं.

हैरत अंगेज तथ्य यह है कि देश भर के तमाम बड़े बीजेपी नेताओं के अलावा सीएम शिवराज सिंह चौहान, वीडी शर्मा और अन्य प्रादेशिक नेताओं ने राहत साहब के निधन पर अफसोस जताते हुए उनके अवसान को साहित्य जगत एवं मध्य प्रदेश-देश के लिए बड़ी क्षति करार दिया है। सीएम शिवराज सिंह ने राहत इंदौरी के निधन के बाद ट्वीट दो ट्वीट किये थे। सीएम ने कहा था कि राहत इंदौरी का निधन एमपी और देश के लिए अपूरणीय क्षति है। सीएम के शोक संवेदना वाले ट्वीट के जवाब में भी बीजेपी के कई कार्यकताओं ने राहत इंदौरी के लिए अपशब्दों का उपयोग किया है। फेसबुक के तमाम ग्रुप्स पर भी राहत इंदौरी को एंटी हिन्दू और देश का दुश्मन बताते हुए कई आपत्तिजनक पोस्ट की गई हैं.

लेकिन सवाल यह है कि जिस पार्टी के सीएम राहत साहब के निधन पर दुख जता रहे हों, उसी पार्टी के कुछ नेता इस तरह की बकवास कर रहे हैं। क्या नफ़रत फैलाने वाले ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई होगी या नहीं? कोरोना होने के बाद राहत इंदौरी को इंदौर के अरबिंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां इलाज के दौरान मंगलवार को उन्हें दो बार हार्ट अटैक आया और उनका निधन हो गया। राहत इंदौरी के एमपी या देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में चाहने वाले थे। उनके मशहूर शेर और शायरियों की फेहरिस्त बेहद लंबी है। ऐसी ही एक शायरी जिसमें उन्होंने कहा था- ‘‘मरने पर मेरी एक पहचान लिख देना, लहू से मेरी पेशानी पर हिंदुस्तान लिख देना।’’, बेहद चर्चित है.

अंशुल तिवारी के जिस ट्वीट पर सोशल मीडिया पर बवाल छिड़ा हुआ है, वह आज भी तिवारी के ट्विटर अकाउंट और फेसबुक वाॅल पर चस्पा है। बीजेपी के किसी बड़े नेता की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी है। हालांकि बीजेपी प्रवक्ता आशीष अग्रवाल ने अंशुल तिवारी के ट्वीट से किनारा करते हुए कहा है कि राहत साहब को लेकर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी है और वही पूरी पार्टी की लाइन है। उधर, प्रदेश कांग्रेस ने बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा है, ‘‘बीजेपी का यही कल्चर है और उनकी पाठशाला में वही सिखाया जाता है जो अंशुल तिवारी राहत इंदौरी के निधन के बाद लिख रहे हैं.

रिपोर्ट सोर्स, पीटीआई

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