नई दिल्ली: बिहार विधानसभा पहले सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी महागठबंधन के बीच में एक नई राजनीतिक जमीन तैयार करने की कोशिश दिखाई दी है, इसका नेतृत्व पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा कर रहे हैं, यशवंत सिन्हा कभी बीजेपी के बड़े नेता हुआ करते थे, लेकिन मोदी सरकार बनने के बाद उन्हें तवज्जो नहीं दी गई, इस कारण वो लगातार हाशिये पर आते चले गए और अब अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए बिहार की राजनीति में एक नये मोर्चे के रूप में ख़ुद को लांच करने की कोशिश कर रहे हैं,

यशवंत सिन्हा ने शनिवार को पटना में प्रेस वार्ता की और कहा कि आने वाले चुनाव में हम लोग बिहार में एक नयी शक्ति पैदा करना चाहते हैं, उन्होंने कहा कि राजनीति में हम सब मिलकर एक शक्ति केंद्र बनायेंगे, उन्होंने दावा किया कि यह भविष्य ही तय करेगा कि हम तीसरे हैं, दूसरे या पहले हैं लेकिन हम लोग मिलकर मजबूती के साथ चुनाव लड़ेंगे क्योंकि बिहार को बदलने और बेहतर बिहार बनाने में यहाँ की सरकार की बड़ी भूमिका होगी, यशवंत ने नीतीश के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पर अविश्वास जताते हुए उस पर प्रहार किया और कहा कि जब तक प्रदेश में यह सरकार रहेगी, तब तक बेहतर बिहार नहीं बनाया जा सकता है,

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सिन्हा ने कहा कि बिहार की बदहाली के लिए सीधे-सीधे वर्तमान सरकार जिम्मेदार है, इसलिए बेहतर बिहार बनाने के क्रम में इस सरकार को हटाना हमारा पहला कदम होगा, पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘हम लोग जो बातें आपके बीच में रख रहे हैं, उन्हीं बातों के साथ हम जनता के बीच जाएंगे, बिहार को बेहतर बनाने का खाका तैयार हो रहा है जिसे जल्द ही आप सब के बीच रखा जायेगा, बिहार की प्रतिष्ठा को वापस लाने के लिए अपने जीवन के बचे-खुचे समय को उसमें लगायेंगे,’

अपने संबोधन में यशवंत सिन्हा ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा और कहा कि आज एक बार फिर लगातार 20 वें दिन भारत सरकार ने पेट्रोल- डीजल की कीमतें बढ़ाई हैं, सिन्हा ने कहा कि कभी-कभी कीमत में बढ़ोतरी करना आवश्यक हो जाता है, लेकिन मैं अपने अनुभव के आधार पर कह सकता हूँ कि आज की स्थिति में केंद्र सरकार का यह कदम मुनाफाखोरी के अलावा और कुछ भी नहीं है,

बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं में शुमार रहे सिन्हा ने कहा, ‘सरकार ही मुनाफाखोरी करे इससे दुखद और क्या हो सकता है क्योंकि हम सब जानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत नरम है,’ यशवंत सिन्हा ने कहा कि सरकार एक तरफ तो 20 करोड़ के पैकेज की घोषणा करती है और दूसरी ओर आम लोगों को ही त्रस्त करने में लगी है,

सिन्हा ने राज्य सरकार समेत बिहार के मुख्य विपक्षी महागठबंधन की आंकड़ों के सहारे जमकर आलोचना की, उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रीय स्तर पर बिहार की औद्योगिक इकाईयों की हिस्सेदारी महज 1.5 प्रतिशत है, हम सब जानते हैं कि कैसे एक-एक कर प्रदेश के उद्योग-कारखाने बंद होते चले गए, स्वास्थ्य सेवाओं में हम एक बार फिर देश भर की सूची में न्यूनतम स्तर पर हैं, शिक्षा में 5-17 साल के बच्चों के स्कूल में दाखिले से जुड़े आंकड़े भी बताते हैं कि हम सबसे निचले पायदान पर हैं,’ बिहार में चुनाव से पहले क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नर्वस हैं, देखिए वीडियो –

वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्रालय संभाल चुके सिन्हा ने कहा, ‘मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) में बिहार पिछले 27 साल से लगातार सबसे पीछे है, बिहार में ग़रीबी सबसे ज्यादा है, यहाँ प्रति व्यक्ति आय 47, 541 रुपये है, जो राष्ट्रीय औसत का मात्र एक तिहाई है, हर साल यहाँ से करीब 40 लाख लोग दूसरे राज्यों में काम करने जाते हैं क्योंकि यहाँ कोई काम नहीं है,’

राज्य सरकार के हाल के कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री को भी घेरा और कहा कि चलती-चलती वेला में किसी घोषणा का कोई मतलब नहीं होता, सिन्हा ने कहा कि जब आप 15 साल तक घोषणापत्र लागू नहीं कर पाए तो आगे घोषणा करने का आपको कोई अधिकार नहीं है, उन्होंने प्रवासी मजदूरों की भी चर्चा की और उनके हालात को ह्रदय विदारक बताया और कहा कि आजादी के 73 साल बाद भी बिहार की यह दुर्दशा है, बिहारी होने के गर्व को इस बात से ठेस पहुंची है,      

प्रेस वार्ता की शुरुआत शोक प्रस्ताव के साथ हुई, पिछले दिनों आकाशीय बिजली गिरने से कई ग्रामीणों की मौत पर शोक जताया गया और राज्य के पांच शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि भी दी गई, इस दौरान मंच पर पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री देवेन्द्र प्रसाद यादव और नागमणि समेत पूर्व सांसद अरुण कुमार, पूर्व मंत्री रेणु कुशवाहा और नरेंद्र सिंह भी उपस्थित थे

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