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कोरोना: यूनानी विद्वानों इब्न ए सीना, इब्न ए रुश्द आदि ने संक्रमण की कल्पना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, संक्रमण जनित रोगों से फैलने और बचाव का न सिर्फ़ वर्णन किया है- डॉ ख़ुर्शीद अहमद अंसारी

कोविड 19 वेबिनार श्रृंखला 3: “यूनानी चिकित्सा,अतीत और वर्तमान;कोरोना के संदर्भ में, कोविड 19 अपडेट और अब तक की शोधयात्रा” इन दो प्रमुख उप विषयों पर जामिया हमदर्द पूर्व छात्र संगठन, सऊदी अरब अध्याय रियाज़ द्वारा आयोजित किया गया। इन विषयों पर मुख्य व्यख्यान देने का सौभाग्य डॉ शारीक़ सय्यद, इंचार्ज डीन, कलेसकर कैंपस, महाराष्ट्र के साथ मुझे भी मिला।डॉ शारीक़ सय्यद ने विस्तार से कोरोना वायरस , कोविड 19 , उपलब्ध औषधीय प्रबंधन और टीकाकरण आदि बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की।

कोरोना महामारी जिस प्रकार पिछले कुछ दिनों में तेज़ी से भारत मे अपने पांव पसार रही है उस से भारत भी अछूता नहीं है। देश मे कोरोना संक्रमण के 13 लाख से अधिक मामले रिकार्ड किये गए, कल एक दिन में 50000 संक्रमण के केसेज़ दर्ज किए गए और अब तक कोविड 19 रोग से मरने वालो की संख्या 33000 से ऊपर चली गयी है, जो चिंता का विषय है! संक्रमण को रोकने के प्रयास और अपनाई गई नीतियों का बहुत स्पष्ट और अधिक प्रभाव तो नही दिख रहा है लेकिन संतोष जनक यह है कि इस संक्रमण के मरीज़ों के ठीक होने का राष्ट्रीय औसत  लगभग 70 प्रतिशत के आस पास रिकॉर्ड किया गया। विश्व के शोधार्थियों ,वैज्ञानिकों ने लगभग स्पष्ट कर दिया है कि निकट भविष्य में कोविड 19 के रोगियों के लिए कोई अचूक दवा का मिलना या टीकों का मिल पाना असंभव तो नही है लेकिन बेहद मुश्किल है।

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इस परिस्थिति में शरीर की प्रतिरोधन क्षमता को सशक्त करने के जो उपाय हैं उन्हें अपनाया जाए तो काफ़ी हद तक इस रोग के संक्रमण से न सिर्फ़ बचा जा सकता है बल्कि मध्यम श्रेणी के कोविड 19 रोगियों का इलाज संभव है। इस बाबत विश्व स्वास्थ्य संगठन , भारत के आयुष मंत्रालय ने आयुष चिकित्सा पद्धतियों आयुर्वेद, यूनानी आदि के प्राचीन धरोहर का सफल योगदान देने को बढ़ावा देने की कोशिश की। यूनानी चिकित्सा पद्धति एक मौलिक सिद्धांतो पर आधारित मानव शरीर को सार्वभौमिक इकाई मानता है जिसमे शरीर की स्वयं की प्रतिरोधन क्षमता को संतुलित और सशक्त बनाने में छः 6 अनिवार्य कारकों का महत्वपूर्ण स्थान है।

मैंने विस्तार से ईसा पूर्व से लेकर 14 वी सदी ईस्वी के सुविख्यात यूनानी वैज्ञानिकों ,चिकित्सको का  ऐतिहासिक उद्धरण करते हुए आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के उद्भव और विकास में किस तरह योगदान दिया है उसे भुलाया नहीं जा सकता और किस प्रकार यूनानी विद्वानों विशेषकर रब्बन तबरी, मुहम्मद बिन ज़करिया राज़ी, इब्न ए सीना, इब्न ए रुश्द आदि ने अपने ग्रंथो में विस्तार से संक्रमण की कल्पना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, संक्रमण जनित रोगों से फैलने और बचाव का न सिर्फ़ वर्णन किया है बल्कि यदि दूषित वायु से होने वाले कोरोना जैसे लक्षण वाली बीमारियों का नैदानिक प्रबंधन बताया है वो अनुकरणीय है।

इस लिए मैंने प्रयास किया कि विषयानुकूल इन धरोहरों से और उपलब्ध प्राकृतिक चिकित्सा के विशाल ज्ञान भंडार से लाभान्वित हुआ जा सकता है। राज़ी के संक्रमण सिद्धान्तों के आधार पर ही आधुनिक जर्म थ्योरी का प्रतिपादन किया गया है। उसकी किताब “लिबर वरिओलिस एट मिराबिलिस-किताब अल जुदरी वल हस्बाह” चेचक और खसरा जैसे महामारी पर न सिर्फ़ विस्तार से बहस करती है बल्कि कई चिकित्सा इतिहास कारों ने राज़ी को वर्तमान समय के टीकाकरण का जनक भी माना है, उसी ने शल्य चिकित्सा में कैट गट का 11 वी 12वीं सदी में इस्तेमाल किया था।

यूनानी चिकित्सा में नज़ला, ज़ुकम जैसी सांस की बीमारियां जो कोविड 19 के भी लक्षण जैसे हैं उनके लिए बचाव का तरीक़ा, व्यक्तिगत सफ़ाई, क्वारंटाइन, धूनी के प्रयोग के साथ ही प्रतिरोधन क्षमता को सशक्त करने वाली जड़ी बूटियों के विस्तृत प्रयोग के वैज्ञानिक आधार दिए हैं। किताब अल हावी या अलक़ानून फी तिब्ब में वायु जनित रोगों के निदान के लिए खुशबूदार दवाओं, मसालों और विशिष्ट औषधियों के सेवन की विधि का विस्तार से न सिर्फ़ वर्णन है बल्कि उनका इस्तेमाल सदियों से कोविड 19 से समानता वाले लक्षणो के रोगियों का किया जाता रहा है। जैसे उन्नाब, सपिस्ता, बेहदाना, ज़ाफ़रान, जंजबील, दार चीनी, तेज़ पात, हल्दी, काफ़ूर , ख़तमी, ख़ाकसी आदि।

ऐसे समय मे जब हमारे पास सटीक और अचूक दवा उपलब्ध नही है तो समय आ गया है कि हम अपनी पारंपरिक और वैज्ञानिक अवधारणाओं पर आधारित यूनानी, आयुर्वेद आदि पारंपरिक पद्धतियो पर अपनी निर्भरता बढ़ाएं और अपने ऐतिहासिक धरोहर का पुनरावलोकन किया जाए।जिस से कि हम भविष्य में भी इस तरह की महामारी ही नही दूसरे और असाध्य रोगों का प्राकृतिक समाधान और निदान ढूंढ सकें। मैं जामिया हमदर्द अलमनी असोसिएशन सऊदी चैप्टर के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर नासिर सिद्दीक़ी, डॉ इरशाद आलम, डॉ अंज़ारूल इस्लाम,डॉ माजिद ग़नी संचालक वेबिनार और दूसरे सभी हमदर्द विवि के पूर्व छात्रों को धन्यवाद करते हुए उन्हें बधाई देता हूँ कि उन्होंने सात समंदर पार रह कर भी पद्मभूषण स्व हकीम अब्दुल हमीद साहब के सपनो में रंग भरने की कोशिश में लगे हुए हैं।

कोरोना काल मे ज्ञान विज्ञान के नवीनतम सूचनाओ से लोगो को अवगत करा रहे हैं। प्रोफ़ेसर नासिर सिद्दीक़ी का एक बार फिर धन्यवाद कि उनके कारण दो दशकों से भी अधिक समय के बाद कुछ हॉस्टल के साथियों डॉ शारिक सय्यद, मुबश्शिर हुसैन मसूदी, डॉ रीमा ग़ज़ाला, डॉ माजिद ग़नी आदि के दर्शन का सौभाग्य दिलाया और बेहद शानदार अतीत के कुछ सब्ज़ रास्तों से गुजरने का मौक़ा मिला।

डॉ ख़ुर्शीद अहमद अंसारी, असोसिएट प्रोफ़ेसर, यूनानी चिकित्सक, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष द अलमनी असोसिएशन ऑफ जामिया हमदर्द, नई दिल्ली

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