तालिबान का दारुलउलूम देवबंद से क्या है संबंध? जानिए मौलाना अरशद मदनी की जुबानी

देवबंद। मीडिया एवं कुछ लोगों द्वारा तालिबान का देवबंद से सम्बंध बताया जा रहा है। कहा जाता है कि तालिबानी शैखुल हिंद मौलाना महमूदुल हसन को अपना इमाम मानते हैं। जमीअत उलमा ए हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने इस बात से इंकार करते हुये विस्तृत जानकारी दी है।
मौलाना मदनी ने कहा कि तालिबानी देवबंद के मौलाना महमूदुल हसन को अपना इमाम बताते हैं, लेकिन तालिबानियों का देवबंद की तालीम से कोई सम्बंध नही है। वह शैखुल हिंद मौलाना महमूदुल हसन की देश की आजादी के लिए की गयी जद्दोजहद को देखते हुये उन्हें अपना इमाम मानते हैं। दरअसल शैखुल हिंद मौलाना महमूदुल हसन देवबंद के सदर मुदर्रिस तथा अपने समय के सबसे बड़े आलिम थे। अंग्रेजों से नफ़रत उनकी रग-रग में बसी हुई थी। जिसके कारण अंग्रेजों ने उन्हें करीब चार साल तक जेल में रखा। मौलाना महमूद पहले शख़्स थे, जिन्होंने उस समय अफगानिस्तान में आज़ाद हिन्द हुकूमत कायम की थी। जिसके सदर महाराजा प्रताप सिंह को बनाया था। वज़ीर-ए-आजम (प्रधानमंत्री) मौलाना बरकतुल्लाह
वज़ीर-ए-खारीजा (विदेश मंत्री) मौलाना उबैदुल्लाह सिंधी को बनाया था।
आज के जो तालिबान है, यह शैखुल हिंद मौलाना महमूदुल हसन की उस आज़ाद हिन्द तहरीक से जुड़े हुये लोगों की नस्लों में से हैं। इसलिये ये उन्हें अपना इमाम मानते हैं। यह कहते हैं कि जिस तरह मौलाना ने अपनी पूरी ज़िन्दगी देश की आज़ादी के लिए काम किया था,इसी तरह हम भी उनके नक्शेकदम पर चल कर काम कर रहे हैं।
अरशद मदनी ने कहा कि देवबंद के दरवाजे तालीम के समय भी खुले रहते हैं। देवबंद में किस तरह की तालीम दी जाती है,यह कोई भी आकर देख सकता है। हम प्यार और मुहब्बत की तालीम देते हैं।
अरशद मदनी ने कहा कि कोई भी हुकूमत तभी कामयाब होती है, जब वो किसी के साथ भेदभाव नही करती। यदि तालिबानी किसी के साथ दोहरा रवैया नही अपनाएंगे और किसी पर ज़ुल्म नही करेंगे तो हम उनकी तारीफ़ करेंगे। लेकिन यदि तालिबानी दूसरी हुकूमतों की तरह बहुसंख्यक होने की ताकत का ग़लत इस्तेमाल करते हुये ग़लत काम करेंगे तो हम उनकी मुख़ालफ़त करेंगे। अगर तालिबानी दूसरों का हक़ मार कर इसे इस्लामी इंकलाब बताते हैं तो हम इसे इस्लामी इंकलाब नही मानते हैं।
तालिबान वो क़ौम है जिसने कभी किसी की गुलामी पसन्द नही की। तालिबानी खुद को आज़ादी का सिपाही बता रहे हैं। जैसे हमने आज़ादी की लड़ाई लड़ी,ऐसे ही वो लड़ रहे हैं। आज़ाद हिन्द तहरीक के कारण यह लोग शैखुल हिंद मौलाना महमूदुल हसन को अपना आदर्श मानते हैं।
अरशद मदनी ने अंत में कहा कि अगर तालिबानी अमन और इंसाफ से काम करते हैं तो यह हुकूमत चलेगी,नही तो कोई इन्ही में से इनके ख़िलाफ़ खड़ा होकर,इनकी जड़ें उखाड़ देगा

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