शमशाद रज़ा अंसारी

ग़ाज़ियाबाद जिलाधिकारी कार्यालय से बमुश्किल छह मिनट की दूरी पर फीस माफ़ी एवं अन्य मुद्दों को लेकर चल रही अभिभावकों की भूख हड़ताल स्थल तक पँहुचने में जिलाधिकारी अजय शंकर पांडे को छह दिन का समय लग गया। जिलाधिकारी की यह संवेदना महिलाओं की सेहत बिगड़ने की वजह से नही जागी,अपितु किसान यूनियन के नेताओं द्वारा धरनास्थल पर जिलाधिकारी के आने पर जिलाधकारी कार्यालय के घेराव करने की धमकी देने के बाद डीएम धरनास्थल पर पँहुचे। हालाँकि डीएम धरनास्थल पर पँहुच तो गये लेकिन उनका रवैया कहीं से भी अभिभावकों की माँगों को पूरा करने का नही रहा। पैरेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष सीमा त्यागी ने अपनी बिगड़ी सेहत के बावजूद डीएम से सवाल करने की हिम्मत दिखाई लेकिन डीएम उनके सवालों के जवाब देने की हिम्मत नही दिखा सके और सवालों के बीच ही बिना कोई जवाब दिए धरनास्थल से निकल गये। धरनास्थल से निकल कर गाड़ी में बैठते ही डीएम को उस समय अप्रिय स्थिति का सामना करना पड़ा जब विजयनगर से ट्रैक्टर चोरी होने के बाद कार्यवाई न होने की शिकायत को लेकर आईं महिलायें डीएम की गाड़ी के आगे लेट गयीं। महिलाओं के डीएम की गाड़ी के आगे लेटते ही हड़कम्प मच गया। पुलिस द्वारा महिलाओं को हटाने के भरसक प्रयास किये गये लेकिन महिलायें नही हटीं। हारकर डीएम को कार से उतर कर पैदल ही कार्यालय तक जाना पड़ा।

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ज्ञात हो कि लॉक डाउन के दौरान आई आर्थिक मंदी के कारण ग़ाज़ियाबाद पैरेंट्स एसोसिएशन फीस माफ़ी एवं मुद्दों को लेकर छह दिन से जिलाधिकारी कार्यालय के सामने बैठी है। जिसमें एसोसिएशन की अध्यक्ष सीमा त्यागी, साधना सिंह और भारती शर्मा भूख हड़ताल पर हैं। इनमें साधना सिंह एवं भारती शर्मा को तबियत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालाँकि तबियत ठीक होने के बाद साधना सिंह फिर से भूख हड़ताल में शामिल हो गयीं। पाँच दिन गुज़रने और दो महिलाओं के अस्पताल जाने के बाद भी डीएम ने धरनास्थल पर पंहुचना आवश्यक नही समझा था।

धरने के पाँचवे दिन किसान यूनियन के नेताओं ने पैरेंट्स एसोसिएशन को समर्थन दिया था। छठे दिन किसान यूनियन के नेताओं ने कहा कि यदि डीएम दोपहर तक धरनास्थल पर स्वयं नही आये तो किसान यूनियन द्वारा डीएम कार्यालय का घेराव किया जायेगा। इसके बाद डीएम अजय शंकर पांडे करीब पौने दो बजे एडीएम सिटी शैलेन्द्र सिंह के साथ धरनास्थल पर पँहुचे। धरनास्थल पर पँहुचकर डीएम ने एसोसिएशन के पदाधिकारियों से बातचीत प्रारम्भ की। इसी बीच बीमार पड़ी सीमा त्यागी ने हिम्मत करके माइक लेकर जिलाधिकारी से सवाल पूछने शुरू किये तो जिलाधिकारी एसोसिएशन की अध्यक्ष सीमा त्यागी के सवालों को बीच में ही छोड़ कर बिना कोई जवाब दिए चले गये। डीएम को इस तरह जाते हुये देख कर किसान यूनियन ने प्रशासन मुर्दाबाद के नारे भी लगाये।

भूख हड़ताल के छठे दिन भी विपक्षी नेताओं का अभिभावकों को समर्थन जारी रहा। लेकिन सत्ता पक्ष का कोई भी नेता धरणस्थल पर नही पँहुचा। सत्ता पक्ष के नेताओं के इस प्रकार से व्यवहार से ऐसा प्रतीत होता है कि इन नेताओं की नज़र में यह लड़ाई स्कूलों एवं अभिभावकों की लड़ाई न होकर सत्ता एवं अभिभावकों की लड़ाई है। सबके साथ सबका विकास एवं शिक्षा की सर्वोपरी बताने वाली सरकार का उदासीन रवैया भी यह दिखा रहा है कि सब सरकारी दावे खोखले हैं। सरकार का झुकाव परेशान अभिभावकों और शिक्षा के नुकसान की तरफ न होकर शिक्षा माफियाओं की तरफ है।

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