शाहजहाँपुर (यूपी) : आज हम आपको दिखाएंगे एक ऐसे गाँव की हक़ीक़त जहां पर जाने के लिए कोई सड़क ही नही यहां बदहाली का आलम ये है के लोग इस गाँव मे जाना भी पसंद नही करते। उत्तर प्रदेश में जहां एक ओर विकास की लहर दौड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ यह तस्वीरें प्रशासन की पोल खोल रही है। ये एक ऐसा गांव है जहां पर कई लोगो की जान सिर्फ इस वजह से चली गई क्यों उनको अस्पताल पहुंचना ही नसीब नहीं हो पाया। इस गांव के बच्चे सिर्फ इसलिए स्कूल नहीं जा पाते हैं क्योंकि हल्की बारिश भी गांव के रास्ते को तालाब में तब्दील कर देती है। वहीं अगर कोई बीमार अस्पताल तक पहुंचता भी है तो उसके लिए गांव वालों को कड़ी मेहनत करनी होती है या तो मरीज को ट्रैक्टर पर सवार करके मुख्य मार्ग तक ले जाया जाए या फिर खटिया पर मरीज़ को लेटा कर मुख्य मार्गो तक ले जाते हैं।

हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के जनपद शाहजहांपुर की जहां ब्लाक जलालाबाद के मिघौल और अशरफपुर मढ़ा गाँव आज भी अपने विकास के लिए तरस रहे हैं। हैरानी की बात यह है की आजादी से आज तक इस गाँव को मुख्य मार्ग से नही जोड़ा गया और न ही गाँव मे कोई सड़क बनाई गई। गांव वालों का साफ तौर पर कहना है कि चुनाव के समय तो कई नेताजी भी वोट मांगने गाँव में आते हैं और भरोसा दिलाते हैं कि जल्द ही आपके गाँव को सड़क से जोड़ा जाएगा मगर चुनाव होते ही नेताजी और उनके वादे दोनों ही गायब हो जाते हैं,और गांव का नसीब अपनी बदहाली पर फिर से रोता नजर आता है। वही जब गांव में कोई महिला अगर गर्भवती हो जाए तो उसको भी इलाज के लिए खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, तब उसको इलाज मिल पाता है। गाँव के लोग साधन और सड़क न होने के कारण गाँव में ही कैद होकर रह गए है।

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कैमरे पर ग्रामीणों का दर्द जब छलका तो उन्होंने बताया कि हमारे गांव में लोग रिश्ते करने से भी कतराते हैं अगर कोई रिश्तेदार आता है तो उसे आज भी खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। गांव के अधिकतर लोग खेती किसानी का काम करते हैं जो सड़क ना होने की वजह से अपनी फसलों को सही जगह बेचने के लिए भी नहीं ले जा सकते ओने पौने दामों में अपनी फसल को आज भी बेचते हैं। गांव के युवा शिक्षा प्राप्त करने के लिए आवागमन का साधन ना होने की वजह से पढ़ाई से वंचित रह जाते हैं। ग्रामीण बुजुर्गों का कहना है कि हमने तो जन्म से आज तक इस गांव के लिए सड़क का सपना देखा है जो अभी तक पूरा नहीं हुआ अब आने वाली पीढ़ी का भी साधन ना होने की वजह से भविष्य अंधकार में नजर आता है। कई सरकारें बदली निजाम बदले लेकिन हमारे गांव के लोगों का भविष्य आज भी अपनी बदहाली के लिए रोता और आंसू बहाता नजर आ रहा है।

वही जब इन गांव के बारे में शाहजहांपुर की मुख्य विकास अधिकारी प्रेरणा शर्मा से पूछा गया तो उनका कहना था की जानकारी में आया है अशरफपुर मढा एवं मिघौल गांव है जहां पर लिंक रोड तो है मगर एक मजरा है जहाँ पर पुल की समस्या है जिसके लिए उन्होंने खण्ड विकास अधिकारी को आदेशित किया है कि वो उसमे कंप्लीट रिपोर्ट बनाकर दे अगर हम उसे किसी फण्ड से जिला स्तर पर कर पाएँगे तो उसे करने की कोशिश करेंगे नही तो ज़िला अधिकारी के माध्यम से लेटर लिखाएंगे और उसमें आवश्यक कार्रवाई करेंगे। मुख्य विकास अधिकारी ने माना कि अगर कोई मजरा  गांव आदि सड़क से कनेक्टेड ना हो तो उसमें काफी समस्याएं आती हैं वहां पर मेडिकल प्रॉब्लम्स आ सकती हैं और नॉर्मल day-to-day प्रॉब्लम भी आती हैं साथ ही उन्होंने कहा कि वह सभी ब्लॉक से रिपोर्ट लेंगी कि ऐसे कितने मजरे हैं जो कनेक्टेड नहीं है उनको प्रायरिटी पर लेकर मनरेगा या जीबीडीपी में उनके मार्गों को रखवाये ताकि प्रायरिटी पर वो काम हो जाए।

हालांकि प्रशासन इस बात को मानने को तो तैयार है कि जनपद में इस तरह के गांव और मजरे मौजूद है, मगर इन पर विकास की लहर कब तक आएगी इस बारे में कोई सटीक जवाब नहीं मिल सका है। बड़ा सवाल यह है कि इस गांव के लोगों को कब ऐसा जीवन मिलेगा जब यह लोग नगर और कस्बों में आसानी से पहुंच पाए या भविष्य में भी यह गांव लगातार नेता और प्रशासन की अनदेखी का शिकार होते रहेंगे।

ब्यूरो रिपोर्ट, शाहजहाँपुर

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