संविधान को लागू करने और उसकी व्याख्या करने के लिये डिश्जुयरी (न्यायतंत्र) जम्हूरियत (लोकतंत्र) की जान है, जो अपने इख़्तियारात में ख़ुद-मुख़्तार (स्वायत्त) है। जुडिश्यरी की बुनियादी ज़िम्मेदारी है कि वह हर नागरिक के बुनियादी इन्सानी हक़ों को प्रोटेक्शन दिलाए और संविधान और क़ानून का…
आख़िर रेल मंत्री पीयूष गोयल को अपने ट्वीटर हैंडल पर रेलवे भर्ती की परीक्षाओं की तारीख़ का एलान करना ही पड़ गया। रेलवे की भर्ती परीक्षा देने वाले करोड़ों नौजवान न जाने कब से उनके ट्वीटर हैंडल पर गुहार लगा रहे थे मगर मंत्री जी…
नई दिल्ली : आखिर क्या कारण है कि बीजेपी फेसबुक को बचाने में लगी है? उसे सूचना प्रौद्योयगिकी पर बनी संसद की स्थायी समिति के चेयरमैन के तौर पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर का फेसबुक को नोटिस दे कमेटी के सामने पेश होने का फ़ैसला…
डॉ० मोहम्मद नजीब कासमी सम्भली केन्द्रीय सरकार की ओर से अनलाक 4 के लिए निर्देश जारी कर दिए गए हैं, जिसके अनुसार देश की सभी शैक्षणिक संस्थानें 30 सितंबर तक बंद ही रहेंगी। केवल आनलाइन क्लासों का सिलसिला जारी रहेगा। अक्तूबर में भी खुल सकेंगी…
आज जीडीपी के आंकड़े आए हैं। भारत की किसी भी पीढ़ी ने ये आंकड़े नहीं देखे होंगे। 5 अगस्त को नए भारत के उदय के बाद इन आंकड़ों ने रंग में भंग डाल दिया है। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही की जीडीपी -23.9 प्रतिशत…
कलीमुल हफ़ीज़ राम-मन्दिर की आधार शिला के बाद हिन्दुस्तानी मुसलमान ख़ुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। हिन्दुस्तान की तहरीके-आज़ादी के लिये क़दम-क़दम पर अपने त्याग और क़ुर्बानी के निशानात देख रहे हैं, उन्हें दिल्ली से लाहौर तक के हर पेड़ पर मुसलमान मुजाहिदीने-आज़ादी…
ख़ुर्शीद अह़मद अंसारी पिछले साल जश्न ए रेख़्ता में पुरुषोत्तम अग्रवाल जी से मिलने नेशनल स्टेडियम गया था। स्टेडियम के गेट पर एक बड़ी सी कांस्य मूर्ति के छत्र छाया में तस्वीर खींची(सेल्फ़ी) और उस मूर्ति के पीछे छुपी हुई सारी दास्तान एकसरे पर्दा ए…
समझा है जिस क़द्र हक़ और शहीदाने कर्बला को, बाबा-ए-कौम तेरी एही अदा दुनिया पे छा गयी।। महात्मा गाँधी का शुमार बीसवीं सदी के अज़ीम शख़्सियात में किया जाता है। गाँधी की शख़्सियत मुख़्तलिफ़ रंगों की आईना-ए-दार थी। उनकी ज़ात में क़ुदरत ने बैयकवक़त बहुत…
महर्रम कोई पर्व नहीं शोक का महीना है। इस महीने के शोक दिवसों से हमारा शताब्दीयों पुराना संबंध है। विपरीत और घातक परिस्थितीयों में भी हम अपने अपने सांस्कृतिक रूप में शोक मनाते,अज़ादारी करते रहे हैं,और हम ऐसा क्यों न करते कि हमारी रचना तथा…
शिक्षक पढ़ाने में अपनी डिवाइस , अपना डेटा, अपनी बिजली खर्च कर रहा है। स्कूल-कॉलेज फीस पूरी ले रहे हैं और शिक्षक को पहले से कहीं ज्यादा समय देने के बाद भी उसे सैलरी या तो आधी-पौनी दे रहे हैं या फिर नहीं दे रहे…
