रवीश कुमार हिन्दी पत्रकारिता से भारत का एक नुकसान होता है। जाने-अनजाने में। आम तौर पर हिन्दी पत्रकारिता की दुनिया तीन-चार विषयों और क्षेतों तक सीमित रह जाती है। लेकिन भाषा की ताकत के कारण इसका चरित्र और प्रभाव राष्ट्रीय माना जाने लगता है। इसलिए…
रवीश कुमार क्या बिहार को रुकतापुर कहा जा सकता है? सब्र करने और कई दिनों तक इंतज़ार करने में बिहार के लोगों के धीरज का औसत दुनिया में सबसे अधिक होगा। यहां एक छात्र सिर्फ बीए पास करने के लिए तीन साल की जगह पांच…
बापू! तुम हर साल अपने जन्म दिन पर बहुत याद आते हो। मगर केवल एक दिन के लिये। बापू!क्या तुम्हें मालूम है कि हिन्दुस्तान का हाल क्या है? वही देस जिसके लिये तुमने न जाने कितने पापड़ बेले थे। अपना ऐश व आराम खोया था,…
दिल्ली/ उस्मानपुर: ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस के बैनर तले 2 अक्तूबर गांधी जयंती के अवसर पर पहला पुश्ता उस्मानपुर में मुफ्त चिकित्सा कैंप का आयोजन किया गया जिसमें लगभग 500 से अधिक मरीज़ों की जांच की गई। कार्यक्रम का उद्घाटन चौधरी मतीन अहमद ने…
कलीमुल हफ़ीज़ सुदर्शन न्यूज़ ने यूपीएससी जिहाद पर सिलसिलेवार कुछ एपिसोड्स पेश करके देश का भला किया हो या न किया हो, लेकिन मुसलमानों का भला ज़रूर कर दिया है। इसलिये कि हिन्दुस्तानी मुसलमान जो न अपनी सही पोज़िशन को जानते हैं और जान भी…
नई दिल्ली : दादी बिलकिस हापुड़ के गाँव कुराना की रहने वाली हैं। टाइम मैगज़ीन में दादी का नाम आने से गाँव का नाम रोशन हुआ है। जिससे गाउं में जश्न का माहौल और ग्रामीणों में ख़ुशी की लहर है। कुराना गांव के ग्राम प्रधान…
प्रभावशाली व्यक्तित्व प्रखर चिंतक एक अ़ाम भारतीय सा, भीड़ में गुम होजाने वाला समान्य सा चेहरा, जिनके दुबले पतले शरीर में समाया हुआ था, आकाश सा व्यक्तित्व समुद्र सी गहरी सोच और समय पर परिवर्तन के पदचिन्ह छोड़ जाने की अ़दम क्षमता, ऐसे थे एकात्मक…
कलीमुल हफ़ीज़ इन्सान के लिये तालीम हासिल करने का अमल उसकी पैदाइश के साथ ही शुरू हो गया था। जब पैदा करने वाले ने पहले इन्सान को ख़ुद से कुछ नाम सिखाए थे और फ़रिश्तों से तालीमी मुक़ाबला (Competition) कराया था तो हज़रते-इन्सान ने वो…
मोहम्मद इरफान अहमद जिस कृषि विधेयक का विरोध आज ये कांग्रेस वाले कर रहें हैं, वही इनके चुनावी घोषणापत्र का प्रमुख विषय रहा था, ढकोसलेबाज कांग्रेसी अपनी गंदी राजनीति बंद करें और किसान हित में हुए फैसले का स्वागत करें, सही क्या और गलत क्या…
मेरे प्यारे बेरोज़गार मित्रों, छोटा पत्र लिख रहा हूँ। मैं आपके आंदोलन से प्रभावित नहीं हूँ।आपमें जनता होने का बौद्धिक संघर्ष शुरू नहीं हुआ है। आपकी राजनीतिक समझ चार ख़ानों तक ही सीमित है। इसलिए आप लोगों से कोई उम्मीद नहीं रखता। जो युवा मीडिया…
