नई दिल्ली : तीनों नए कृषि कानून के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन जारी है, हर किसी को सरकार और किसानों के बीच कल होने वाली दसवें राउंड की बातचीत का इंतज़ार है.

उससे पहले आज सुप्रीम कोर्ट दिल्ली पुलिस की अर्जी पर सुनवाई करेगा, पुलिस ने अपनी याचिका में 26 जनवरी को किसानों के ट्रैक्टर मार्च पर रोक लगाने की मांग की है.

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इस बीच अमित शाह ने एक बार फिर से दोहराया है कि कृषि कानून से किसानों की आय बढ़ेगी, लेकिन किसान अपनी ज़िद पर अड़े हैं.

अमित शाह ने कहा, मोदी सरकार किसानों के कल्याण के लिए काम करने के लिए प्रतिबद्ध है, तीनों कृषि कानून किसानों की आय को कई गुना बढ़ाने में मदद करेंगे, अब किसान देश और दुनिया में कहीं भी कृषि उत्पाद बेच सकते हैं.

राकेश टिकैत ने रविवार को कहा कि किसान केंद्र के नये कृषि कानूनों के खिलाफ ‘मई 2024 तक’ प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं.

टिकैत ने कहा कि वे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी चाहते हैं, कृषि कानूनों के खिलाफ किसान 26 नवंबर, 2020 से दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं.

उनकी मांग है कि तीनों नये कानूनों को वापस लिया जाए जिन्हें केंद्र ने कृषि क्षेत्र में बड़ा सुधार बताया है, किसानों ने आशंका जताई है कि नये कानून एमएसपी के सुरक्षा घेरे को समाप्त करने और मंडी प्रणाली को बंद करने का रास्ता साफ करेंगे.

कृषि मंत्री ने आंदोलनरत किसान संगठनों से कहा कि वे एक आपसी अनौपचारिक समूह बनाकर तीनों कृषि कानूनों पर यदि कोई ठोस मसौदा सरकार के समक्ष पेश करते हैं तो वो ‘खुले मन’ से उसपर चर्चा करने को तैयार है.

उन्होंने कहा कि सरकार और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से नौवें दौर की वार्ता ‘सौहार्दपूर्ण माहौल’ में हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका, हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि 19 जनवरी को होने वाली अगले दौर की बैठक में किसी निर्णय पर पहुंचा जा सकता है.

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