चंडीगढ़ः शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने आज केंद्र सरकार को किसानों के खिलाफ दमनकारी नीतियां अपनाकर कांग्रेस की तर्ज पर राष्ट्रीय एकता को खतरे में न डालने की नसीहत दी। पार्टी की कोर कमेटी ने पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की अध्यक्षता में एक बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा कि किसानों को हिंदू-सिक्ख में बांटने की कोशिशों से शांति व सद्भावना का माहौल प्रभावित होगा। पार्टी अध्यक्ष के प्रमुख सलाहकार हरचरण बैंस ने मीडिया को बताया कि पार्टी अपनी शताब्दी के अवसर को संघर्ष समर्पण दिवस के रूप में मनायेगी।

प्रस्ताव में सरकार से ‘अड़ियल रवैया‘ त्यागने की नसीहत देते हुए कहा गया है कि सरकार यदि कानूनो के हर प्रावधान को बदलने के लिए तैयार है तो कानूनों को रद्द ही क्यों नहीं कर देती। पार्टी ने आंदोलन को सांप्रदायिक और अलगाववादी रंग देने के प्रयासों की निंदा की और कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष, राष्ट्रवाद और देशभक्ति से भरपूर है। आंदोलनकारी किसानों के बच्चे सीमा पर चीन व पाकिस्तान के खिलाफ सीमाओं पर लड़ रहे हैं।

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प्रस्ताव में हिंदुओं और सिखों को बांटने के प्रयासों पर चिंता व्यक्त की गई है और कहा गया है कि शिअद इस ‘साजिश‘ के खिलाफ पूरी ताकत से संघर्ष करेगा। पार्टी के अनुसार किसानों का आंदोलन जनता का आंदोलन है और यह भारत बंद को समाज के हर तबके से इसे मिले समर्थन से भी जाहिर होता है।

पार्टी ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर पर केंद्र सरकार से ‘गुप्त गठजोड़‘ के तहत आंदोलन को कमजोर करने का आरोप लगाया और कहा कि कैप्टन एक तरफ केंद्र में सत्तासीनों से गुप्त बैठकें करते रहे और दूसरी तरफ किसानों को जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार करने की नसीहत देते रहे।

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