नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता दुर्गेश पाठक ने एक पत्र लिखकर दिल्ली के उप राज्यपाल महोदय एवं सेंट्रल विजीलेंस कमिशन (सीवीसी) को गाजीपुर स्लॉटर हाउस की टेंडर प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों में ईस्ट दिल्ली नगर निगम के मेयर निर्मल जैन एवं अन्य निगम अधिकारियों की भूमिका की जांच करने की मांग की है।


बीते दिनों ईस्ट दिल्ली नगर निगम के मेयर निर्मल जैन जी ने गाजीपुर स्लॉटर हाउस की पुरानी ठेकेदार कंपनी अलाना प्राइवेट लिमिटेड को बिना किसी नियम कानून का पालन किए, 2 साल का अतिरिक्त टेंडर दे दिया। जिसको लेकर आप नेता दुर्गेश पाठक ने प्रेस वार्ता कर इसकी जानकारी सार्वजनिक की थी। प्रेस वार्ता के जवाब में मेयर निर्मल जैन जी ने कहा, क्योंकि किसी अन्य कंपनी ने टेंडर के लिए आवेदन नहीं किया, इस कारणवश अलाना कंपनी को ही 2 साल का अतिरिक्त टेंडर दे दिया गया। हालांकि बाद में निर्मल जैन जी का यह बयान भी झूठ साबित हुआ। टेंडर के लिए आवेदन करने वाली अन्य तीन कंपनियों में से एक के पार्टनर ने इसकी जानकारी दुर्गेश पाठक के साथ साझा की। दुर्गेश पाठक ने एक अन्य प्रेस वार्ता के माध्यम से यह जानकारी भी सार्वजनिक कर मेयर निर्मल जैन जी के झूठ का पर्दाफाश किया।

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आम आदमी पार्टी के दबाव के पश्चात मेयर निर्मल जैन जी को नया टेंडर जारी करना पड़ा। परंतु प्रश्न ये उठता है कि जो अनियमितता, जो गड़बड़ियां पिछले टेंडर को देने में की गई उसके पीछे मेयर निर्मल जैन जी और निगम के अधिकारियों की अलाना कंपनी के साथ क्या सांठगांठ थी? मेयर निर्मल जैन जी ने किसी भी कंपनी के आवेदन न करने का झूठ क्यों बोला? इन सब बातों की गहराई से जांच होनी चाहिए।

ज्ञात रहे की इसी अलाना कंपनी द्वारा स्लॉटर हाउस में नियमों का उल्लंघन और गड़बड़ियां किए जाने को लेकर भाजपा के पूर्व मेयर विपिन बिहारी सिंह जी ने 16 जनवरी 2019 को एक पत्र लिखकर सीवीसी में इस कंपनी की जांच की मांग की थी। न केवल विपिन बिहारी सिंह जी ने बल्कि उनके साथ साथ मौजूदा 58 निगम पार्षदों ने भी उस शिकायत पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, जिनमें से वर्तमान मेयर निर्मल जैन जी भी एक थे।

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