नई दिल्ली/बस्तर: छत्तीसगढ़ में बस्तर के आदिवासी एक अलग ही संक्रमण से मारे जा रहे हैं, उस कथित संक्रमण को हम नक्सल उन्मूलन कह सकते हैं, जहां सरकार ने लॉक डाउन के नाम पर आदिवासी गांवों में कैम्प तैनात कर दिया है, जहां आदिवासी लॉक हो गए हैं, अगर कोई निकल जाता है तो नक्सल उन्मूलन का वायरस फर्जी मुठभेड़ बन कर इन्हें मौत के मुंह में समा ले जाता है, फिर पुष्टि के लिए पुलिस एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर देती है, 

फलाना लाखों का ईनामी था, उस आदिवासी को पता भी नहीं रहता होगा कि आठ लाख का ईनामी हो सकता हूं, खैर 80 के दशक से बस्तर में कथित नक्सल उन्मूलन वायरस फैला हुआ है जो कभी दर्जनों पुलिस वालों की जान ले लेता है तो कभी दर्जनों आदिवासियों की न जाने हजारों मारे जा चुके हैं, तमाम सरकारें इस वायरस का अब तक वैक्सीन भी नहीं ढूंढ पाई हैं,

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ताजातरीन इस कथित नक्सल उन्मूलन के वायरस का शिकार बस्तर, दंतेवाड़ा जिले के एक 15 साल का आदिवासी लड़का और एक अन्य हुआ है, 

पूरा मामला यह है कि छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग अन्तर्गत दंतेवाड़ा जिले के इंद्रावती नदी तट पर बसे गांव नेलगोड़ा-गुमलनार इलाके में गुरुवार को हुई पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में 2 नक्सलियों के मारे जाने का पुलिस ने दावा किया है, 

जिसे सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी ने फर्जी करार दिया है, सोनी सोरी ने मोबाइल पर बताया कि जिस रिशु इस्ताम को पुलिस प्लाटून नं 16 का डिप्टी कमांडर बता रही है, आधार कार्ड में उसकी जन्मतिथि वर्ष 2005 की है, इसके हिसाब से उसकी उम्र सिर्फ 15 वर्ष की थी, 

सोनी सोरी कहती हैं,  “मैं मान लेती हूं नक्सलियों का संघम रहा भी होगा क्योंकि इधर दो पाटों के बीच पीस के आदिवासी ही बलि का बकरा बनते हैं लेकिन पकड़ कर क्यों मारे क्या थाने, न्यायालय बन्द हो गए है? आधार कार्ड के हिसाब से 15 साल उसकी उम्र है वो 8 लाख का ईनामी नक्सली बताया जा रहा? आखिर वो लड़का बंदूक कौन से उम्र में पकड़ा होगा? मतलब 8 से 9 साल में बंदूक पकड़ा होगा सरकार को शर्म आनी चाहिए ऐसे वाहियात कहानी गढ़ के आदिवासियों को मारने के लिए”,

बता दें कि रिशु इस्ताम और माटा नाम के ग्रामीण को नाव पार करते वक्त पुलिस पकड़क़र ले गई और गोली मार दी, इस मामले की पड़ताल के लिए वे स्वयं घटना स्थल तक जाएंगी, 

सोनी सोरी ने बताया उन्होंने माटा की पत्नी जिलो बाई से बात की, जिलो बाई ने बताया कि गांव की अन्य महिलाओं के साथ उस दिन वो इंद्रावती नदी पार कर राशन लेने तुमनार आई थी, क्योंकि थोड़ा बहुत पानी गिरा था तो पति हल चला रहे थे, उन्होंने उसे जाने के लिए कहा था उसके पीछे वो आते, 

 जिलो बाई ने सोनी को बताया कि “मैं चवाल ली और मेरा पति और भतीजा इंद्रावती नदी में नाव के पास खड़े थे क्योंकि चावल को उस पार नाव से पार करना था, हम लोग राशन उस पार नाव से ले गए थे, उसी समय बिना वर्दी के कुछ लोग आए और मेरे पति को बांध कर ले गए”, 

उन्होंने आगे कहा कि “मेरे साथ जो महिलाएं थीं उन सबने इसे देखा, मेरे गोद में छोटा सा बच्चा था, एक हाथ से छुड़ाने का कोशिश की, वे लोग भागा-दौड़ी मचाए हुए थे, मैं डर गई, इस घटना के कई प्रत्यक्षदर्शी भी हैं”, रिशु की मां पालो, पिता बदरू, माटा की पत्नी जिलो बाई, माटा के पिता गुडसा उनकी शिकायत है, जिसमें उन्होंने कहा है कि  राशन लेने आए युवकों में रिशु व माटा को नदी किनारे ले जाकर कुछ दूर पर गोली मार दी,  

सोनी सोरी सवाल खड़े करते हुए कहती हैं चलो ये भी मान लेते हैं बाल संघम में था मुठभेड़ में मारा गया लेकिन ईनामी कैसे हो गया? बस्तर में पैदा होते ही ईनामी हो जाते है बंदूक पकड़ने लगते हैं क्या? पुलिस की कहानी बस्तर में पुरानी है जो हर मुठभेड़ में गढ़ा जाती है, 

इस मामले को लेकर दैनिक पत्रिका से बातचीत में दन्तेवाड़ा एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव ने कहा कि मारा गया युवक रिशु इस्ताम इंद्रावती नदी पार स्थित पीडियाकोट का रहने वाला था, उसकी उम्र 22 से 24 साल थी, जो वर्ष 2007 से बाल संघम सदस्य के तौर नक्सली संगठन से जुड़ा था, वर्ष 2010 से उसे दलम में शामिल कर लिया गया, मुलाकात करने आये परिजनों ने खुद इस बात को स्वीकार किया, इतने लंबे समय से शामिल रहने के बाद उसकी उम्र 22-23 वर्ष से कम कैसे हो सकती है, पीएम रिपोर्ट से सच्चाई का खुलासा हो जाएगा,

( आभार: जनचौक)

फ़ोटो

सोनी सोरी मृतक परिवार से बात करते, 

रिशु इस्ताम का आधार कार्ड, 

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