नई दिल्ली : PM मोदी ने रविवार को 15वें G20 शिखर सम्मेलन को संबोधित किया, PM मोदी ने अपने संबोधन में जलवायु परिवर्तन समेत पर्यावरण जैसे कई मुद्दों पर अपने विचार रखे.

PM मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से लड़ने पर अपना ध्यान केंद्रित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से केवल बंद दरवाजों के पीछे नहीं बल्कि एकीकृत, व्यापक और समग्र तरीके से लड़ा जाना चाहिए.

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PM मोदी ने कहा हमारा ध्यान महामारी से नागरिकों और अर्थव्यवस्था को बचाने पर है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है.

PM मोदी ने कहा कि हमने वर्ष 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर खराब भूमि को दोबारा सही करने का लक्ष्य रखा है, हम एक गोलाकार अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित कर रहे हैं.

PM ने कहा कि पर्यावरण के साथ मिलकर सौहार्द के साथ रहने के पारंपरिक लोकाचार से प्रेरित मेरी सरकार की प्रतिबद्धता के चलते भारत ने भारत ने कम कार्बन और जलवायु-लचीला विकास प्रथाओं को अपनाया है, भारत न केवल पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा कर रहा है, बल्कि उनसे आगे भी है.

सौर ऊर्जा के महत्व पर बात करते हुए मोदी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन सबसे तेजी से बढ़ते अंतरराष्ट्रीय संगठनों में से एक है, हम अरबों डॉलर जुटाने की योजना बनाते हैं, हजारों हितधारकों को प्रशिक्षित करते हैं और अक्षय ऊर्जा में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देते हैं.

उन्होंने कहा कि आईएसए कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में योगदान देगा, जी20 का मौजूदा अध्यक्ष सऊदी अरब है, कोरोना वायरस के चलते इस साल का शिखर सम्मेलन वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हो रहा है.

जी 20 समूह में दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, ये देश वैश्विक जीडीपी में 85 प्रतिशत और वैश्विक आबादी में दो-तिहाई हिस्से का योगदान देते हैं, 1930 के महामंदी के बाद की सबसे खराब वैश्विक मंदी के बीच शक्तिशाली समूह का यह शिखर सम्मेलन हो रहा है.

मार्च में एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन के बाद जी20 ने महामारी के प्रभाव को कम करने के लिये वैश्विक अर्थव्यवस्था में पांच हजार अरब डॉलर से अधिक पूंजी लगाने की घोषणा की थी.

इस बहुप्रतीक्षित शिखर सम्मेलन में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन, PM मोदी, जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों तथा समूह के अन्य सदस्य देशों के नेता भाग ले सकते हैं.

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