नई दिल्ली: रिपब्लिक चैनल के संपादक अर्णब गोस्वामी के ख़िलाफ़ मुंबई में एक और एफआईआर दर्ज की गयी है, यह एफआईआर बांद्रा रेलवे स्टेशन पर प्रवासी मज़दूरों के जमावड़े मामले में दर्ज हुई है, इसमें अर्णब पर धार्मिक उन्माद पैदा करने का आरोप लगाया गया है, ग़ौरतलब है कि मुंबई में ट्रेन से प्रवासियों को ले जाने की अफ़वाह के बाद हज़ारों की संख्या में मज़दूर बांद्रा स्टेशन पर इकट्ठा हो गए थे, जिसका समाचार देते समय अर्णब गोस्वामी ने बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया कि आख़िर सभी प्रवासी मज़दूर बांद्रा स्टेशन के पास स्थित मस्जिद के पास क्यों एकत्रित हुए हैं, उनका ज़ोर बांद्रा रेलवे स्टेशन की जगह मस्जिद पर ज्यादा था, और यह बात वह बार-बार कहते सुने और देखे गए, उनका कहना था कि आख़िर लोग मस्जिदों के पास ही क्यों इकट्ठा होते हैं,

मुंबई के पायधुनी पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई इस एफआईआर में अर्णब पर सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने का आरोप लगाया गया है और उनके ख़िलाफ़ तमाम संगीन क़िस्म की धाराएँ लगायी गयी हैं, जिनमें कई ग़ैरज़मानती हैं, उनके ख़िलाफ़ लगी प्रमुख धाराओं में 153, 153A, 295A, 500, 505 (2), 511, 120 (B), 505 (1) शामिल हैं, ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पालघर मामले में अर्णब के ख़िलाफ़ कोई और एफआईआर न दर्ज करने का निर्देश दिया था, लेकिन किसी दूसरे मामले में उनके ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करने की मनाही नहीं थी, उसी का लाभ उठाते हुए मुंबई पुलिस ने बांद्रा प्रवासी मजदूर जमावड़े मामले में यह एफआईआर दर्ज की है,

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रजा फाउंडेशन वेलफेयर सोसायटी के सेक्रेटरी और नल बाजार निवासी इरफान अबुबकर शेख ने अर्णब गोस्वामी पर यह एफआईआर पायधुनी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई है, एफआईआर में अर्णब गोस्वामी पर आरोप है कि वह और उनके चैनल रिपब्लिक टीवी ने बांद्रा की जामा मस्जिद पर टारगेट करके मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने की भरपूर कोशिश की, अर्णब गोस्वामी पर की गई एफआईआर में कहा गया है कि 14 अप्रैल को जिन प्रवासी मजदूरों ने बांद्रा रेलवे स्टेशन के सामने प्रदर्शन किया, उनका वहां की जामा मस्जिद से कोई संबंध नहीं था,

अपनी एफआईआर में अबु बकर शेख ने आरोप लगाया है कि 29 अप्रैल को हिंदी चैनल रिपब्लिक भारत ने बांद्रा में हुए प्रवासी मजदूरों के प्रदर्शन का फुटेज चलाया, जिसकी एंकरिंग अर्णब गोस्वामी कर रहे थे, अपनी एफआईआर में शेख ने कहा है कि बांद्रा में हुए प्रवासी मजदूरों के प्रदर्शन का वहां की मस्जिद से कोई लिंक नहीं था, वहां लोग सिर्फ इसलिए इकट्ठा हुए, क्योंकि मस्जिद के सामने खुली जगह थी, लेकिन अर्णब गोस्वामी ने सोच समझकर मस्जिद को साजिशन इस घटना का केंद्र बना दिया, ताकि शहर में सांप्रदायिक उपद्रव हो सके,

अपनी एफआईआर में शेख ने अर्णब गोस्वामी की उन टिप्पणियों को रेखांकित किया है, जिसमें गोस्वामी ने कहा था, अब से थोड़ी देर पहले मुंबई के बांद्रा में जामा मस्जिद है, और इस जामा मस्जिद के पास अचानक हजारों लोगों की भीड़ जमा हो गई, मुंबई के बांद्रा में मस्जिद के पास किसने भीड़ जुटाई? लॉकडाउन में हर भीड़ मस्जिद के पास क्यों जुटती है? शेख का आरोप है कि अर्णब की यह बातें मुसलमानों के लिए नफरत से भरी हुई थीं,

एफआईआर में कहा गया है कि टीवी न्यूज चैनलों पर कोविड-19 फैलाने में मुसलमानों को जिम्मेदार ठहराती कई बहसें और कई सवाल चल ही रहे थे, गोस्वामी ने इस तरह की नफरती टिप्पणियां मुस्लिम समुदाय के विरुद्ध नफरत और भी अधिक बढ़ाने के लिए कीं, एफआईआर में अबु बकर शेख ने आरोप लगाया है कि बांद्रा मस्जिद के सामने हुए प्रवासी मजदूरों के प्रदर्शन को गोस्वामी ने मस्जिद से जोड़कर प्रवासी मजदूरों के प्रदर्शन को सांप्रदायिक रंग दिया, जिसकी कोई वजह नहीं बनती थी,

वहीं पायधनी पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया कि उन्होंने रिपब्लिक टीवी के नाम से खबरिया चैनल चलाने वाले अर्णब गोस्वामी पर नफरत फैलाने का मुकदमा दर्ज कर लिया है, उन्होंने बताया कि मामले की तहकीकात की जा रही है, सबूतों के लिए हमने उक्त शो की फुटेज आदि एक पेन ड्राइव में जमा कर ली है,

आपको बता दें कि इसके पहले पालघर लिंचिंग मामले में अर्णब के ख़िलाफ़ देश के अलग-अलग हिस्सों में कई संगीन धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गयी थी, उसके बाद गोस्वामी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए देश में के किसी भी हिस्से में इस मसले पर एफआईआर दर्ज करने पर रोक लगा दी थी, लेकिन इसके साथ ही उसने नागपुर में दर्ज एफआईआर पर पुलिस को उनसे पूछताछ की छूट दी थी,

और नागपुर मामले को मुंबई ट्रांसफ़र कर दिया था, जिसके बाद मुंबई पुलिस ने एक दिन गोस्वामी को बुलाकर उनसे तक़रीबन 11 घंटे पूछताछ की थी, और आगे भी उस मसले पर ज़रूरत पड़ने पर पूछताछ की बात कही थी, लेकिन नये एफआईआर के बाद अर्णब की परेशानी और बढ़ गयी है, पालघर वाले एफआईआर में ग़लत तरीक़े से घटना को हिंदू-मुस्लिम रंग देने का आरोप लगाया गया था, लेकिन नये मामले में उन पर धार्मिक उन्माद भड़काने का आरोप लगाया गया है

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