नई दिल्ली : कृषि बिलों को रद्द करने की मांग को लेकर धरने पर बैठे किसानों के आंदोलन का एक महीना पूरा हो गया है, किसान ठीक एक महीने पहले सिंघु बॉर्डर पर 26 नवंबर को जुटे थे.

सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर में पिछले एक महीने में टेंट और ट्रैक्टर में किसानों की पूरी गृहस्थी बस गई है.

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सड़क पर रात गुजार रहे किसान सर्द हवाओं की चपेट में आकर भले ही एक पल को कांपने-डोलने लगते हों, लेकिन उनके इरादे अभी नही डोले हैं.

किसान कानूनों को रद्द करने की मांग पर बरकरार हैं, इस बीच किसानों और सरकार के बीच पांच से छह राउंड की वार्ता हुई लेकिन गतिरोध खत्म नहीं हो पाया है,

नए साल में सरकार से लेकर किसान सभी यही उम्मीद कर रहे हैं कि किसानों की इन मांगों का सर्वमान्य हल निकले, इस सिलसिले में किसान संगठनों की अहम बैठक होने जा रही है, इस मीटिंग में किसान संगठन पीएम मोदी द्वारा बातचीत के लिए दी गई नई पेशकश पर चर्चा करेंगे और आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे.

किसान संगठनों ने संकेत दिया है कि वे सरकार के साथ एक बार फिर से वार्ता शुरू कर सकते हैं, ताकि इस गतिरोध का कुछ समाधान निकाला जा सके.

किसान संगठनों ने कहा है कि वे शनिवार को एक बैठक करेंगे, इस बैठक में केंद्र द्वारा बातचीत की पेशकश का क्या जवाब दिया इस पर एक औपचारिक फैसला लिया जा सकता है.

सरकार किसान संगठनों के साथ अगले दो से तीन दिनों के अंदर बातचीत की टेबल पर बैठ सकती है,  प्रदर्शन कर रहे एक किसान नेता ने अपना नाम गोपनीय रखने की शर्त पर कहा कि MSP को कानूनी गारंटी देने की उनकी मांग बनी रहेगी.

इस नेता ने कहा, “केंद्र के पत्र पर फैसला करने के लिए शनिवार को हमारी एक और बैठक होगी, इस बैठक में हम सरकार के साथ बातचीत फिर शुरू करने का फैसला कर सकते हैं क्योंकि उसके पिछले पत्रों से मालूम होता है कि वह अब तक हमारे मुद्दों को नहीं समझ पाई है.

किसान नेता ने कहा कि इन तीन कानूनों को रद्द करने की हमारी मांग से MSP को अलग नहीं किया जा सकता है, इस नेता ने कहा कि नए कृषि कानूनों में निजी मंडियों का जिक्र है, यह कौन सुनिश्चित करेगा कि हमारी फसल यहां पर तय एमएसपी पर बेची जाए?

बता दें कि शुक्रवार को भी कई किसान संगठनों ने मीटिंग की थी, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से बातचीत के लिए मिले नए न्योते पर कोई फैसला नहीं हो पाया.

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